Mussel Shell Tragedy karnataka : कितने गहरे पानी में मिलती हैं सीपियां, जिन्हें चुनने के चक्कर में जान गंवा बैठे 10 लोग?
Mussel Shell Tragedy karnataka : यहां थट्टे हक्कलू नदी में सीपियां इकट्ठा करने गए एक ही परिवार के 10 लोगों की तेज बहाव में डूबने से मौत हो गई, जबकि कुछ लोग घायल हो गए.

Mussel Shell Tragedy karnataka : कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में हुई दर्दनाक घटना ने पूरे देश को हैरान कर दिया है. यहां थट्टे हक्कलू नदी में सीपियां इकट्ठा करने गए एक ही परिवार के 10 लोगों की तेज बहाव में डूबने से मौत हो गई, जबकि कुछ लोग घायल हो गए. बताया जा रहा है कि नदी में अचानक पानी का बहाव बढ़ गया और लोग गहरे हिस्से में फंसते चले गए. यह हादसा बताता है कि सीपियां इकट्ठा करना कितना जोखिम भरा काम हो सकता है. कई समुदायों के लिए नदी और समुद्र से सीपियां या मसल्स निकालना उनकी इनकम का जरिया होता है, लेकिन इसमें जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है.
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये सीपियां कहां मिलती हैं, कितनी गहराई में होती हैं और इन्हें निकालना इतना खतरनाक क्यों होता है. तो आइए जानते हैं कि सीपियां कितने गहरे पानी में मिलती हैं,जिन्हें चुनने के चक्कर में 10 लोग जान गंवा बैठे.
कर्नाटक हादसे में क्या हुआ?
उत्तर कन्नड़ जिले के शिराली गांव के करीब 14 लोग नदी में सीपियां इकट्ठा करने गए थे. इसी दौरान कुछ लोग तेज धारा में बहने लगे. उन्हें बचाने के लिए दूसरे लोग भी पानी में कूद गए, लेकिन बहाव इतना तेज था कि कई लोग खुद फंस गए. अब तक 10 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कुछ लोग घायल हुए हैं. बचाव दल और स्थानीय लोग लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा भी की है.
क्या होती हैं सीपियां?
सीपियां दरअसल समुद्री और नदी में रहने वाले जीवों का बाहरी शैल होती हैं. ये जीव अपने शरीर की सुरक्षा के लिए मजबूत शैल बनाते हैं. इन्हें अंग्रेजी में Clam, Mussel या Oyster भी कहा जाता है. ये जीव पानी के अंदर मिट्टी, रेत या चट्टानों के बीच रहते हैं. इनके ऊपर बना मजबूत शैल कैल्शियम कार्बोनेट जैसे मजबूत पदार्थ से तैयार होता है. यही वजह है कि मरने के बाद भी इनके शेल लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं.
सीपियां कितने गहरे पानी में मिलती हैं?
सीपियां अलग-अलग जगहों पर अलग गहराई में मिलती हैं. कुछ सीपियां नदी या समुद्र के किनारे उथले पानी में मिल जाती हैं. कई प्रजातियां रेत या कीचड़ के अंदर कुछ सेंटीमीटर से लेकर 2 फीट तक दबकर रहती हैं. कुछ बड़ी सीपियां समुद्र में कई मीटर गहराई तक पाई जाती हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार कुछ प्रजातियां हजारों फीट गहरे समुद्र में भी मिलती हैं. नदियों में मिलने वाली मसल्स अक्सर तेज बहाव वाले हिस्सों और पत्थरों के आसपास ज्यादा पाई जाती हैं. इन्हें निकालने के लिए लोगों को पानी के अंदर जाना पड़ता है, जो कई बार खतरनाक साबित होता है.
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सीपियां इकट्ठा करना क्यों होता है खतरनाक?
सीपियां निकालने में कई खतरे होते हैं. जैसे नदी या समुद्र में अचानक पानी का बहाव बढ़ सकता है. बारिश के मौसम में यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है. वहीं कई बार लोगों को गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता और बहाव में फंस जाते हैं. सीपियां अक्सर पत्थरों और कीचड़ वाले हिस्सों में होती हैं. ऐसे में पैर फिसलने का खतरा रहता है. इसके अलावा नदियों के अंदर कई जगह अचानक गहराई बढ़ जाती है. ऊपर से पानी सामान्य दिखता है, लेकिन नीचे गहरे गड्ढे हो सकते हैं. साथ ही लंबे समय तक पानी में रहने से शरीर जल्दी थक जाता है. कई बार लोग घबराहट में संतुलन खो देते हैं.
सीपियां कैसे बनती हैं?
सीपियां बनाने की प्रक्रिया को बायोमिनरलाइजेशन कहा जाता है. ये जीव अपने शरीर के बाहर धीरे-धीरे मजबूत परत बनाते हैं, जिससे उन्हें सुरक्षा मिलती है. यह शैल उन्हें शिकारियों, तेज लहरों और मौसम के असर से बचाता है. हर प्रजाति की सीप का आकार और रंग अलग होता है. यही वजह है कि समुद्र किनारे मिलने वाली सीपियां इतनी अलग-अलग दिखाई देती हैं.
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