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Rashtrapati Bhavan: सिर्फ एक लकीर से दो हिस्सों बंटा हुआ है भारत का राष्ट्रपति भवन, क्या आपको पता है यह बात?

राष्ट्रपति भवन बाहर से जितना भव्य और सुंदर दिखता है, अंदर से भी उतना ही भव्य है. क्या आप जानते हैं कि राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल से एक सीधी रेखा इंडिया गेट के बीचो बीच तक जाती है.

राजधानी दिल्ली में स्थित राष्ट्रपति भवन हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है. राष्ट्रपति भवन जितना बाहर से देखने में भव्य और सुंदर लगता है, उतना ही अंदर से भी सुंदर है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि राष्ट्रपति भवन से एक सीधी रेखा इंडिया गेट तक आता है. जी हां, आज हम आपको राष्ट्रपित भवन के उस रेखा के बारे में बताने वाले हैं. 

राष्ट्रपति भवन

बता दें कि आज का राष्ट्रपति भवन पहले ब्रिटिश वायसराय का सरकारी आवास था. इसका निर्माण उस वक्त किया गया था, जब साल 1911 में तय हुआ था कि भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट किया जाएगा. हालांकि इस भवन के निर्माण में 17 साल लग गया था.

राष्ट्रपति भवन में हैं 340 कमरे

26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ था. जिसके बाद से ही राष्ट्रपति भवन भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास बन गया था. राष्ट्रपति भवन चार मंजिला है और इसमें 340 कमरे हैं. जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति भवन बनाने के लिए लगभग 45 लाख ईंटें लगाई गई थीं. राष्ट्रपति भवन में इमारत के अलावा मुगल गार्डन और कर्मचारियों का भी आवास है. राष्ट्रपति भवन का निर्माण वास्तुकार एडविन लैंडसीयर लुट्येन्स ने किया था.

दरबार हॉल?

दरबार हॉल की खासियत ये है कि यहां से एक लकीर सीधे खींचकर इंडिया गेट तक जा सकते हैं. बता दें कि अंग्रजों के शासन में दरबार हॉल को सिंहासन कक्ष कहा जाता था. इसमें दो सिंहासन वायसराय और वायसरीन के लिए होते थे. हालांकि अब इसमें सिर्फ एक साधारण कुर्सी होती है, जो राष्ट्रपति के लिए होती है. इस हॉल की खासियत यह है कि अगर राष्ट्रपति की कुर्सी से एक लकीर खींची जाए, तो वह सीधी पहले का राजपथ और आज कर्तव्य पठ होते हुए दूसरे छोर पर स्थिति इंडिया गेट के बीचोबीच जाकर मिलती है. इस हॉल का इस्तेमाल राजकीय समारोह, पुरस्कार वितरण के लिए किया जाता है.

सेंट्रल डोम 

राष्ट्रपति भवन की सबसे बड़ी पहचान सेंट्रल डोम है. ये ऐतिहासिक सांची स्तूप की याद दिलाता है. ये गुंबद फोर कोर्ट के 55 फुट ऊपर भवन के मुकुट की तरह विराजमान है.

अशोक हॉल में लगे कार्पेट

अशोक हॉल में हर तरह के बड़े समारोह किए जाते हैं. इसकी छत पर देश ही नहीं दूसरे देशों के सम्राटों के तौर-तरीकों की झलक दिखती है. छत पर ईरान साम्राज्य के सम्राट फतेह अली शाह की विशाल चित्रकारी अशोक हॉल की छत का केंद्र है, जिनके इर्द-गिर्द 22 राजकुमार शिकार करते नजर आ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक लेड विलिंगटन ने निजीतौर पर इटली के मशहूर चित्रकार Tomasso Colonnello को चित्रकारी का जिम्मा दिया था. अशोका हॉल में लगे कार्पेट 500 कारीगरों की दो साल की मेहनत के बाद तैयार किया था. 

ये भी पढ़ें: राज्यसभा में कुल कितनी सीटें होती हैं, राज्यों के हिसाब से कैसे तय होती है इनकी संख्या?

गिरिजांश गोपालन को मीडिया इंडस्ट्री में चार साल से ज्यादा का अनुभव है. फिलहाल वह डिजिटल में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास प्रिंट मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद गिरिजांश ने नवभारत टाइम्स अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें घूमना बेहद पसंद है. पहाड़ों पर चढ़ना, कैंपिंग-हाइकिंग करना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना उनकी हॉबी में शुमार है। यही कारण है कि वह तीन साल से पहाड़ों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं. अपने अनुभव और दुनियाभर की खूबसूरत जगहों को अपने लेखन-फोटो के जरिए सोशल मीडिया के रास्ते लोगों तक पहुंचाते हैं.
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