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Noida Protest Violence: अमेरिका में फैक्ट्री वर्कर्स को कितनी मिलती है न्यूनतम मजदूरी, नोएडा में बवाल के बीच जानें जवाब

Noida Protest: नोएडा में श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के बाद योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी की दरों में अंतरिम बढ़ोतरी कर दी है. आइए जान लेते हैं कि अमेरिका में मजदूरों की सैलरी कितनी है.

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  • अमेरिका की तुलना में भारतीय मजदूरों की आय कम.

Noida Protest Violence: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक हब नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए उग्र बवाल ने सरकार को रातों-रात बड़ा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया. आगजनी और तोड़फोड़ के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई मजदूरी दरों को मंजूरी दे दी है. इस घटनाक्रम ने न केवल भारत में श्रमिकों की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विकसित देशों, खासकर अमेरिका में फैक्ट्री वर्कर को मिलने वाली मोटी सैलरी के साथ तुलनात्मक बहस को भी जन्म दे दिया है.

नोएडा में मजदूरी पर मचा संग्राम

13 अप्रैल 2026 को नोएडा और गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब हजारों श्रमिक वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए. देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया और प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया. फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और पथराव की घटनाओं के बाद पूरे दिल्ली-एनसीआर में हाई अलर्ट घोषित करना पड़ा. श्रमिकों का गुस्सा इस बात पर था कि बढ़ती महंगाई के बावजूद उनकी न्यूनतम मजदूरी में लंबे समय से कोई सम्मानजनक वृद्धि नहीं की गई थी.

योगी सरकार का बड़ा फैसला

हिंसा और अशांति को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल एक हाई पावर कमेटी का गठन किया. इस कमेटी की सिफारिशों पर सरकार ने सोमवार देर रात ही न्यूनतम मजदूरी में अंतरिम वृद्धि की घोषणा कर दी. ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी. 

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गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद की नई दरें

संशोधित दरों के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों का वेतन अब 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये प्रति माह कर दिया गया है. इसी तरह अर्धकुशल श्रमिकों को अब 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये प्रति माह मिलेंगे. सरकार ने स्पष्ट किया है कि अन्य नगर निगम क्षेत्रों और बाकी जिलों के लिए भी अलग-अलग स्लैब तय किए गए हैं, ताकि पूरे प्रदेश में वेतन विसंगतियों को दूर किया जा सके. अन्य जिलों में अकुशल मजदूरों को अब न्यूनतम 12,356 रुपये दिए जाएंगे.

अमेरिका में प्रति घंटा मजदूरों की कमाई 

नोएडा के इस बवाल के बीच जब अमेरिका में मजदूरी के आंकड़ों पर नजर डाली जाती है, तो वहां का तंत्र पूरी तरह अलग नजर आता है. अमेरिका में वेतन मासिक आधार पर नहीं, बल्कि प्रति घंटे के हिसाब से तय होता है. संघीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी 7.25 डॉलर प्रति घंटा है, जो साल 2009 से नहीं बदली है. हालांकि, कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे संपन्न राज्यों में यह दर 15 से 17 डॉलर प्रति घंटा या उससे भी अधिक है. वहां के नियम बेहद सख्त हैं और हर कामगार को कम से कम यह भुगतान करना अनिवार्य है.

अमेरिकी फैक्ट्री वर्कर्स की औसत आय

अमेरिका में फैक्ट्री में काम करने वाले अकुशल या अर्धकुशल मजदूरों की तुलना में कुशल श्रमिकों की चांदी रहती है. एक औसत फैक्ट्री वर्कर वहां सालाना 32,000 डॉलर से 37,500 डॉलर (लगभग 27 से 31 लाख रुपये) तक कमा लेता है. यदि कंस्ट्रक्शन सेक्टर की बात करें तो वहां एक मजदूर को प्रति घंटा औसतन 23.69 डॉलर (लगभग 1988 रुपये) मिलते हैं. अनुभव और हुनर के आधार पर यह राशि 36 डॉलर प्रति घंटा तक भी जा सकती है, जो भारतीय वेतन के मुकाबले बहुत बड़ा अंतर दर्शाती है.

भारत और अमेरिका के वेतन में भारी अंतर

आंकड़ों की तुलना करें तो अमेरिका में एक आम मजदूर सालाना 31,510 डॉलर से लेकर 76,010 डॉलर तक कमा सकता है, जो भारतीय रुपयों में 26 लाख से 63 लाख रुपये के बीच बैठता है. इसके विपरीत, भारत में एक औसत मजदूर सालभर में मुश्किल से 1.2 लाख से 1.8 लाख रुपये ही कमा पाता है. शहरों में यह आंकड़ा 3 से 5 लाख तक जरूर पहुंचता है, लेकिन रहन-सहन की लागत और मुद्रा की क्रय शक्ति को देखते हुए भारत में श्रमिकों की आर्थिक स्थिति अभी भी काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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