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MLA Election Cost: विधायक का चुनाव लड़ने में कितना आता है खर्च, जानिए कितने बेलने पड़ते हैं पापड़?

MLA Election Cost: पांच राज्यों में हुए मतदान के नतीजे 4 मई को आ रहे हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि विधायक का चुनाव लड़ने में कितना खर्च आता है?

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  • चुनावों में विधायक उम्मीदवार तय खर्च सीमा के भीतर प्रचार करते हैं।
  • रैलियों, प्रचार सामग्री और डिजिटल अभियानों पर बड़ा खर्च होता है।
  • टिकट पाना, जमीनी मेहनत और वोटरों का भरोसा जीतना ज़रूरी है।
  • उम्मीदवार की उम्र 25 साल, ₹10,000/₹5,000 जमा राशि आवश्यक।

MLA Election Cost: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के चुनावों के नतीजे 4 मई को आ रहे हैं और वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है. इसी बीच लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि असल में विधायक का चुनाव लड़ने में कितना खर्च आता है? आइए जानते हैं कि MLA का चुनाव लड़ना आर्थिक और राजनीतिक रूप से कितना मुश्किल है. 

इलेक्शन कमिशन द्वारा तय की गईं खर्च की सीमाएं 

चुनाव आयोग ने एक सीमा तय की है कि कोई उम्मीदवार चुनाव प्रचार के दौरान आधिकारिक तौर पर कितना खर्च कर सकता है. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार जैसे बड़े राज्यों में यह सीमा लगभग ₹40 लाख है. इसी के साथ गोवा या फिर सिक्किम जैसे छोटे राज्यों में यह ₹28 लाख तक सीमित है.  इस सीमा का मकसद निष्पक्ष मुकाबले को पक्का करना है और पैसे की ताकत के गलत इस्तेमाल को रोकना है. 

कहां होता है यह पैसा खर्च? 

खर्च का एक बड़ा हिस्सा रैलियों और जनसभाएं आयोजित करने पर खर्च होता है. इसमें टेंट, साउंड सिस्टम, स्टेज बनाना और भीड़ को संभालने का खर्च शामिल है. पोस्टर, बैनर, झंडे और पर्चे जैसी प्रचार सामग्री पर भी काफी ज्यादा पैसा खर्च होता है. इसके अलावा वॉलिंटियर्स को संभालने और उनके आने-जाने से लेकर खाने और ईंधन का खर्च उठाने से भी कुल खर्च में बढ़ोतरी होती है. बीते कुछ सालों में डिजिटल प्रचार, सोशल मीडिया पर प्रचार और पीआर एजेंसियों को काम पर रखने से चुनाव का बजट और भी बढ़ चुका है.

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सबसे पहली रुकावट 

चुनाव की दौड़ में उतरने से पहले उम्मीदवारों को किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी से टिकट पाने की चुनौती का सामना करना पड़ता है. इसके लिए सालों की जमीनी मेहनत, पार्टी के अंदर मजबूत जान पहचान और लोगों के बीच अपनी पकड़ साबित करने की जरूरत होती है. 

वोटरों का भरोसा जीतना 

सिर्फ पैसे से चुनाव नहीं जीता जा सकता. उम्मीदवारों को स्थानीय मुद्दों को उठाकर, लोगों के बीच अपनी मौजूदगी बनाए रखकर और समुदायों से जुड़कर वोटरों का भरोसा जीतना होता है. यह प्रक्रिया अक्सर असली चुनाव से कई साल पहले ही शुरू हो जाती है.

बुनियादी योग्यता और कानूनी जरूरतें

MLA का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 25 साल होनी चाहिए. उन्हें एक सिक्योरिटी राशि भी जमा करनी होती है. सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए ₹10000 और एससी/एसटी उम्मीदवारों के लिए ₹5000. इसके अलावा उम्मीदवारों को एक हलफनामा भी दाखिल करना होता है.  इसमें वे अपनी संपत्ति, देनदारी और किसी भी आपराधिक मामले की जानकारी देते हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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