तहव्वुर राणा जेल में मांग रहा नॉनवेज, क्या कैदियों को मिल सकती हैं मनचाही सुविधाएं? ये हैं नियम
Jail Prisoners Rights And Demands: 26/11 मुंबई हमले का आरोपी तहव्वुर राणा जेल में नॉनवेज की डिमांड कर रहा है. लेकिन क्या कोई अपराधी जेल में मनमुताबिक मांग कर सकता है. इसको लेकर क्या नियम है.

26/11 आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा को भारत लाया जा चुका है और अब उसे अपने घर की याद सता रही है. वह अपने अधिकारियों से सजा के बारे में पूछता है. इसके अलावा यह भी जानकारी सामने आ रही है कि तहव्वुर राणा अपने परिवार से बात करना चाहता है. उसने जेल में अधिकारियों से पेन, पेपर, कुरान दिए जाने की मांग की थी. उसकी इन मांगों को तो पूरा कर दिया गया था, लेकिन अब उसने जांच एजेंसी से नॉनवेज की भी मांग की है. लेकिन क्या जेल में रहने वाले कैदी की हर डिमांड पूरी की जाती है, इसको लेकर नियम क्या है चलिए जान लेते हैं.
कैदियों के लिए बनाए गए हैं नियम
जेल प्रशासन और कैदियों के अधिकार व कर्तव्यों को लेकर प्रिजन्स एक्ट- 1894 और मॉडल प्रिजन्स मैनुअल बनाए गए हैं. इसके अलावा दिल्ली की जेलों को रेगुलेट करने के लिए दिल्ली प्रिजन्स एक्ट 2002 है. इसमें जेल में बंद कैदियों के लिए सुविधाएं और उनके अधिकार दिए गए हैं. मॉडल प्रिजन्स मैनुअल के तहत अंडर ट्रायल कैदियों को ज्यादा अधिकार मिलते हैं, सजा पा चुके कैदियों की अपेक्षा. संविधान में कैदियों के भी मौलिक अधिकार हैं. ऐसा नहीं है कि कोई अगर कैदी हो गया तो उसके मौलिक अधिकार भी उससे छीन लिए जाएंगे.
क्या सुविधाएं मुहैया कराता है जेल प्रशासन
जेल में बंद कैदियों को सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं, जो कि रोजमर्रा की जिंदगी के लिए जरूरी हैं. इसमें कैदियों के लिए साफ पानी, पहनने के लिए कपड़े, ताजा खाना, बिस्तर और मेडिकल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. इसके अलावा कैदियों को कानूनी सलाह, घरवालों को चिट्ठी लिखने की सुविधा और उनसे मुलाकात की भी इजाजत है. अंडर ट्रायल कैदी को मीडिया से बातचीत करने की भी सुविधा दी जाती है. जेल में कैदियों को ऐसा खाना दिया जाता है, जिसमें 2000 से लेकर 2400 कैलोरी होती है.
किन चीजों की होती है मांग
अंडर ट्रायल कैदियों को तो अपने कपड़े पहनने की इजाजत होती है, लेकिन सजा पा चुके कैदियों के लिए ऐसी कोई सुविधा और इजाजत नहीं होती है. जेल में कैदियों को काम करने की भी इजाजत दी जाती है, जिसके एवज में उनको मेहनताना मिलता है. जेल में रहने वाला कैदी आमतौर पर किताबें, घर का खाना, दवाएं, कुर्सी-मेज, मच्छरदानी, अपने लिए अलग बिस्तर और चादर की मांग कर सकता है. अगर वह हाई प्रोफाइल कैदी है और उसे अपने लिए जान का खतरा है तो वह सुरक्षा की भी मांग कर सकता है. कोर्ट में ये मांगे रखी जाती हैं और मंजूरी मिलने के बाद ही ये सुविधाएं मुहैया कराई जा सकती हैं.
क्या कहता है नियम
कोर्ट की मंजूरी के बिना कोई भी चीज बाहर से नहीं मंगवाई जा सकती है. प्रिजन एक्ट 1894 की मानें तो जेल के अधिकारियों को कैदियों के साथ किसी भी तरह से बिजनेस करने का कोई अधिकार नहीं है. न ही किसी भी तरह का डायरेक्ट या इन-डायरेक्ट लेन-देन करके कैदियों को कोई स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जा सकता है. बाहर कैदियों के जो भी बिजनेस चल रहे हों, उसमें जेल के लोग कोई हिस्सेदारी नहीं कर सकते हैं. ये नियम इसलिए बनाया गया है, ताकि जेल में सभी कैदियों को एक समान तरीके से ट्रीट किया जा सके.
यह भी पढ़ें: कौन थे बहादुर शाह जफर, जिनकी पेंटिंग पर औरंगजेब समझकर पोत दी गई कालिख
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL





















