इजरायल से हो गई यह गलती, वरना पाकिस्तान कभी नहीं बना पाता परमाणु बम
Pakistan Nuclear Test: इजराइल हमेशा से परमाणु प्रसार को लेकर सतर्क रहा है, खासतौर से मुस्लिम देशों को लेकर. इजराइल नहीं चाहता था कि पाकिस्तान परमाणु बम बनाए, लेकिन उसकी एक चूक से पाक ने ऐसा कर लिया.

पाकिस्तान ने हमेशा से भारत के लिए खतरा पैदा किया है. जब से भारत ने अपना पहला पोखरण परमाणु परीक्षण किया था, उसके बाद से पाकिस्तान के दिमाग में यह था कि वो कैसे और कितनी जल्दी अपने यहां भी परमाणु हथियार बना ले. साउथ एशिया के इतिहास में पाकिस्तान का परमाणु शक्ति बनना ऐसा एक मोड़ था, जिसने इतिहास की दिशा ही बदल दी थी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर इजरायल ने 1970 और 80 के दशक में सख्ती दिखाई होती, तो पाकिस्तान शायद कभी परमाणु बम नहीं बना पाता.
चर्चा यह भी रही है कि अगर भारत और इजराइल की मदद से उस वक्त पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए होते तो पाकिस्तान को परमाणु हथियार बनाने से रोका जा सकता था. लेकिन सवाल यह भी है कि आखिर इजराइल ने भारत के सामने पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी कौन सी मदद की पेशकश की थी. चलिए इसे समझें.
पाकिस्तान का परमाणु सफर
भारत ने 1974 में पोखरण में पहला परमाणु परीक्षण किया था. इसके बाद पाकिस्तान ने भी यह ठान लिया कि वह हर हाल में परमाणु बम बनाएगा. इसी मकसद से डॉ. अब्दुल कदीर खान ने यूरोप से गुपचुप परमाणु तकनीक और संवेदनशील उपकरण जुटाने का काम शुरू किया था. धीरे-धीरे पाकिस्तान के काहुटा परमाणु संयंत्र में यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया तेज हो गई.
इजरायल को क्या थी चिंता?
इजरायल लंबे समय से परमाणु प्रसार को लेकर सतर्क रहा है, खासकर मुस्लिम देशों की गतिविधियों को लेकर वह और ज्यादा सतर्क रहता है. इजराइल को डर था कि अगर पाकिस्तान ने परमाणु हथियार बना लिए तो यह न सिर्फ भारत बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट के लिए खतरा साबित हो सकता है. रिपोर्ट्स की मानें तो इजराइल की एजेंसी मोसाद को पाकिस्तान की गतिविधियों की जानकारी मिल चुकी थी और उसने अमेरिका को भी चेतावनी दी थी, लेकिन उस वक्त अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ अमेरिका को पाकिस्तान की जरूरत थी, इसलिए उसने इस चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया.
भारत को दिया था काहुटा पर हमले का ऑफर
एड्रियन लेवी और कैथरीन स्कॉट-क्लार्क की किताब ‘डिसेप्शन: पाकिस्तान, यूनाइटेड स्टेट्स एंड द ग्लोबल वेपन्स कॉन्स्पिरेसी’ में उल्लेख किया गया है कि 1980 के दशक में इजरायल ने पाकिस्तान के काहुटा परमाणु संयंत्र को खत्म करने के लिए भारत को संयुक्त हवाई हमले की पेशकश की थी. यही वह संयंत्र था जहां पाकिस्तान का पूरा परमाणु कार्यक्रम तैयार किया जा रहा था. इजरायल चाहता था कि भारत की जमीन से होकर यह मिशन पूरा किया जाए. लेकिन कहा जाता है कि भारत ने सीधे तौर पर इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था, जिसका नतीजा यह हुआ कि इजरायल की यह योजना केवल कागजों में सिमटकर रह गई थी.
पाकिस्तान को मिला समय
अब इसे इजरायल और अमेरिका की हिचकिचाहट कहें या चूक, लेकिन इसने पाकिस्तान को वह समय दिया, जिसकी उसे सबसे ज्यादा जरूरत थी. पाकिस्तान ने 1980 और 90 के दशक में अपने परमाणु कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया और आखिरकार 1998 में भारत के दूसरे परमाणु परीक्षण पोखरण-II के जवाब में चागई में परमाणु परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया.
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Source: IOCL























