यहां मुस्लिम सजाते हैं दुर्गा मां का पंडाल, प्रसाद भी करते हैं तैयार
नवरात्री का पावन पर्व शुरु हो चुका है, वैसे तो यह त्यौहार खास तौर पर हिंदूओं के द्वारा बनाया जाता है लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि दुर्गा मां का पांडल किसी मुस्लिम व्यक्ति द्वारा तैयार किया गया हो?

नवरात्री का पर्व भारतीय त्योहारों में सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं. इस त्योहार का हर किसी को इंतजार रहता है. लोग इन दोनों में मां की पूजा करते हैं और गरबा-डांडिया जैसे कार्यक्रमों का आयोजन भी करते हैं. नवरात्री को लोग बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं. लोग मां दूर्गा की पूजा में मिलकर सहयोग देते हैं.
ऐसे में आइए जानते हैं ऐसी ही एक परंपरा के बारे में, जहां मुस्लिम समुदाय के लोग दुर्गा मां का पंडाल सजाने से लेकर प्रसाद तैयार करने तक में योगदान देते हैं.
मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज में 600 साल पुरानी परंपरा
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज क्षेत्र के बहुरा गांव में कोड़ाखाकी दुर्गा पूजा अपनी अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है. यहां करीब 600 वर्षों से चली आ रही पूजा में देवी को पहला भोग एक मुस्लिम परिवार की ओर से चढ़ाया जाता है. यह परंपरा लक्ष्मी जनार्दनपुर इलाके में आज भी निभाई जाती है. इस पूजा की खासियत यह है कि मुस्लिम बहुल इलाके में होने के बावजूद यह आयोजन स्थानीय लोगों की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बना हुआ है. भोग चढ़ाने की यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है.
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बेगूसराय में मोहम्मद प्यारे ने बनाया केदारनाथ मंदिर जैसा पंडाल
बिहार के बेगूसराय जिले के बखरी में वर्ष 2024 की दुर्गा पूजा के दौरान मुस्लिम डेकोरेटर मोहम्मद प्यारे और उनकी टीम ने केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल तैयार किया था. पुरानी दुर्गा मंदिर के पास बने इस पंडाल पर करीब 13 लाख रुपये खर्च किए गए थे. रिपोर्ट के अनुसार जिसमें मोहम्मद प्यारे ने अपनी ओर से पांच लाख रुपये का योगदान दिया था. मोहम्मद प्यारे की भागीदारी ने पूजा पंडाल की सजावट को एक अलग पहचान दी थी. ऐसे ही बिहार के रोहतास जिले के करगहर में इस साल की दुर्गा पूजा के लिए मोहम्मद इस्लाम की टीम कोलकाता की तर्ज पर भव्य पंडाल तैयार कर रही है.
मऊ के करहा बाजार में 50 साल से साथ मनाते हैं दुर्गा पूजा
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के करहा बाजार में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग करीब 50 वर्षों से मिलकर दुर्गा पूजा का आयोजन करते आ रहे हैं. इस परंपरा से शादाब खान और नियाज अहमद जैसे लोग जुड़े हैं, जबकि अनिल कुमार भारद्वाज लंबे समय से पूजा समिति के अध्यक्ष हैं. यहां दोनों समुदायों के लोगों की भागीदारी को स्थानीय गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल के रूप में पेश किया जाता है.
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