Nihang Sikhs: कौन होते हैं निहंग सिख, आम सरदारों से ये कितने अलग; क्या होता है 'निहंग' का मतलब?
Nihang Sikhs: हाल ही में चमोली जिले में निहंग सिखों से जुड़ा एक बड़ा विवाद हो गया. इसी बीच आइए चाहिए जानते हैं कि कौन होते हैं निहंग सिख.

- निहंग सिख गुरु गोविंद सिंह के प्राचीन योद्धा समूह हैं।
- उनकी नीली वेशभूषा, बड़ी पगड़ी उनकी खास पहचान है।
- वे हमेशा शस्त्रों से सुसज्जित, युद्ध कला का अभ्यास करते हैं।
Nihang Sikhs: उत्तराखंड में निहंग सिखों से जुड़े एक विवाद ने सिख धर्म की सबसे पुरानी और खास योद्धा परंपराओं में से एक की तरफ फिर से लोगों का ध्यान खींचा है. बताया जा रहा है कि यह विवाद चमोली जिले में पवित्र हेमकुंड साहिब तीर्थ के रास्ते पर स्थित शहर कर्णप्रयाग में हुआ. यह झगड़ा निहंग सिख और स्थानीय व्यापारियों के बीच पार्किंग को लेकर हुई बहस के बाद शुरू हुआ. इसी बीच आइए जानते हैं कि कौन होते हैं निहंग सिख और वे दूसरे सिखों से कैसे अलग होते हैं.
निहंग सिख कौन होते हैं?
निहंग सिख, सिख धर्म के अंदर एक पारंपरिक योद्धा समूह से जुड़े हैं और उन्हें गुरु की लाडली फौज कहा जाता है. उनकी शुरुआत 300 साल से भी पहले 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना के वक्त हुई थी. इतिहास में निहंगों ने योद्धा संत के तौर पर काम किया और संघर्ष के समय सिख समुदाय, गुरुद्वारा और धार्मिक संस्थानों की रक्षा की. आज भी निहंग खालसा के शुरुआती सालों में शुरू की गई कई योद्धा परंपराओं को बनाए रखे हुए हैं.
निहंग शब्द का क्या मतलब है?
निहंग शब्द की उत्पत्ति के बारे में आमतौर पर दो बातें मानी जाती हैं. एक नजरिए के मुताबिक यह संस्कृत शब्द निशंक से आया है. इसका मतलब है निडर, सांसारिक इच्छाओं से अलग, पवित्र और मौत के डर से मुक्त. एक और थ्योरी के मुताबिक यह शब्द फारसी भाषा से आया है. इसमें निहंग का मतलब है मगरमच्छ या फिर खतरनाक तलवार. कहा जाता है कि मुगल शासकों ने सिख योद्धाओं की शानदार लड़ने की क्षमता को देखने के बाद इस शब्द का इस्तेमाल किया था.
खास नीले कपड़े
निहंग सिखों की सबसे खास पहचान में से एक है उनके गहरे नीले रंग का लिबास. इसे बाणा कहा जाता है. जहां ज्यादातर सिख अपनी पसंद के हिसाब से आधुनिक कपड़े पहन सकते हैं वहीं निहंग अपनी पहचान और सिख योद्धा परंपराओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाने के लिए इस योद्धा लिबास को पहनते हैं.
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खास दुमाला पगड़ी
निहंग सिख एक खास बड़ी और कई परतों वाली पगड़ी पहनते हैं. इसे दुमाला कहा जाता है. दूसरे सिखों द्वारा आमतौर पर पहने जाने वाली पगड़ी के उलट दुमाला 1 से 2 फीट ऊंची हो सकती है और अक्सर इसे लोहे के एक चक्र से सजाया जाता है.
हमेशा हथियारबंद
सिख परंपरा के मुताबिक आम सिख 5 ककार नियम के तहत सिर्फ एक छोटी कृपाण अपने पास रखते हैं. लेकिन निहंग सिख हर समय पूरी तरह से सशस्त्र रहते हैं. वे अपने पास तलवार, भाला, कटार, ढाल और पगड़ी पर लोहे का चक्र रखते हैं.
जीवन शैली और संगठन
ज्यादातर सिख व्यापार, खेती, सरकारी नौकरी और दूसरे काम करते हुए पारिवारिक जीवन जीते हैं. लेकिन कई निहंग सिख छावनी कहे जाने वाले संगठन कैंप में रहते हैं और युद्ध कला से जुड़े अनुशासन का पालन करते हैं. कुछ लोग जीवन भर ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और दूसरे खुद को पूरी तरह से धार्मिक सेवा और सिख युद्ध कला की परंपराओं को बनाए रखने में समर्पित कर देते हैं.
इसी के साथ सिखों का पारंपरिक धार्मिक झंडा निशान साहिब ज्यादातर गुरुद्वारों में केसरिया रंग का ही होता है. लेकिन निहंग सिख पारंपरिक रूप से अपने कैंप और धार्मिक ठिकानों पर नीले रंग का निशान साहिब इस्तेमाल करते हैं. सभी सिखों की तरह निहंग भी गुरु ग्रंथ साहिब जी को पवित्र मानते हैं. लेकिन वे दशम ग्रंथ और सरबलोह ग्रंथ को भी काफी ज्यादा महत्व देते हैं.
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