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अंतरिक्ष से वोट डालेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर, जानिए अमेरिका में वोट डालने के क्या है नियम?

US Presidential Election process: सुनीता विलियम्स अपने साथी बुच विल्मोर के साथ अंतरिक्ष से ही वोटिंग प्रक्रिया में भाग लेंगी, ऐसे में चलिए जानते हैं कि आखिर अमेरिका में चुनाव कैसे होता है.

एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स अपने साथी बुच विल्मोर के साथ स्पेस में हैं. साथ ही उनके आने की उम्मीदें फरवरी 2025 तक की जा रही हैं. ऐसे में नवंबर में अमेरिका में होने वाले चुनावों में वो पृथ्वी से 250 मील की दूरी से अंतरिक्ष से ही मतदान करेंगी. बता दें अमेरिका में इंसी साल नवंबर में चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर अमेरिका में वोट डालने के क्या नियम होते हैं और वहां इसकी प्रक्रिया क्या होती है? चलिए आज इस आर्टिकल में जानते हैं.

सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर कैसे करेंगे वोटिंग?

400 किलोमीटर दूर स्पेस सेंटर से सुनीता और बुच ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी चुनाव में वोट डालने के लिए नासा से पोस्टल बैलट का अरेंजमेंट करने की रिक्वेस्ट की है.

अमेरिका में कैसे होती है चुनाव की शुरुआत?

अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हर चार साल में नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाले पहले मंगलवार को होता है. यानी अगला राष्ट्रपति चुनाव 5 नवंबर 2024 को होगा. वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव से एक साल पहले ही इसकी प्रक्रिया शुरू हो जाती है. अमेरिका में दो मुख्य राजनीतिक दल डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन हैं, जिनके उम्मीदवार ही चुनावी अभियान की शुरुआत करते हैं. इस अभियान में अलग-अलग दलों के कई उम्मीदवार भाग लेते हैं और पैसा जुटाने के लिए रैली आयोजित करते हैं. इसके बाद डेमोक्रेट और रिपब्लिकन उम्मीदवार टीवी पर बहस शुरू करते हैं. ऐसे में बहस के दौरान प्रत्येक उम्मीदवार अपनी नीतियों और अन्य मुद्दों पर अपना बचाव करता है.

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दो चरणों में होता है चुनाव

अमेरिका में चुनाव दो चरणों में होता है. पहला होता है कॉकस और दूसरा होता है प्राइमरी.

कॉकस

कॉकस एक ऐसा चरण है, जिसमें पार्टी सदस्य चर्चा के बाद वोटिंग करते हैं और सबसे अच्छे उम्मीदवार का चयन करते हैं. डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन के अलग उम्मीदवार चुने जाते हैं. इसमें प्रतिनिधियों का चयन करने के लिए एक राजनीतिक पार्टी के स्थानीय सदस्यों की एक बैठक होती है. कॉकस में प्रतिनिधि को चुना जाता है.

प्राइमरी

दूसरी ओर प्राइमरी में राष्ट्रपति चुनाव से पहले 6 से 9 महीने के अंदर लोग अपने उम्मीदवार को चुनते हैं. इसमें अलग-अलग पार्टी के अलग-अलग प्रतिनिधियों में से सबसे अच्छे उम्मीदवार के लिए वोट किया जाता है, जो आम चुनाव में पार्टी का प्रतिनिधित्व करेगा. ज्यादातर राज्य प्राइमरी चुनाव आयोजित करते हैं. प्राइमरी मतदाता गुप्त वोटिंग करके अपने पसंदीदा उम्मीदवार का चयन करते हैं. इस दौरान लोग अपने-अपने क्षेत्रों में अपने पसंदीदा राष्ट्रपति के लिए वोट डालते हैं.

दूसरा चरण

राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के लिए प्रतिनिधियों का बहुमत पाना होता है. ऐसे में हर पार्टी राष्ट्रपति पद का अंतिम उम्मीदवार चुनने के लिए नेशनल कन्वेंशन (राष्ट्रीय सम्मेलन) आयोजित करती है. इस चरण में, प्राइमरी और कॉकस के दौरान चुने गए प्रतिनिधि अपने पसंदीदा उम्मीदवारों का 'समर्थन' करते हैं. सम्मेलनों के खत्म होने तक हर पार्टी से अंतिम राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का एलान होता है.

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वोट डालने के क्या है नियम?

आम चुनावों में अमेरिका के हर राज्य के लोग राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए वोट करते हैं. उम्मीदवारों के नाम वोटिंग मशीन पर इस समय तक छप जाते हैं. दूसरी ओर छोटे राजनीतिक दलों और निर्दलीयों के पास राष्ट्रीय सम्मेलन की छूट नहीं होती, लेकिन वे पात्रता आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद चुनाव में खड़े हो सकते हैं.

जब लोग अपना वोट डालते हैं, तो असल में वो एक ऐसे ग्रुप के लिए वोट कर रहे होते हैं जिन्हें इलेक्टर (निर्वाचक) कहा जाता है. राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार के पास इलेक्टर का अपना ग्रुप होता है (जिसे स्लेट के रूप में जाना जाता है). जब लोग राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए वोट करते हैं तो वो वास्तव में अपने उम्मीदवार के पसंदीदा इलेक्टर को चुन रहे होते हैं.

चौथा चरण होता है निर्वाचक मंडल

अमेरिका में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव सीधे नागरिकों द्वारा नहीं किया जाता है. बल्कि, दोनों को इलेक्टोरल कॉलेज नामक प्रक्रिया से चुना जाता है. इलेक्टोरल कॉलेज वो प्रक्रिया है, जिसमें हर राज्य के निर्वाचक या प्रतिनिधि ये निर्धारित करते हैं कि राष्ट्रपति कौन होगा. प्रत्येक राज्य को उसकी जनसंख्या के आकार के आधार पर निर्वाचकों की संख्या दी जाती है.

हर राज्य की नीति के मुताबिक, कुल 538 निर्वाचक (इलेक्टर) चुने जाते हैं. हर राज्य को कांग्रेस में उसके प्रतिनिधित्व के आधार पर एक निश्चित संख्या में इलेक्टर मिलते हैं. आम चुनाव के बाद निर्वाचक अपने वोट से राष्ट्रपति चुनता है और जिसे  270 वोट मिलते हैं और वो जीत जाता है.                        

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