नदियों का 'Highest Flood Level' क्या होता है, इसे कैसे मापा जाता है?
Nepal Floods: नेपाल इस वक्त बाढ़ की मार झेल रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं क्या होता है हाईएस्ट फ्लड लेवल. जानें इसे कैसे मापा जाता है.

- 26 अगस्त को नेपाल में भयानक बाढ़-भूस्खलन से भारी जनहानि हुई।
- हाईएस्ट फ्लड लेवल नदी का उच्चतम ऐतिहासिक दर्ज जलस्तर होता है।
- यह स्तर बाढ़ जोखिम, बुनियादी ढांचा डिजाइन हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- जलस्तर सेंसर से औसत समुद्र तल सापेक्ष मापा जाता है।
Nepal Floods: 26 अगस्त को नेपाल तिब्बत सीमा के पास के इलाके में भयानक बाढ़ और भूस्खलन हुआ. इसके बाद बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किए गए. रिपोर्ट के मुताबिक मरने वालों की संख्या 1300 से ज्यादा हो गई है जबकि लगभग 12000 लोग बचाए गए हैं. साथ ही 5300 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं. रिपोर्ट से पता चलता है कि बाढ़ से 32000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. हाईएस्ट फ्लड लेवल का शब्द यह समझने के लिए काफी जरूरी हो जाता है की बाढ़ की गंभीरता को कैसे मापा जाता है और अधिकारी कैसे तय करते हैं किसी नदी ने अपने पिछले रिकार्ड को पार कर लिया है या फिर नहीं. आइए जानते हैं क्या होता है हाईएस्ट फ्लड लेवल का मतलब.
क्या है हाईएस्ट फ्लड लेवल?
किसी नदी के हाईएस्ट फ्लड लेवल का मतलब है उस नदी के इतिहास में किसी खास जगह या फिर गेजिंग स्टेशन पर दर्ज किया गया पानी का सबसे ऊंचा स्तर. यह एक अहम पैमाना है जिसका इस्तेमाल अधिकारी, इंजीनियर और आपदा प्रबंधन एजेंसी बाढ़ के जोखिम का आकलन करने और बुनियादी ढांचे की योजना को बनाने के लिए करती हैं.
जब भी कोई नदी अपने पहले दर्ज किए गए स्तर से ऊपर उठकर अभूतपूर्व ऊंचाई तक पहुंच जाती है तो यह बाढ़ के स्थिति को दर्शाता है. नेपाल में जल विज्ञान तथा मौसम विज्ञान विभाग नदी के जल स्तर पर नजर रखता है और बाढ़ से जुड़ी चेतावनियों को जारी करता है. इसमें बाढ़ की गंभीर स्थिति में रेड अलर्ट भी शामिल है.

हाईएस्ट फ्लड लेवल जरूरी क्यों है?
हाईएस्ट फ्लड लेवल सिर्फ बाढ़ के दौरान इस्तेमाल होने वाली कोई संख्या नहीं है. यह नदी के पास बुनियादी ढांचे को बनाने के लिए एक अहम रेफरेंस पॉइंट है. पुल, बांध, सड़क, रेलवे लाइन और दूसरे ढांचे को बाढ़ के जोखिम को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाना चाहिए.
इंजीनियर ऐतिहासिक बाढ़ के स्तरों का इस्तेमाल इस बात को तय करने के लिए करते हैं कि इन ढांचों को कितना ऊंचा बनाया जाना चाहिए और उन्हें बाढ़ के किस स्तर का सामना करने में सक्षम होना चाहिए. अगर कोई नदी अपने पिछले हाईएस्ट फ्लड लेवल को पार कर जाती है तो यह संकेत देता है कि अधिकतम बाढ़ के स्तर के बारे में मौजूदा अनुमान का फिर से आकलन करने की जरूरत हो सकती है.
नदी के जलस्तर को कैसे मापा जाता है?
नदी के जल स्तर की निगरानी के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है. पारंपरिक तरीकों में से एक में वर्टिकल स्टाफ गेज का इस्तेमाल शामिल है. स्टाफ गेज कंक्रीट या फिर धातु से बना एक बड़ा पैमाना होता है जिसे नदी के किनारे, पुल के खंभे या फिर किसी दूसरे स्थान पर लगाया जाता है. इसमें निशान आमतौर पर सेंटीमीटर और मीटर में दिए जाते हैं.
जैसे-जैसे नदी का जल स्तर बढ़ता है देखने वाले गेज पर पहुंचे बिंदु को देखकर जल स्तर का पता लगा सकते हैं. यानी पानी उस स्थान पर पहले दर्ज किए गए उच्चतम स्तर से ऊपर उठ जाता है तो नया माप एक नया हाईएस्ट फ्लड लेवल तय कर सकता है.

आधुनिक सेंसर जल स्तर को कैसे मापते हैं?
आजकल गेजिंग स्टेशनों पर ऑटोमेटिक उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ रहा है. इससे कर्मचारियों को लगातार साइट पर मौजूद रहे बिना ही नदी के जल स्तर की निगरानी की जा सकती है. अल्ट्रासोनिक और रडार सेंसर नदी के ऊपर अक्सर पुलों या फिर ऊंचे ढांचों पर लगाए जा सकते हैं. यह उपकरण पानी की सतह की तरफ तरंगे भेजते हैं और सिग्नल के वापस आने में लगे समय के आधार पर दूरी का हिसाब लगाते हैं. इससे पानी का स्तर सही-सही पता लग जाता है. एक और तकनीक है प्रेशर ट्रांसड्यूसर. इस नदी की तलहटी के पास लगाया जाता है. यह हाइड्रोस्टेटिक दबाव को मापता है जो सेंसर के ऊपर पानी की गहराई के हिसाब से बदलता रहता है. इसके बाद इस जानकारी को पानी के स्तर के माप में बदला जा सकता है.
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औसत समुद्र तल क्यों जरूरी है?
नदी के जलस्तर को सिर्फ यह मापकर नहीं बताया जाता कि किसी खास जगह पर पानी कितना गहरा है. माप को आमतौर पर औसत समुद्र तल के सापेक्ष ऊंचाई के रूप में बताया जाता है. भारत में ऐसी ऊंचाइयों को ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे डेटम के संदर्भ में मापा जाता है. यह अलग-अलग जगह पर ऊंचाई की तुलना करने के लिए एक सामान्य संदर्भ प्रणाली देता है.
उदाहरण के लिए अगर पटना में गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर अपने पिछले बार स्तर से 50.52 मीटर से ऊपर चला जाता है तो वह आंकड़ा संबंधित संदर्भ डेटम के सापेक्ष यानी पानी की सतह की ऊंचाई को दर्शाता है, ना कि सिर्फ नदी में पानी की गहराई को.
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