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United Nations Army Rules: क्या किसी देश में जंग के बीच संयुक्त राष्ट्र भेज सकता है अपनी सेना, जानें UN चार्टर का नियम?

United Nations Army Rules: मिडिल ईस्ट में अभी भी तनाव जारी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या यूनाइटेड नेशंस किसी भी जंग को रोकने के लिए अपनी सेना भेज सकता है या नहीं.

United Nations Army Rules: अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच जंग अब अपने नौवें दिन में पहुंच चुकी है. मिडिल ईस्ट में जोरदार एयरस्ट्राइक और मिसाइल हमलों की खबरें हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल ने ईरान और लेबनान में भारी बमबारी की है. वहीं ईरान ने वेस्ट एशिया में अमेरिका और इजरायली मिलिट्री बेस को निशाना बनाकर जवाब दिया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री दखल दे सकता है और जंग रोकने के लिए सैनिक भेज सकता है.

क्या यूनाइटेड नेशंस रोक सकता है जंग?

यूनाइटेड नेशंस जंग में मिलिट्री दखल दे सकता है और जंग रोकने के लिए सैनिक भी भेज सकता है.  लेकिन इसकी प्रक्रिया काफी ज्यादा मुश्किल है और यूनाइटेड नेशंस चार्टर के हिसाब से सख्ती से चलती है. यूनाइटेड नेशंस के पास अपनी कोई परमानेंट आर्मी नहीं है और वह सिर्फ अपनी ताकतवर बॉडी यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल द्वारा तय की गई खास कानूनी शर्तों के तहत ही सेना तैनात कर सकता है. 

यूनाइटेड नेशंस के पास कोई स्टैंडिंग आर्मी नहीं 

कई इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशंस के उलट यूनाइटेड नेशंस कोई परमानेंट मिलिट्री फोर्स नहीं रखता है. इसके बजाय यह सदस्य देशों द्वारा अपनी मर्जी से दिए गए सैनिकों पर निर्भर है. जब यूनाइटेड नेशंस शांति सेना या फिर मिलिट्री मिशन भेजने का फैसला करता है तो भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और कई यूरोपियन देश सैनिक, पुलिस वाले और सामान भेजते हैं. ये सेनाएं यूनाइटेड नेशंस के झंडे तले काम करती हैं.

सिक्योरिटी काउंसिल की मंजूरी 

किसी भी लड़ाई के दौरान संयुक्त राष्ट्र सैनिकों को भेजने के लिए सबसे जरूरी शर्त यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल से मंजूरी लेना है. सिक्योरिटी काउंसिल में 15 सदस्य हैं. इनमें पांच परमानेंट सदस्य हैं, यूनाइटेड स्टेट्स, रूस, चीन, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम. मिलिट्री तैनाती को मंजूरी मिलने के लिए कम से कम 9 सदस्यों को उसके पक्ष में वोट करना होगा. इसी के साथ पांच परमानेंट सदस्यों में से कोई भी अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल नहीं कर सकता. अगर एक भी परमानेंट सदस्य प्रस्ताव पर वीटो कर देता है तो यूनाइटेड नेशंस सैनिक नहीं भेज सकता. 

यूनाइटेड नेशंस चार्टर में मुख्य आर्टिकल्स की भूमिका 

झगड़ों में दखल देने का यूनाइटेड नेशंस का अधिकार यूनाइटेड नेशंस चार्टर के कई जरूरी आर्टिकल से तय होता है. खासकर चैप्टर VII के तहत, जो इंटरनेशनल शांति और सिक्योरिटी के लिए खतरों से निपटता है. आर्टिकल 39 सिक्योरिटी काउंसिल को यह तय करने की इजाजत देता है कि कोई स्थिति शांति के लिए खतरा है, शांति भंग करती है या फिर हमला है.  एक बार ऐसा तय होने के बाद काउंसिल आगे की कार्रवाई कर सकती है.‌ 

आर्टिकल 42 काउंसिल को हवाई, समुद्री या फिर जमीनी सेनाओं से मिलिट्री कार्रवाई को मंजूरी देने की शक्ति देता है.  अगर आर्थिक पाबंदियों या फिर डिप्लोमेटिक दबाव जैसे गैर मिलिट्री उपाय शांति बहाल करने में नाकाम रहते हैं.

आर्टिकल 51 किसी भी देश के लिए सेल्फ डिफेंस के अंदरूनी अधिकार को मान्यता देता है अगर उस पर हमला होता है. यह अधिकार तभी तक वैलिड रहता है जब तक सिक्योरिटी काउंसिल स्थिति को संभालने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा लेती.

पीसकीपिंग और मिलिट्री दखल

यूनाइटेड नेशंस आमतौर स्थिति के आधार पर दो अलग-अलग तरीकों से मिलिट्री कर्मियों को तैनात करता है. पीसकीपिंग ऑपरेशन सबसे आम हैं. इन मिशन को आमतौर पर सीजफायर या फिर शांति समझौते के बाद तैनात किया जाता है. इनके लिए शामिल देशों की सहमति की जरूरत होती है. पीसकीपर मुख्य रूप से सीजफायर की निगरानी करते हैं, आम लोगों की रक्षा करते हैं और शांति समझौते का समर्थन करते हैं. 

दूसरी तरफ शांति लागू करने वाले मिशन ज्यादा आक्रामक होते हैं और यूनाइटेड नेशंस चार्टर के चैप्टर VII के तहत होते हैं. ऐसे मामलों में सिक्योरिटी काउंसिल शांति बहाल करने के लिए मिलिट्री फोर्स का इस्तेमाल करने की इजाजत दे सकती है. भले ही इसमें शामिल देशों की सहमति ना हो.

यह भी पढ़ें:  पर्शियन गल्फ से किन-किन देशों को होती है एनर्जी सप्लाई, इन पर कितना डिपेंड है भारत?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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