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संसद से सस्पेंड हुए कांग्रेस के 8 सांसदों को क्या होगा नुकसान, नहीं मिलते कौन-से भत्ते?

Parliament Budget Session 2026: लोकसभा से सस्पेंड हुए सांसद सिर्फ सदन से बाहर नहीं होते, बल्कि उनकी संसदीय ताकत पर भी असर पड़ता है. आइए जानें कि इस दौरान उनके कौन से अधिकार छिन जाते हैं.

Parliament Budget Session: संसद का सदन आमतौर पर बहस, सवाल-जवाब और नीतियों की चर्चा के लिए जाना जाता है, लेकिन जब यही सदन हंगामे और अवमानना की वजह से ठप हो जाए, तो मामला सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रह जाता है. हाल ही में लोकसभा में ऐसा ही एक दृश्य देखने को मिला, जब कागज उछालने और सदन की आवमानना के आरोप में आठ कांग्रेस सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया. ऐसे में सवाल उठता है कि इस निलंबन का असली असर क्या होता है और सांसदों को इसकी कितनी भारी कीमत चुकानी पड़ती है.

लोकसभा में क्या हुआ, कैसे बढ़ा विवाद?

मंगलवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी. इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक पूर्व सेना प्रमुख के अप्रकाशित संस्मरण का जिक्र करना चाहते थे. इस मुद्दे पर आपत्ति के बाद सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित हुई. जब दोपहर तीन बजे सदन दोबारा बैठा, तब माहौल पहले से ज्यादा तनावपूर्ण था. आरोप है कि कुछ सांसदों ने आसन के सामने आकर कागज उछाले, जिसे सदन की गरिमा के खिलाफ माना गया.

किन सांसदों पर हुई कार्रवाई?

पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने कांग्रेस के सात सांसदों और माकपा के एक सांसद का नाम लिया. इनमें कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरदीप सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और मणिकम टैगोर शामिल हैं, जबकि माकपा से एस वेंकटेशन को निलंबित किया गया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने नियम 374(2) के तहत इन सभी को मौजूदा बजट सत्र की शेष अवधि के लिए सस्पेंड करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत से पास कर दिया.

निलंबन का मतलब क्या होता है?

संसद से निलंबन केवल प्रतीकात्मक सजा नहीं है. जैसे ही कोई सांसद सस्पेंड होता है, उसे तुरंत सदन से बाहर जाना पड़ता है. वह न सिर्फ लोकसभा कक्ष, बल्कि लॉबी और दर्शक दीर्घा में भी प्रवेश नहीं कर सकता. निलंबन की अवधि तक वह सांसद के तौर पर सदन के किसी भी कामकाज का हिस्सा नहीं बन पाता है.

सवाल पूछने और बहस में भाग लेने पर रोक

निलंबित सांसदों के नाम से कोई भी सवाल, प्रस्ताव, स्थगन प्रस्ताव या अन्य नोटिस सूचीबद्ध नहीं किए जाते. वे न तो किसी मुद्दे पर बोल सकते हैं और न ही सरकार से जवाब मांग सकते हैं. इसका सीधा असर उनके संसदीय प्रदर्शन और जनता के मुद्दे उठाने की क्षमता पर पड़ता है.

वोटिंग और समितियों से भी बाहर

सस्पेंड सांसद किसी भी वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकते हैं. चाहे कोई विधेयक हो या कोई अन्य फैसला, उनकी गिनती ही नहीं होती है. इसके अलावा वे जिन संसदीय समितियों के सदस्य होते हैं, वहां की बैठकों में भी शामिल नहीं हो सकते हैं. इससे नीति निर्माण और निगरानी की प्रक्रिया में उनकी भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाती है.

कौन-कौन से भत्ते नहीं मिलते हैं?

निलंबन का सबसे सीधा असर सांसदों के भत्तों पर पड़ता है. सस्पेंड रहने की अवधि में उन्हें दैनिक भत्ता नहीं मिलता, क्योंकि इस दौरान उनकी दिल्ली में मौजूदगी को ‘ड्यूटी पर निवास’ नहीं माना जाता है. इसके साथ ही, समिति बैठकों में शामिल न हो पाने की वजह से उससे जुड़ा भत्ता भी नहीं मिलता है. हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि उनका मासिक वेतन यानी बेसिक सैलरी पर इसका असर नहीं पड़ता है.

किस पर असर नहीं पड़ता?

निलंबन के बावजूद सांसद की मूल सैलरी जारी रहती है. इसके अलावा उनके कार्यकाल, भविष्य की पेंशन या अन्य दीर्घकालिक लाभों पर भी कोई असर नहीं होता है. यानी यह सजा अस्थायी होती है, लेकिन इसके दौरान मिलने वाली सुविधाएं काफी सीमित हो जाती हैं.

नियमों में क्या लिखा है?

लोकसभा के नियम 373, 374 और 374A के तहत अध्यक्ष को यह अधिकार है कि वह अव्यवस्था या अवमानना की स्थिति में सांसदों को सस्पेंड कर सके. आमतौर पर यह निलंबन पूरे सत्र या तय दिनों के लिए होता है. राज्यसभा में इसके लिए नियम 255 और 256 लागू होते हैं. इन नियमों का मकसद सदन की गरिमा बनाए रखना है.

यह भी पढ़ें: डोकलाम में उस दिन आखिर क्या हुआ था? जानिए वो विवाद जिसके जिक्र पर संसद में हुआ संग्राम

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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