विहस्की या बीयर से तीखा क्यों होता है रम का स्वाद, कितनी अलग इसकी मेकिंग?
व्हिस्की और बीयर के मुकाबले क्यों इतना अलग होता है रम का तीखा स्वाद, जानिए इसके पीछे छिपा इसे बनाने का पूरा साइंस और वह खास इंग्रीडिएंट जो इसे बनाता है बेहद कड़क.

वाइन, बीयर, व्हिस्की या वोदका की तरह रम भी दुनियाभर में बेहद लोकप्रिय है. खासकर, सर्दियों के मौसम में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है. बहुत से लोग महसूस करते हैं कि व्हिस्की या बीयर के मुकाबले रम का स्वाद गले में थोड़ा अधिक तीखा, कड़क और तेज गर्माहट देने वाला होता है. अक्सर लोग सोचते हैं कि ऐसा सिर्फ अल्कोहल की मात्रा के कारण होता है, लेकिन असल खेल इसे बनाने के तरीके और इसकी बुनियादी सामग्री का है.
कृषि और खाद्य विज्ञान के विशेषज्ञों के मुताबिक, रम का यह अनोखा तीखापन और कड़क स्वाद इसके खास फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन की प्रक्रिया से तय होता है. आइए जानते हैं कि रम बनाने का तरीका बीयर या व्हिस्की से कितना अलग है और यह स्वाद में इतनी तीखी क्यों होती है.
गन्ने का शीरा है रम के तीखे स्वाद का मुख्य आधार
रम, व्हिस्की और बीयर में सबसे बड़ा और बुनियादी अंतर इनकी कच्ची सामग्री का होता है. जहां बीयर और व्हिस्की को बनाने के लिए जौ, गेहूं, मक्का या राई जैसे अनाजों का इस्तेमाल किया जाता है, वहीं रम को पूरी तरह से गन्ने के रस या गन्ने के शीरे से तैयार किया जाता है. गन्ने के शीरे में प्राकृतिक रूप से भारी मात्रा में गाढ़ी चीनी होती है. जब इस शीरे का फर्मेंटेशन किया जाता है, तो इसमें कॉन्जेनर्स और फ्यूजल ऑयल जैसे रासायनिक तत्व मौजूद रहते हैं, जो इसके स्वाद को बेहद कड़क, तीखा और भारी बना देते हैं. अनाजों से बनी व्हिस्की का स्वाद इसकी तुलना में काफी ड्राई और हल्का होता है.
डिस्टिलेशन की प्रक्रिया में छिपा है तीखेपन का राज
बीयर एक बिना डिस्टिल्ड ड्रिंक है, जिसमें अल्कोहल का स्तर मात्र 4 से 8 फीसदी होता है, इसलिए वह बहुत हल्की लगती है. इसके विपरीत, व्हिस्की और रम को डिस्टिल्ड यानी उबालकर भाप से अल्कोहल अलग करना, करके बनाया जाता है. व्हिस्की को अक्सर ट्रेडिशनल पॉट स्टिल्स में दो से तीन बार डिस्टिल्ड किया जाता है, जिससे उसका स्वाद संतुलित रहता है. लेकिन रम को बनाने के लिए डिस्टिलर कई तरह के कस्टमाइज्ड स्टिल्स का प्रयोग करते हैं.
कुछ खास किस्म की रम, जिन्हें औवरप्रूफ रम कहा जाता है, उन्हें सिर्फ इस तरह प्रोसेस किया जाता है कि उनमें अल्कोहल की मात्रा 60 से 70 फीसदी तक पहुंच जाती है. जब इतने ऊंचे अल्कोहल और गन्ने के भारी तत्वों वाली ड्रिंक गले से नीचे उतरती है, तो वह बहुत तेज जलन और तीखा अहसास पैदा करती है.
कितनी अलग है रम की तैयारी
रम की मेकिंग व्हिस्की से बिल्कुल अलग होती है. इसमें चीनी मिलों से निकलने वाले गन्ने के गाढ़े शीरे में पानी और यीस्ट मिलाकर सीधे फर्मेंटेशन के लिए छोड़ दिया जाता है. रम का फर्मेंटेशन काफी लंबा और आक्रामक होता है, जिससे इसमें केले, कैरेमल और फलों जैसी तेज खुशबू वाले एस्टर बनते हैं. डिस्टिलेशन के बाद जो साफ लिक्विड मिलता है, उसे वाइट रम कहते हैं. इसके बाद इसे ओक के लकड़ी के बैरलों में वर्षों तक मैच्योर होने के लिए रखा जाता है.
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शरीर में तुरंत गर्मी का अहसास कराती है रम
अपने इसी भारीपन और कड़क मेकिंग प्रोसेस के कारण जब रम को कोल्ड ड्रिंक या गर्म पानी के साथ मिलाया जाता है, तो इसके हैवी तत्व शरीर में बहुत तेजी से अवशोषित होते हैं. व्हिस्की को लोग अक्सर बहुत धीरे-धीरे और सिप लेकर पीते हैं, जिससे उसका असर धीमा होता है. इसके विपरीत, रम का भारी और मीठा बेस होने के कारण यह शरीर में जाते ही ब्लड सर्कुलेशन को तेज कर देती है, जिससे सीने और चेहरे पर तुरंत तेज गर्मी और तीखेपन का अहसास होने लगता है.
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