Dictators Leadership: इन तानाशाहों ने बदल दी अपने देशों की किस्मत, रईसी में तमाम डेमोक्रेटिक देशों को छोड़ दिया पीछे
Dictators' Leadership: दुनिया में कुछ ऐसे तानाशाह भी हुए हैं जिन्होंने कुछ ऐसी आर्थिक नीति लागू की थी कि उनके देश की आर्थिक हालात को काफी ज्यादा फायदा हुआ था. आइए जानते हैं उन तानाशाहों के बारे में.

- तानाशाहों ने आर्थिक बदलाव किए पर राजनीतिक स्वतंत्रता दबाई।
- पार्क चुंग ही, ली कुआन यू ने आर्थिक समृद्धि लाई।
- डेंग शियाओपिंग, पिनोशे ने बाजार सुधारों से अर्थव्यवस्था सुधारी।
Dictators Leadership: इतिहास में कई ऐसे तानाशाहों के उदाहरण हैं जिन्होंने जबरदस्त आर्थिक बदलावों के दौरान लगभग पूरी सत्ता अपने हाथ में रखी. हालांकि इनमें से कई शासकों की राजनीतिक आजादी को सीमित करने और विपक्ष को दबाने के लिए आलोचना हुई है लेकिन उनकी आर्थिक नीतियों का उनके देशों पर काफी गहरा असर पड़ा.
पार्क चुंग ही
पार्क चुंग ही आधुनिक एशियाई इतिहास में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले नेताओं में से एक हैं. जब 1961 में उन्होंने सैन्य तख्तापलट के जरिए सत्ता संभाली तो दक्षिण कोरिया दुनिया के सबसे गरीब देश में से एक था और युद्ध से हुई तबाही से उभर रहा था. पार्क की लीडरशिप में दक्षिण कोरिया में तेजी से औद्योगीकरण हुआ और लगातार आर्थिक विकास हुए. उनकी सरकार ने निर्यात को बढ़ावा दिया, बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया और चेबोल के नाम से जाने जाने वाले बड़े पारिवारिक व्यापारिक समूह का समर्थन किया. इस दौरान सैमसंग, हुंडई और एलजी जैसी कंपनियां ग्लोबल ब्रांड बन गईं.
पार्क की आर्थिक उपलब्धियों के साथ-साथ तानाशाही शासन भी रहा. उन्होंने 1972 में युशिन संविधान लागू किया, राष्ट्रपति की शक्तियों को मजबूत किया, प्रेस की आजादी को सीमित किया और राजनीतिक विपक्ष को दबाया. 1979 में देश की खुफिया एजेंसी के प्रमुख द्वारा उनकी हत्या के साथ ही उनके शासन का अंत हुआ.
ली कुआन यू
सिंगापुर को एक छोटे से व्यापारिक बंदरगाह से दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में से एक बनाने का श्रेय ली कुआन यू को दिया जाता है. 1959 से 1990 तक उनकी लीडरशिप के दौरान सिंगापुर ने साफ सुथरे शासन, कुशल प्रशासन, विदेशी निवेश और विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे पर ध्यान दिया. यह देश फाइनेंस, शिपिंग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख केंद्र बन गया.
ली का प्रशासन सख्त सामाजिक अनुशासन बनाए रखने के लिए जाना जाता था. आलोचकों का ऐसा कहना था कि मुकदमा और कानूनी कार्रवाई के जरिए राजनीतिक विपक्ष पर भारी दबाव डाला जाता था. इसी के साथ मीडिया की आजादी पर कड़ी नजर रखी जाती थी.
डेंग शियाओपिंग
माओ त्से तुंग के दौर के बाद चीन को बदलने में डेंग ने काफी बड़ी भूमिका निभाई. 1978 में डेंग ने आर्थिक सुधार शुरू किया, जिसे ओपन डोर पॉलिसी के नाम से जाना जाता है. उन्होंने स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाए, विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया और कम्युनिस्ट पार्टी का कंट्रोल बनाए रखते हुए बाजार आधारित सुधार लागू किया. इन बदलावों ने चीन को दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में मदद की.
आर्थिक सुधारों को अपनाने के बावजूद डेंग ने कड़ा राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखा. उनकी सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुख्य रूप से 1989 में तियानमेन स्क्वायर पर लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के खिलाफ की गई कार्रवाई और नरसंहार के लिए याद किया जाता है.
ऑगस्टो पिनोशे
ऑगस्टो पिनोशे 1973 में सैन्य तख्तापलट के बाद सत्ता में आए और लगभग 2 दशकों तक चिली पर शासन किया. पिनोशे की सरकार ने अर्थशास्त्रियों की सलाह से बड़े पैमाने पर मुक्त बाजार सुधार लागू किए. इन अर्थशास्त्रियों को अक्सर शिकागो बॉयज के नाम से जाना जाता था. सरकारी उद्योगों का निजीकरण किया गया, व्यापार की बाधाएं कम की गई और आर्थिक उदारीकरण से निवेश आकर्षित किया गया. यही वजह है कि चिली लैटिन अमेरिका की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा.
आर्थिक प्रगति के साथ-साथ कठोर दमन भी हुआ. हजारों राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार किया गया, उन पर अत्याचार किए गए या फिर उन्हें मार डाला गया. इसी के साथ कई नागरिकों को देश छोड़ने पर भी मजबूर किया गया.
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