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क्या है हवा और पानी का अधिकार, पड़ोसी पर इस कानून के तहत केस कर सकते हैं आप 

संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत, व्यक्तिगत स्वतंत्रता व जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है. इसमें देश में रहने वाले हर नागरिक को स्वच्छ हवा और साफ पेयजल का अधिकार भी शामिल है.

भारत में कालोनी में रहने वाले लोगों के बीच झगड़ा बहुत आम बात है, लेकिन कभी आपने गौर किया है कि यह झगड़ा क्यों होता है? ऐसे 100 मामले देखेंगे तो 90% झगड़े की जड़ हवा और पानी ही होंगे. यानी, दो पड़ोसियों के बीच झगड़े का सबसे बड़ा कारण हवा और पानी है. कालोनी में रहने वाले लोगों की अक्सर शिकायत रहती है कि फलां व्यक्ति ने उनकी नाली बंद कर दी तो फलां ने उनकी बालकनी के सामने दीवार खड़ी कर दी, जिससे न तो सूरज की रोशनी आती है और न ही हवा. 

इन मामलों को लेकर कालोनियों में अक्सर झगड़ा होता है और बात हाथापाई पर भी आ जाती है. कई बार तो मामला पुलिस के दखल से सुलझता है. क्या आपको पता है कि भारत में रहने वाले हर नागरिक को जिस तरह अन्य अधिकार प्राप्त हैं, उसी तरह हवा और पानी का भी अधिकार है. 

क्या है हवा और पानी का अधिकार

भारत में रहने वाले हर नागरिक को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत, व्यक्तिगत स्वतंत्रता व जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है. इसमें देश में रहने वाले हर नागरिक को स्वच्छ हवा और साफ पेयजल का अधिकार भी शामिल है. भारत का संविधान कहता है कि देश के हर नागरिक को अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार है और उसके लिए साफ हवा और पेयजल उपलब्ध कराना सरकार का कर्तव्य है और कोई भी इन अधिकारों का हनन नहीं कर सकता, फिर चाहें वह सरकार ही क्यों न हो. 

कहां कर सकते हैं शिकायत

भारत के संविधान, देश में हर नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी देता है. ऐसे में अगर आपका पड़ोसी भी हवा और पानी के अधिकार में रुकावट बनता है तो आप पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. वहीं, कोर्ट में भी इस मामले को ले जाया जा सकता है, जहां संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देकर मुकदमा दायर किया जा सकता है. 

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प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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