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इस कीड़े के काटते ही फैल रही है खतरनाक बीमारी, वैज्ञानिकों के भी उड़े होश

कुछ साल पहले जस्टिन बीबर ने इस बीमारी को लेकर सोशल मीडिया पर खुलासा किया था और हाल ही में जस्टिन टिंबरलेक ने भी बताया कि वो लंबे समय से इस बीमारी से पीड़ित हैं.

पॉप संगीत की दुनिया में जस्टिन बीबर और जस्टिन टिंबरलेक जैसे नाम कौन नहीं जानता, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि ये दोनों सितारे एक खतरनाक बीमारी से जूझ चुके हैं. कुछ साल पहले जस्टिन बीबर ने इस बीमारी को लेकर सोशल मीडिया पर खुलासा किया था और हाल ही में जस्टिन टिंबरलेक ने भी बताया कि वो लंबे समय से इस बीमारी से पीड़ित हैं.

इन मशहूर हस्तियों की बातों ने दुनियाभर में इस बीमारी को लेकर जागरूकता तो बढ़ाई, लेकिन वैज्ञानिकों के सामने भी कई सवाल खड़े कर दिए कि आखिर ये बीमारी इतनी तेजी से क्यों फैल रही है. तो चलिए जानते हैं कि किस कीड़े के काटते ही खतरनाक बीमारी फैल रही है. 

किस कीड़े के काटते ही खतरनाक बीमारी फैल रही है

हाल ही में जस्टिन टिंबरलेक ने भी बताया कि वो लंबे समय से  लाइम रोग से पीड़ित हैं. लाइम रोग एक बैक्टीरिया से फैलने वाला संक्रमण है, जो एक खास तरह के कीड़े टिक के काटने से होता है. टिक बहुत छोटा होता है, अक्सर चावल के दाने या तिल के आकार का होता है. यह कीड़ा इंसान और जानवरों का खून चूसता है और इसी प्रक्रिया में संक्रमण फैला देता है. टिक को जब कोई संक्रमित जानवर काटता है, तो उसमें मौजूद बोरेलिया नाम का बैक्टीरिया उसके शरीर में चला जाता है. इसके बाद अगर वहीं टिक किसी इंसान को काटता है, तो यह बैक्टीरिया इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाता है और धीरे-धीरे लाइम रोग फैलता है. 

कहां से शुरू हुई यह बीमारी?

1970 के दशक में अमेरिका के कनेक्टिकट राज्य के एक छोटे से शहर ओल्ड लाइम में कई बच्चों को जोड़ों में सूजन और दर्द की शिकायत हुई. शुरुआत में डॉक्टर समझ नहीं पाए कि ये किस बीमारी के लक्षण हैं. लेकिन जांच में पता चला कि इन सभी बच्चों को एक जैसे कीड़े ने काटा था और उनकी स्किन पर गोलाकार रैश बन गए थे. यही से इस बीमारी को लाइम रोग नाम मिला.  कुछ साल बाद वैज्ञानिकों ने इस रोग का कारण बनने वाले बैक्टीरिया की पहचान की और इसका नाम बोरेलिया बर्गडॉर्फेरी रखा गया. 

इस बीमारी के लक्षण क्या होते हैं?

लाइम रोग के लक्षण कई बार तुरंत नहीं दिखते, टिक का काटना भी महसूस नहीं होता, क्योंकि उसकी लार में ऐसा केमिकल होता है जो दर्द का अहसास नहीं होने देता. वहीं संक्रमण के कुछ समय बाद लक्षण दिख सकते हैं. जैसे शरीर पर गोल आकार का लाल रैश, तेज बुखार, जोड़ों में दर्द और सूजन, सिरदर्द, थकान और कुछ मामलों में चेहरे की नसों पर असर, लकवा जैसा लक्षण, मेनिनजाइटिस या हार्ट संबंधी समस्याएं, वहीं लक्षण अक्सर सामान्य फ्लू की तरह लगते हैं, जिससे यह पहचानना और कठिन हो जाता है. 

लाइम रोग की जांच इतनी आसान नहीं है. डॉक्टरों को भी कई बार अंदाजा नहीं होता कि मरीज को टिक ने काटा है. इसकी जांच दो चरणों में होती है, जिसमें शरीर में बैक्टीरिया से लड़ने वाली एंटीबॉडी की जांच की जाती है. लेकिन अगर शुरुआती दौर में टेस्ट किया जाए, तो रिपोर्ट अक्सर नेगेटिव आती है क्योंकि एंटीबॉडी अभी बनी ही नहीं होती है. ऐसे में इलाज के लिए आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं, जो असरदार तो होती हैं लेकिन इसके साइड इफेक्ट भी होते हैं. 

टिक से कैसे बचें?

टिक से बचने के लिए सबसे जरूरी रोकथाम है कि अगर आप जंगल, पहाड़ी इलाकों या घास वाले क्षेत्रों में घूमने जाते हैं, तो पूरे कपड़े पहने, शरीर पर टिक की जांच करें, खासकर गर्दन, कान के पीछे, कमर और घुटनों के पास, अगर टिक चिपका हुआ हो, तो उसे चिमटे से धीरे से निकाले, टिक को निकालने के बाद उस जगह को साफ करें और कुछ दिनों तक नजर रखें, अगर शरीर पर गोल रैश दिखे या बुखार-जोड़ों में दर्द जैसी शिकायत हो, तो डॉक्टर से तुरंत मिलें. वहीं वैज्ञानिक मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की वजह से टिक के रहने और पनपने के लिए परिस्थितियां बढ़ रही हैं. वहीं पहले जो इलाके बेहद ठंडे होते थे. जैसे नॉर्वे, स्कैंडिनेविया या पहाड़ी क्षेत्र, वहां अब मौसम गर्म और नम हो गया है, जो टिक को बढ़ा रहा है. 

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