भारत में कितने बच्चे पैदा करती हैं मुस्लिम महिलाएं, जानें हिंदुओं का फर्टिलिटी रेट ज्यादा या कम?
Fertility Rate of Hindu Muslim: भारत में लंबे समय से जन्म दर को लेकर धर्म आधारित बहस होती रही है, लेकिन आंकड़े चौंकाने वाले सच सामने लाते हैं. चलिए जानें हिंदू या मुसलमान किस धर्म में प्रजनन दर कितनी है.

हाल ही में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मुस्लिम महिलाओं को लेकर कहा है कि मुस्लिम महिलाओं से 25-25 बच्चे पैदा कराए जाते हैं. हालांकि इससे पहले भी भारत की जनसंख्या संरचना पर लंबे समय से चल रही बहस में अक्सर हिंदू और मुस्लिम समुदाय की जन्म दरों की तुलना की जाती है. लेकिन राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि दोनों समुदायों में जन्म दर तेजी से घटी है और अब दोनों के बीच का अंतर बेहद कम रह गया है. चलिए जानें मुस्लिम महिलाएं कितने बच्चे पैदा करती हैं और हिंदुओं में जन्मदर क्या है.
हिंदू-मुस्लिम महिलाओं की प्रजनन दर
NFHS-5 के अनुसार, भारत में मुस्लिम महिलाओं का कुल प्रजनन दर (TFR) औसतन 2.3 बच्चे प्रति महिला है. वहीं हिंदू महिलाओं का औसत 1.94 बच्चे प्रति महिला है. यानी मुसलमानों में अब भी जन्म दर कुछ अधिक है, लेकिन यह अंतर सिर्फ 0.36 बच्चों का है.
अगर पिछले तीन दशकों का रुझान देखा जाए तो तस्वीर और भी स्पष्ट हो जाती है. 1992-93 में हुए NFHS-1 सर्वेक्षण के अनुसार मुस्लिम महिलाओं की औसत TFR 4.4 बच्चे प्रति महिला थी. उस समय हिंदू महिलाओं की TFR 3.3 बच्चे प्रति महिला थी. यानी दोनों समुदायों के बीच का अंतर लगभग 1.1 बच्चों का था. लेकिन 2019-21 तक आते-आते यह अंतर घटकर लगभग एक-तिहाई रह गया है.
किस धर्म में फर्टिलिटी रेट में आई गिरावट
आंकड़े यह भी बताते हैं कि गिरावट की गति मुसलमानों में सबसे तेज रही है. 1992 से 2019 के बीच मुस्लिम महिलाओं की TFR में लगभग 47% की कमी दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि में हिंदू महिलाओं की TFR में करीब 41% की गिरावट आई. विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षा का प्रसार, शहरीकरण, महिलाओं की रोजगार भागीदारी और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार इस बदलाव के बड़े कारण हैं.
राज्यों के हिसाब से क्या है हाल
हालांकि फर्टिलिटी रेट राज्यों के हिसाब से अलग-अलग है. उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में जन्म दर अब भी अपेक्षाकृत अधिक है, जबकि दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में यह काफी नीचे जा चुकी है. दिलचस्प बात यह है कि जहां शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हैं, वहां धर्म से इतर हर समुदाय में जन्म दर घट चुकी है.
Source: IOCL























