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SPG कमांडो को एक साल में कितनी दारू मिलती है, कितना होता है लिकर कोटा?

एसपीजी कमांडो और सुरक्षा बलों का लिकर कोटा उनकी रैंक पर निर्भर करता है. एक जवान को महीने में 4-5 बोतलें, तो वरिष्ठ अधिकारियों को 10 बोतल तक का कोटा मिलता है. आइए एसपीजी कमांडो के बारे में जानें.

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  • सख्त नियमों का पालन, निर्धारित सीमा से अधिक की अनुमति नहीं.

देश की सबसे सुरक्षित घेरे में रहने वाले प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के कमांडो अपनी जांबाजी और सख्त ट्रेनिंग के लिए जाने जाते हैं. सुरक्षा के इन रक्षकों को देश की सेवा के बदले सरकार द्वारा कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं, जिनमें कैंटीन की सुविधा भी शामिल है. अक्सर यह चर्चा होती है कि इन विशेष सुरक्षा बलों के जवानों और अधिकारियों को लिकर (शराब) का कितना कोटा मिलता है और क्या यह आम रक्षा कर्मियों से अलग होता है?

कैसे तय होता है शराब का कोटा?

एसपीजी कमांडो और अन्य रक्षा कर्मियों के लिए शराब का कोटा पूरी तरह से उनके पद यानी रैंक पर निर्भर करता है. सीसीएसडी (CSD) कैंटीन से मिलने वाली यह सुविधा हर किसी के लिए एक समान नहीं होती है. यदि हम निचले स्तर के जवानों या नॉन-कमीशंड ऑफिसर्स (NCO) की बात करें, तो उन्हें प्रति माह 4 से 5 बोतल (750 मिली) शराब का कोटा मिलता है. इस हिसाब से एक जवान साल भर में कुल 48 से 60 बोतलें प्राप्त कर सकता है.

वरिष्ठ अधिकारियों के लिए विशेष प्रावधान

जैसे-जैसे पद का स्तर बढ़ता है, यह कोटा भी उसी अनुपात में बढ़ जाता है. वरिष्ठ अधिकारियों के मामले में यह मासिक कोटा 10 बोतल प्रति माह तक पहुंच सकता है. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि विशेष सुरक्षा बलों जैसे कि एसपीजी और एनएसजी के कमांडो के लिए कैंटीन में प्रीमियम ब्रांड्स भी उपलब्ध होते हैं, जो उन्हें बाजार दर से काफी रियायती मूल्यों पर मिलते हैं. यह कोटा पूरी तरह से उनकी रैंक की गरिमा और जिम्मेदारी के अनुसार निर्धारित किया गया है.

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स्मार्ट कार्ड और स्टॉक का गणित

कैंटीन की शराब का कोटा किसी भी जवान या अधिकारी को सीधे तौर पर नहीं मिलता, बल्कि इसके लिए स्मार्ट कार्ड यानी लिकर कार्ड का उपयोग करना अनिवार्य है. बिना इस स्मार्ट कार्ड के कोई भी व्यक्ति रियायती दर पर शराब नहीं खरीद सकता है. साथ ही, यह कोटा कैंटीन में स्टॉक की उपलब्धता पर भी निर्भर करता है. यदि कोई जवान व्हिस्की की जगह बीयर लेना चाहता है, तो उसे विकल्प भी मिलता है, जहां वह एक बोतल व्हिस्की के बदले 4 बोतल बीयर ले सकता है.

क्या हैं नियम?

यह सुविधाएं केवल आधिकारिक इस्तेमाल के लिए और एक तय सीमा के भीतर ही दी जाती हैं. सीसीएसडी कैंटीन के नियम बेहद सख्त हैं और इनका दुरुपयोग पूरी तरह वर्जित है. एसपीजी जैसे विशेष बलों के लिए अनुशासन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है, इसलिए लिकर कोटा से जुड़ी हर गतिविधि का रिकॉर्ड उनके स्मार्ट कार्ड के जरिए सिस्टम में दर्ज होता है. स्टॉक की उपलब्धता के आधार पर इसमें बदलाव हो सकते हैं, लेकिन निर्धारित सीमा से बाहर जाने की अनुमति किसी को नहीं होती है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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