Suhaag Raat Tradition: कहां से शुरू हुआ फर्स्ट नाइट का चलन, किसने मनाई थी पहली सुहागरात
Suhaag Raat Tradition: सुहागरात को शादी की पहली रात माना जाता है. इस रस्म की परंपरा, इसके इतिहास और अलग-अलग राज्यों में निभाई जाने वाली रस्मों के बारे में जानकारी दी गई है.

Suhaag Raat Tradition: शादी की बात होते ही सबसे ज्यादा चर्चा जिस रस्म की होती है, वह है सुहागरात यानी शादी की पहली रात. फिल्मों और सीरियलों में इसे फूलों से सजे बिस्तर, दूध के गिलास और शरमाती दुल्हन के रूप में दिखाया जाता रहा है, जिसकी वजह से यह रस्म हर किसी के लिए बेहद खास और उत्सुकता भरी बन जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह परंपरा आखिर शुरू कहां से हुई और किसने सबसे पहले यह रस्म निभाई थी. यह सवाल आज भी बहुत से लोगों के मन में उठता है, इसलिए आइए जानते हैं सुहागरात की परंपरा से जुड़ी दिलचस्प जानकारी.
कहां से आया सुहागरात शब्द और यह परंपरा
सुहागरात शब्द संस्कृत भाषा से निकला माना जाता है, जहां “सुहाग” का मतलब होता है सुहागन यानी विवाहित स्त्री का सौभाग्य. इतिहास से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, इस रस्म की शुरुआत मुगल और राजपूत राजघरानों से हुई मानी जाती है. मध्यकाल यानी मुगल और राजपूत शासन के दौर में शादी की पहली रात को एक खास समारोह की तरह मनाया जाता था, जिसमें नवविवाहित जोड़े के कमरे को फूलों से सजाया जाता था. बाद में ब्रिटिश शासन के दौर में भारतीय परंपरा और पश्चिमी सभ्यता के मेल से इस रस्म को और भी भावनात्मक रूप दिया गया. यह जरूर ध्यान रखने वाली बात है कि इतिहास में किसी एक तय व्यक्ति या जोड़े का नाम दर्ज नहीं है, जिसने सबसे पहले यह रस्म मनाई हो. यह परंपरा धीरे-धीरे राजघरानों से शुरू होकर पूरे समाज में फैलती चली गई.
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अलग-अलग राज्यों में अलग नाम और रस्में
खास बात यह है कि भारत में हर जगह इस रस्म को सुहागरात के नाम से नहीं जाना जाता. बंगाल में इसे फूलशय्या कहा जाता है, तमिलनाडु में इसे इरावु थिरुमा और महाराष्ट्र में पहिली रात्र के नाम से जाना जाता है, वहीं राजस्थान और पंजाब में इसे सुहागरात कहा जाता है. यह रस्म सिर्फ हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि जैन, बौद्ध, सिख और मुस्लिम समाज में भी अपने-अपने तरीके से मनाई जाती है. पूर्वी भारत के कुछ इलाकों में इसे शादी की चौथी रात को मनाया जाता है, इसलिए वहां इसे “चौथी रात” भी कहा जाता है. समय के साथ इस परंपरा का रूप भी बदलता गया है.
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