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G7 Countries: G7 देशों का दुनिया की इकोनॉमी पर कितना कंट्रोल, जानें किसके पास कितना पैसा?

G7 Countries: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त G7 शिखर सम्मेलन के लिए फ्रांस गए हुए हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि G7 देशों के पास कितनी संपत्ति है.

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  • प्रधानमंत्री मोदी G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने फ्रांस पहुंचे।
  • G7 देश वैश्विक जीडीपी का लगभग 44% हिस्सा हैं।
  • ये देश वैश्विक आबादी का मात्र दस प्रतिशत हैं।
  • फिर भी, G7 का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक प्रभाव है।

G7 Countries: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति के निमंत्रण पर 16-17 जून को होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस पहुंच गए हैं. जब दुनिया भर के नेता बड़ी आर्थिक और भू राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं तो एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर G7 देशों के भारी प्रभाव पर ध्यान गया है. दुनिया की आबादी का एक छोटा हिस्सा होने के बावजूद ये देश वैश्विक वित्त, व्यापार और नीति निर्माण पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं. आइए जानते हैं कि G7 के पास कितने आर्थिक शक्ति है और हर सदस्य देश के पास कितनी संपत्ति है. 

G7 क्या है? 

G7 या फिर ग्रुप ऑफ सेवन दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का एक अनौपचारिक समूह है. इसके सदस्यों में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, ‌ जापान और कनाडा शामिल हैं.

वैश्विक अर्थव्यवस्था में G7 की हिस्सेदारी 

अप्रैल 2026 के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों के मुताबिक दुनिया की कुल नॉमिनल जीडीपी लगभग 126.3 ट्रिलियन डॉलर है.  G7 देश की संयुक्त नॉमिनल जीडीपी लगभग 55.32 ट्रिलियन डॉलर है. इससे यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग 44% हिस्सा बन जाता है. जब परचेजिंग पावर पैरिटी का इस्तेमाल करके मापा जाता है तो समूह की हिस्सेदारी लगभग 28% होती है. 

कम आबादी के बावजूद दबदबा 

G7 की सबसे खास बातों में से एक इसकी आबादी की हिस्सेदारी और इसके आर्थिक प्रभाव के बीच का अंतर है. सात सदस्य देश मिलकर दुनिया की आबादी का सिर्फ 10% हिस्सा हैं. इसके बावजूद भी वे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, वित्तीय संस्थानों, निवेश प्रवाह और आर्थिक नीति निर्माण पर भारी प्रभाव डालते हैं. 

G7 का प्रभाव कैसे बदला है?

पिछले दशकों में G7 का दबदबा और भी ज्यादा था. 1980 के दशक में वैश्विक जीडीपी में इस समूह की हिस्सेदारी 60% से ज्यादा थी. हालांकि भारत और चीन जैसे देशों के तेजी से आर्थिक विकास ने वैश्विक उत्पादन में G7 की हिस्सेदारी को धीरे-धीरे कम कर दिया. 

अलग-अलग G7 सदस्यों की आर्थिक ताकत 

अमेरिका G7 में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. इसकी जीडीपी लगभग 32.38 ट्रिलियन डॉलर है. इसके बाद जर्मनी आता है. जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इसकी जीडीपी 4.8 ट्रिलियन डॉलर है. तीसरे नंबर पर जापान आता है. जापान G7 का एकमात्र एशियाई देश है और इसकी जीडीपी 4.4 ट्रिलियन डॉलर है. चौथे नंबर पर यूनाइटेड किंगडम आता है. इसकी जीडीपी 3.7 ट्रिलियन डॉलर है. इसके बाद फ्रांस आता है. फ्रांस यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इसकी जीडीपी 3.2 ट्रिलियन डॉलर है. इसके बाद इटली और कनाडा 2.4 ट्रिलियन डॉलर और 2.3 ट्रिलियन डॉलर के साथ छठे और सातवें नंबर पर हैं.

यह भी पढ़ेंः जब G-7 का हिस्सा नहीं है भारत तो PM Modi को क्यों भेजा गया इनवाइट, जानें इसमें कौन-कौन से देश?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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