राज्यसभा में बीजेपी-कांग्रेस के बाद सबसे बड़ी पार्टी कौन, टूटने के बाद किस नंबर पर खिसक गई आम आदमी पार्टी?
राघव चड्ढा के नेतृत्व में 7 सांसदों के भाजपा में शामिल होने से आप की राज्यसभा में सीटें 10 से घटकर 3 रह गई हैं. इस दलबदल से आप टॉप-10 पार्टियों की सूची से बाहर हो गई है, जबकि भाजपा की संख्या बढ़ गई है.

- आप की नई स्थिति कई छोटे क्षेत्रीय दलों जैसी हो गई.
राज्यसभा के गलियारे अक्सर बड़े राजनीतिक बदलावों के गवाह बनते हैं, लेकिन आज जो उलटफेर हुआ है, उसने पूरे देश की निगाहें दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी पर टिका दी हैं. कभी राज्यसभा की चौथी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी आम आदमी पार्टी (AAP) आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहां से उसकी संसदीय चमक फीकी पड़ती दिख रही है. राघव चड्ढा के नेतृत्व में हुई यह बगावत केवल चेहरों का बदलाव नहीं, बल्कि राज्यसभा के अंकगणित का वह ताना-बाना है, जिसने केजरीवाल के सपनों के महल में बड़ी सेंध लगा दी है.
बदलता हुआ राज्यसभा का गणित
राज्यसभा में सीटों का यह खेल सत्ता के संतुलन को प्रभावित करने वाला है. पहले आम आदमी पार्टी भाजपा, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बाद चौथी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत थी, लेकिन अब यह स्थान पूरी तरह बदल चुका है. सात सांसदों के पाला बदलने से भाजपा की संख्या में सीधा इजाफा हुआ है. पार्टी के इस बिखराव का असर न केवल आप के एजेंडे पर पड़ेगा, बल्कि संसद के ऊपरी सदन में विपक्ष की आवाज को भी कमजोर करेगा. 10 से घटकर 3 सांसदों पर आना एक ऐसी सियासी हकीकत है, जिसे अरविंद केजरीवाल के लिए पचा पाना बेहद कठिन होगा.
पार्टी वार राज्यसभा सीटों का नया परिदृश्य
इस बड़े दलबदल के बाद राज्यसभा की नई तस्वीर कुछ इस प्रकार है:
भारतीय जनता पार्टी (BJP): 113 सीटें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC): 29 सीटें
तृणमूल कांग्रेस (TMC): 13 सीटें
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK): 08 सीटें
वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP): 07 सीटें
अन्नाद्रमुक (AIADMK): 05 सीटें
जनता दल यूनाइटेड (JDU): 04 सीटें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP): 04 सीटें
समाजवादी पार्टी (SP): 04 सीटें
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC): 03 सीटें
आम आदमी पार्टी (AAP): 03 सीटें
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भाजपा की बढ़ती ताकत का प्रभाव
सांसदों के इस विलय के बाद भाजपा की संख्या 106 से बढ़कर अब 113 हो गई है, जिसने राज्यसभा में उसकी स्थिति को और भी अधिक मजबूत कर दिया है. यह संख्या न केवल सरकारी कामकाज को सुचारू बनाने में मदद करेगी, बल्कि किसी भी महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को पारित करवाने में भाजपा को पहले से कहीं अधिक प्रभावी बनाएगी. दूसरी ओर, आप के लिए यह किसी बड़े हादसे से कम नहीं है. जो पार्टी कल तक निर्णायक भूमिका निभाने का सपना देख रही थी, आज वह अपनी सीटों के लिए संघर्ष करती दिख रही है.
क्या आप का अस्तित्व खतरे में है?
राज्यसभा में टॉप-10 की सूची से बाहर होना केवल सांख्यिकीय नुकसान नहीं है, बल्कि यह पार्टी के राष्ट्रीय प्रभाव में आई भारी गिरावट का संकेत है. जिन सात सांसदों ने राघव चड्ढा के साथ भाजपा में शामिल होने का फैसला किया, उनमें हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता जैसे बड़े नाम शामिल हैं. अब आम आदमी पार्टी के पास केवल तीन सांसद बचे हैं, जो इसे लोकसभा के कई छोटे क्षेत्रीय दलों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देता है. यह स्थिति केजरीवाल सरकार के लिए दिल्ली और अन्य राज्यों में भी बड़ा सिरदर्द बन सकती है.
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