कभी ड्रम बजाते-बजाते ड्रमस्टिक्स तोड़ देती थी यह महिला, अब बन गई हैं इस देश की प्रधानमंत्री
Japan First Woman PM: कभी हेवी मेटल ड्रम बजाने वाली युवती ने आज जापान की राजनीति की बत्ती जलाई है. कहा जाता है कि वो इतनी तेजी से ड्रम बजाती थीं कि ड्रमस्टिक्स टूट जाती थीं.

जापान में मंगलवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब देश ने पहली बार किसी महिला को प्रधानमंत्री पद की कुर्सी सौंपी. संसद के निचले सदन ने 64 वर्षीय साने ताकाइची को देश की नई प्रधानमंत्री के रूप में चुन लिया. यह फैसला न केवल जापान की राजनीति में बल्कि एशियाई राजनीति के इतिहास में भी एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है. साने ताकाइची, जो अपने कड़े रूढ़िवादी विचारों और चीन पर सख्त रुख के लिए जानी जाती हैं.
साने तकाइची कभी हैवी मेटल ड्रम बजाती थीं. इनके ड्रम बजाने को लेकर कई किस्से मशहूर हैं. आइए जापान की नई प्रधानमंत्री के बारे में कुछ और जान लेते हैं.
कभी हैवी मेटल ड्रमर थीं ताकइची
एनारा प्रान्त में जन्मीं ताकाइची बचपन से ही अपने दृढ़ व्यक्तित्व के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने कोबे यूनिवर्सिटी से स्नातक किया और छात्र-जीवन में संगीत में उनकी बहुत रुचि थी. उन्होंने कॉलेज में हेवी मेटल ड्रम बजाए थे और उनके बारे में कहा जाता है कि वे इतने जोश से ड्रम बजाती थीं कि अक्सर स्टिक्स टूट जाया करती थीं. राजनीति में आने से पहले उन्होंने टीवी होस्ट के तौर पर भी काम किया था.
राजनीति में उन्होंने 1993 में पहली बार सांसद के रूप में कदम रखा और अब वह सबसे बड़ी पार्टी Liberal Democratic Party (LDP) की अध्यक्ष बनकर प्रधानमंत्री पद के कगार तक आ गईं.
कट्टर और रूढ़िवादी मानी जाती है उनकी राजनीति
उनकी राजनीति कट्टर और रूढ़िवादी मानी जाती है. वह पुरुष-केवल सम्राट उत्तराधिकार की पक्षधर हैं, समलिंगी विवाह का समर्थन नहीं करतीं और विवाहित जोड़ों के अलग अलग उपनाम रखने की व्यवस्था को भी बदलने का पक्ष नहीं लेतीं हैं. इन रूढ़ियों के बीच भी उनकी प्रधानमंत्री पद पर नियुक्ति एक जनसांख्यिकीय बदलाव है. जापान में लंबे समय से महिला नेतृत्व को अवसर नहीं मिला था, लेकिन अब सीधे एक महिला का प्रधानमंत्री बनना अपने आप में बड़ी बात है.
कितनी मुश्किल है आगे की राह
हालांकि उनकी जीत पर उत्सव के बीच यह सवाल भी खड़ा है कि क्या ये परिवर्तन वाकई महिलाओं के लिए बड़ी राहें खोलेंगे या सिर्फ प्रतीकात्मक होंगे. देश राजनीति में सिर्फ महिला प्रधानमंत्री बनने की कमी को पूरा तो कर रहा है, लेकिन उनकी नीतियां अब भी पारंपरिक खाका में डटी हैं. उन्हें तुरंत कई चुनौतियों का सामना करना होगा जैसे, आर्थिक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना, बूढ़ी होती आबादी के बीच कामगारों की कमी, चीन-उत्तर कोरिया संबंधों में तनाव, और एक अस्थिर गठबंधन सरकार.
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Source: IOCL


























