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सुनीता विलियम्स ने स्पेस वॉक के दौरान की ISS की मरम्मत, जानें अंतरिक्ष में औजार कैसे करते हैं काम?

Sunita Williams Walk In ISS: अंतिरक्ष में स्पेस वाॅक करते हुए भारतीय मूल की अमेरिका अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने ISS की मरम्मत की. जानें अंतरिक्ष में किस तरह काम करते हैं. औजार

Sunita Williams Walk In ISS: भारतीय मूल की अमेरिका अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स फिलहाल अंतरिक्ष में है. कल यानी 16 जनवरी गुरुवार को उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन यानी ISS पर स्पेस वॉक की स्पेस वॉक के दौरान उनके साथ उनके साथी एस्ट्रोनॉट निक हेग भी थे. सुनीता विलियम्स और उनके साथी एस्ट्रोनॉट निक हेग ने स्पेस वॉक के दौरान इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की मरम्मत का काम किया.

बता दें सुनीता विलियम्स और उनके साथी की यह स्पेसवाॅक तकरीबन 6:30 घंटे की थी. अंतरिक्ष में जीरो ग्रेविटी होती है. इसीलिए अब लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि अंतरिक्ष में औजार किस तरह काम करते हैं. आखिर किस तरह की गई ISS की मरम्मत.  

अंतरिक्ष में किस तरह काम करते हैं औजार?

अंतरिक्ष की दुनिया धरती की दुनिया से अलग होती है. अंतरिक्ष में ग्रेविटी नहीं होती. इसलिए वहां ज्यादातर चीजें कर पाना बेहद मुश्किल होता है. उनके लिए अल्टरनेट ढूंढने पड़ते हैं. कल यानी 16 जनवरी को भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी एस्ट्रोनॉट निक हेग को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में मरम्मत करनी पड़ी. इसके लिए भारतीय समय अनुसार शाम 6:30 बजे स्पेस वाॅक शुरू की गई. जो कि 6:30 घंटे तक चली.

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उन्होंने इंटरनेशनल स्पेशल स्टेशन की डायरेक्शन डिसाइड करने वाले इंस्ट्रूमेंट की मरम्मत की, टेलिस्कोप पर लाइट फिल्टर को पैच किया और इंटरनेशनल डॉकिंग एडेप्टर पर लगे रिफ्लेक्टर डिवाइस को चेंज किया. बता दें अंतरिक्ष में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की मरम्मत करने के लिए किसी भारी औजार की जरूरत नहीं पड़ती. और ना ही किसी काम के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की मरम्मत करने का मतलब किसी औजार से उसे ठीक करना नहीं. बल्कि उसमें लगे पार्ट्स को ठीक करना होता है. 

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इतने दिनों से फंसी है अंतरिक्ष में

बता दें भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अब तक वापस धरती पर आ चुकीं होती. साल 2024 के जून महीने में वह अपने एस्ट्रोनॉट साथी बुच विल्मोर के साथ गईं थीं. एक सप्ताह बाद उन्हें वापस आना था. लेकिन बोइंग के नए स्टार लाइनर कैप्सूल में खराबी आने के चलते उन्हें इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर ही रुकना पड़ गया. अब मार्च-अप्रैल 2025 तक उनकी वापसी की संभावना जताई जा रही है. 

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