अजीत डोभाल की वो चाल और 15 साल पीछे चला गया पाकिस्तान, जानें जासूसी के मास्टरस्ट्रोक की कहानी
Ajit Doval Secret Mission In Pakistan: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को जेम्स बॉन्ड कहते हैं. उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ ऐसे-ऐसे मिशन को अंजाम दिया है, जिससे पड़ोसी मुल्क कांपता है.

उस वक्त रात का अंधेरा इस्लामाबाद की गलियों में छाया हुआ था. तभी धूल भरे रास्तों पर एक फटे हुए शॉल में लिपटा आदमी धीरे-धीरे चलता हुआ लोगों की निगाहों से बचता रहा. वह इसी सोच में था कि उस पर किसी को शक न हो जाए कि यह भिखारी दिखने वाला इंसान कोई आम शख्स नहीं, बल्कि भारत का सबसे खतरनाक मिशन निभा रहा है. उनका नाम था अजीत डोभाल, जिनका मकसद था पाकिस्तान के परमाणु रहस्यों की परतें खोलना. उस वक्त एक गलत कदम से खेल खत्म हो सकता था, लेकिन डोभाल खेल के असली उस्ताद थे, जिनकी उस एक खुफिया जानकारी ने पाकिस्तान को 15 साल पीछे कर दिया.
भारत को पाक के खिलाफ चाहिए था सबूत
1974 में भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था. इसके बाद पाकिस्तान ने हर हाल में परमाणु हथियार बनाने की ठान ली. उसे चीन जैसे देशों का समर्थन भी मिला था. भारत को इस बात का साफ अंदेशा था कि पाकिस्तान गुप्त रूप से परमाणु हथियार तैयार कर रहा है, लेकिन इसके लिए ठोस सबूत चाहिए थे. तब यह जिम्मेदारी अजीत डोभाल को सौंपी गई, जिन्हें उनकी बहादुरी और दिमागी चालों के कारण ही ‘जेम्स बॉन्ड’ और ‘सुपर कॉप’ कहा जाता है.
काहुटा में परमाणु हथियार बना रहा था पाक
इस्लामाबाद के पास काहुटा इलाका पाकिस्तान की सबसे सुरक्षित और गुप्त जगहों में से एक था. यहां पर खान रिसर्च लेबोरेटरी मौजूद थी, जहां पर वैज्ञानिक, सुरक्षा एजेंसियां और सरकारी अधिकारी चौकसी के बीच दिन-रात काम करते थे. किसी भी बाहरी शख्स का वहां पहुंच पाना नामुमकिन था. लेकिन फिर भी अजीत डोभाल ने इस असंभव काम अपने हाथ में लिया.
सालों भिखारी के वेश में पाकिस्तान में रहे डोभाल
तब अजीत डोभाल पाकिस्तान पहुंचे और महीनों तक इस्लामाबाद में रहे, जिससे कि वहां के किसी भी शख्स को उन पर कोई शक न हो. वे इस्लामाबाद की गलियों में ऐसे घुल-मिल गए जैसे कि वे वहीं के हों. वे सालों तक भिखारी के रूप में इस्लामाबाद में रहे. अजीत डोभाल ने घूमते हुए वहां स्थानीय लोगों से बातचीत की, वहां की गतिविधियों को ध्यान से देखा और हर जरूरी जानकारी याद की. धीरे-धीरे वे काहुटा रिसर्च सेंटर से जुड़े लोगों की दिनचर्या तक पहुंच गए.
अजीत डोभाल का मास्टरस्ट्रोक
वे काफी दिनों तक खान रिसर्च लेबोरेटरी के बाहर भी भिखारी के रूप में बैठते थे और वहां आने-जाने वाले वैज्ञानिकों पर नजर रखते थे. अपनी पढ़ाई-लिखाई और ज्ञान के जरिए उनको यह समझ में आया कि ये वैज्ञानिक आसपास की नाई की दुकान पर बाल कटवाने तो जरूर जाते होंगे और अगर पाकिस्तान परमाणु बम बना रहा है तो उसकी रेडिएशन इनके शरीर में जरूर होगी. तब वे एक छोटे से नाई की दुकान तक पहुंचे. यही वह जगह थी जहां खान रिसर्च लेबोरेटरी के वैज्ञानिक बाल कटाने आते थे.
बालों ने उजागर किया पाक का मिशन
दुकान पर आम लोग जहां गिरे हुए बालों को बेकार समझते, अजीत डोभाल ने उनमें मौका देखा. उन्होंने सावधानी से वैज्ञानिकों के उन बालों को इकट्ठा किया और भारत भेज दिया. जब लैब में उन बालों की जांच हुई तो चौंकाने वाला सच सामने आया. उन बालों में यूरेनियम और रेडिएशन के अंश मौजूद थे. यही वह सबूत था जिसकी भारत को तलाश थी. तब यह साफ हो गया कि पाकिस्तान गुप्त रूप से परमाणु हथियार बना रहा है.
15 साल पीछे हो गया पाकिस्तान
डोभाल का यह मिशन बेहद खतरनाक था. वे लगातार छह साल तक पाकिस्तान में रहे. इस दौरान अगर उनकी असली पहचान उजागर हो जाती, तो न सिर्फ उनकी जान खतरे में पड़ती बल्कि भारत की सुरक्षा भी संकट में आ जाती. लेकिन उन्होंने यह मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया. विशेषज्ञ मानते हैं कि उनकी जासूसी ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को लगभग 15 साल पीछे कर दिया था.
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Source: IOCL






















