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Meat Ban By Mughal: हिंदू त्योहारों में मांस-मीट की दुकानें बंद करवा देता था यह मुगल बादशाह, नाम जानकर नहीं होगा यकीन

Meat Ban By Mughal: मुगल काल के दौरान कुछ ऐसे शासक भी थे जिन्होंने जानवरों की बलि और हिंदू त्योहारों के दौरान मांस की दुकानों को बंद करने आदेश दे दिए थे. आइए जानते हैं उन बादशाहों के बारे में.

Meat Ban By Mughal: हम जब भी मुगल काल के बारे में सोचते हैं तो हमारे मन में अक्सर शानदार भोज, स्वादिष्ट कबाब, मटन और चिकन की ढेर सारी थालियां आती हैं. ऐसा माना जाता है कि मुगल बादशाह मांस के काफी ज्यादा शौकीन थे और उनकी शाही रसोइयों में नॉनवेज पकवानों की हमेशा भरमार ही रहती थी. लेकिन ऐसा नहीं है. दरअसल सभी मुगल बादशाह मांस खाने के शौकीन नहीं थे. यहां तक की कुछ ने तो जानवरों की बलि पर पाबंदी तक लगा दी थी. इसी के साथ हिंदू और जैन त्योहारों के दौरान मांस की दुकानों को बंद करने के आदेश भी दे दिए गए थे. आइए जानते हैं ऐसा किस बादशाह ने किया.

मांस के प्रति मुगल बादशाह का बदलता नजरिया

वह मुगल बादशाह अकबर ही था जिसने मांसाहारी खाने से दूरी बना ली थी. उनके भरोसेमंद दरबारी और नवरत्नों में से एक अबुल फजल ने आइन-ए-अकबरी में लिखा है कि अकबर ने धीरे-धीरे मांस खाना कम कर दिया था. अपने शासन के शुरुआती सालों में अकबर ने शुक्रवार को मांस न खाने का फैसला किया. इसके बाद उन्होंने रविवार को भी मांस न खाने का निर्णय लिया. इसके बाद उन्होंने हर महीने की पहली तारीख को मांस न खाने का नियम बनाया और ऐसा करते-करते उन्होंने मार्च और अपने जन्म महीने अक्टूबर में पूरी तरह से मांस खाना छोड़ दिया.

ऐसा कहा जाता है कि अकबर का भोजन अक्सर दही और चावल जैसी साधारण चीजों से शुरू होता था. उन्होंने शाही रसोई तीन हिस्सों में बांटी हुई थी. एक हिस्से में पूरी तरह से शाकाहारी भोजन बनता था, दूसरे में मांस और अनाज एक साथ पकाया जाता था, और तीसरे में घी और मसाले के साथ मांस को पकाया जाता था. अकबर को पुलाव, दाल और मौसमी सब्जियां ज्यादा पसंद थी.

जानवरों की बलि पर पाबंदी 

अकबर ने 1583 में हिंदू और जैन त्योहार पर जानवरों की बलि पर रोक लगा दी थी. उनके फैसले के बाद इन दिनों में मांस की दुकानें बंद रहती थी. उनके बेटे जहांगीर ने भी इस परंपरा को जारी रखा. जहांगीर ने गुरुवार, शुक्रवार और रविवार को जानवरों की बलि पर रोक लगा दी थी और इस पाबंदी को त्योहारों के दौरान भी जारी रखा.

मुगल शासकों द्वारा उठाए गए यह कदम सभी धर्म की परंपराओं के सम्मान को दर्शाते हैं. अकबर सुलह-ए-कुल निति में विश्वास रखता था जिसका मतलब था पूर्ण शांति. इस नीति के पीछे का उद्देश्य सभी धर्म के लोगों के बीच एकता को बढ़ावा देना था. अकबर और जहांगीर के इन फैसलों के बाद अनुशासन, सांस्कृतिक समझ और एकता को बढ़ावा मिला.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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