Pakistan Afghanistan War: अफगानिस्तान के पास कौन से फाइटर जेट हैं, आसमान में हुई पाकिस्तान-तालिबान की जंग तो जीतेगा कौन?
Pakistan Afghanistan War: हाल ही में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई इलाकों पर हवाई हमले करने की पुष्टि की है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अफगानिस्तान के पास कौन से फाइटर जेट है.

Pakistan Afghanistan War: पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान के कई इलाकों को टारगेट करके मिलिट्री ऑपरेशन की पुष्टि की है. इसके बाद पाकिस्तान द्वारा तालिबान सरकार के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर दिया गया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अफगानिस्तान के पास कौन से फाइटर जेट हैं और अगर पाकिस्तान तालिबान की जंग आसमान में होती है तो कौन जीतेगा?
अफगानिस्तान के फाइटर जेट
दरअसल अफगानिस्तान के पास कोई भी मॉडर्न फाइटर जेट नहीं है. 2021 में तालिबान के देश पर कंट्रोल करने के बाद से उसकी एयर फोर्स काफी हद तक पिछली अफगान सरकार के बचे हुए इक्विपमेंट और पुराने सोवियत युग के सिस्टम पर ही निर्भर है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अफगानिस्तान के पास कुछ पुराने एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर हैं. एयर टू एयर कॉम्बैट या एडवांस्ड स्ट्राइक कमीशन में सक्षम कोई ऑपरेशनल फाइटर जेट नहीं होने की वजह से अफगानिस्तान थोड़ा कमजोर पड़ता है.
लिमिटेड हेलीकॉप्टर और पुराने एयरक्राफ्ट
अफगानिस्तान के अभी के एयर फ्लीट में ज्यादातर सोवियत डिजाइन वाले Mi-17 जैसे हेलीकॉप्टर और कुछ यूनाइटेड स्टेटस के Black Hawk हेलीकॉप्टर शामिल हैं. ये अमेरिका के वापस जाने के दौरान पीछे छूट गए थे. इन एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल ज्यादातर कॉम्बैट मिशन के बजाय ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स के लिए किया जाता है. इसके अलावा, स्पेयर पार्ट्स, ट्रेंड टेक्नीशियन और इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से इन हेलीकॉप्टरों को मेंटेन करना काफी मुश्किल हो गया है. यही वजह है कि ऐसा कहा जाता है कि इनमें से कुछ ही एयरक्राफ्ट पूरी तरह से ऑपरेशनल हैं.
पाकिस्तान की एयर फोर्स की ताकत
पाकिस्तान एयर फोर्स इस इलाके की सबसे मजबूत एयरफोर्स में से एक है. पाकिस्तान के पास लगभग 465 फाइटर एयरक्राफ्ट हैं. इनमें F-16 फाइटिंग फाल्कन और JF-17 थंडर जैसे एडवांस्ड जेट शामिल हैं. यह एयरक्राफ्ट सुपरसोनिक फ्लाइट, प्रिसीजन बॉम्बिंग और एडवांस्ड एयर कॉम्बैट मिशन में कैपेबल हैं. इतना ही नहीं बल्कि पाकिस्तान मॉडर्न रडार सिस्टम, सर्विलांस नेटवर्क और मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी ऑपरेट करता है.
अफगानिस्तान में एयर डिफेंस सिस्टम की कमी
अफगानिस्तान के लिए एक और बड़ी मुश्किल मॉडर्न एयर डिफेंस सिस्टम की कमी है. एडवांस्ड रडार और मिसाइल डिफेंस क्षमताओं के बिना आने वाले एयरक्राफ्ट का पता लगाना और उन्हें रोकना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है. इससे अफगानिस्तान एयरस्ट्राइक के लिए कमजोर हो जाता है.
गुरिल्ला लड़ाई में माहिर तालिबान
अफगानिस्तान की एयर पावर काफी सीमित है लेकिन तालिबान ने ऐतिहासिक रूप से गुरिल्ला लड़ाई की टैक्टिक्स पर ज्यादा भरोसा किया है. इनमें पहाड़ी इलाके, छोटे ड्रोन और पोर्टेबल रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल करना शामिल है. ऐसी टैक्टिक्स जमीनी लड़ाई में असरदार होती हैं लेकिन हवाई लड़ाई में फाइटर जेट की कमी की भरपाई नहीं हो सकती.
हवाई युद्ध में किसका पलड़ा भारी?
किसी भी सीधी हवाई लड़ाई में पाकिस्तान का पलड़ा भारी ही रहेगा. पाकिस्तान को अपने मॉडर्न एयरक्राफ्ट, ट्रेंड पायलट, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम की वजह से काफी ज्यादा बढ़त मिलेगी. अफगानिस्तान में फाइटर जेट की कमी और सीमित एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से उसे हवाई लड़ाई में मुकाबला करने में नाकामी हासिल होगी.
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Source: IOCL



























