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Lucknow Fire In Coaching Centre: खुली जगह से ज्यादा खतरनाक क्यों होती है बिल्डिंग में आग, क्यों काबू करना हो जाता है मुश्किल?

पुर्णिया इलाके में आज दोपहर को भीषण आग लग गई. तीन मंजिला इमारत में लगी आग ने कुछ ही मिनट में विकराल रूप धारण कर लिया और कई लोगों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला.

Lucknow Fire In Coaching Centre: लखनऊ के अलीगंज स्थित पुर्णिया इलाके में आज दोपहर को भीषण आग लग गई. तीन मंजिला इमारत में लगी आग ने कुछ ही मिनट में विकराल रूप धारण कर लिया और कई लोगों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला. हादसे में  अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं. आग लगने के बाद कुछ छात्रों और कर्मचारियों को जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग लगानी पड़ी. वहीं कई लोग धुएं में फंस गए. बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग में आग लगी उसके ग्राउंड फ्लोर पर एक पेट शॉप, ऊपर के फ्लोर पर 3D आर्ट स्टूडियो, कंप्यूटर कोडिंग से जुड़ा काम और बच्चों की लाइब्रेरी चलती चल रही थी.

हालांकि आग लगने के बाद पेट शॉप से जानवरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. वहीं फिलहाल इस आग को लेकर रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार चल रहा है. रिपोर्ट के अनुसार अब तक कुल 9 लोगों को इमारत से बाहर निकाला जा चुका है. इसके अलावा लखनऊ में लगी इस आग के बाद एक बार फिर से सवाल उठ उठने लगे कि आखिर बिल्डिंग में लगने वाली आग इतनी खतरनाक क्यों होती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं की खुली जगह से ज्यादा खतरनाक बिल्डिंग की आग क्यों होती है.

बिल्डिंग में कुछ ही मिनट में खतरनाक हो जाती है आग 

फायर सेफ्टी एक्सपर्ट्स के अनुसार छोटे से कमरे में लगी आज भी बहुत कम समय में बड़े हादसे में बदल सकती है. आज के समय में बड़ी-बड़ी इमारतों में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक फर्नीचर, प्लास्टिक आधारित इंटीरियर,  फॉल सीलिंग, एयर कंडीशनिंग डक्ट और दूसरे जलने वाली सामान आग को तेजी से फैलाने का काम करती है. पहले की बिल्डिंग में नेचुरल वेंटिलेशन ज्यादा होता था जिससे गर्मी और धुंआ बाहर निकल जाता था लेकिन आज के समय में बनी इमारतें में बंद खिड़कियां, सील्ड कमरे और एयर टाइट डिजाइन होने के कारण गर्मी और धुंआ अंदर ही जमा होने लगता है. इसी वजह से आग लगने के कुछ ही मिनट में पूरा फ्लोर इसकी चपेट में आ सकता है. 

बिल्डिंगों में धुंआ बनता है सबसे बड़ा खतरा 

आग से होने वाली मौतों में बड़ी संख्या सीधे जलने से नहीं, बल्कि धुएं के कारण होती है. जैसे-जैसे आग बढ़ती है जहरीला धुंआ पूरे कमरे और फिर पूरी इमारत में फैलने लगता है. इससे लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं दिखता और आग की जहरीली गैसों में दम घुटने से व्यक्ति की मौत हो जाती है. बहुमंजिला इमारतों में धुंआ सीढ़ियों, लिफ्ट और वेंटिलेशन सिस्टम से तेजी से ऊपर की ओर फैलता है, जिससे ऊपरी मंजिलों पर मौजूद लोग भी खतरे में आ जाते हैं. 

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फ्लैश ओवर का भी रहता है सबसे बड़ा खतरा 

एक्सपर्ट्स के अनुसार किसी भी बिल्डिंग में आग लगने पर सबसे बड़ा खतरा फ्लैश ओवर होता है. दरअसल यह वह कंडीशन होती है जब कमरे में मौजूद लगभग सभी ज्वलनशील चीजें एक साथ आग पकड़ लेती है. इसके बाद पूरा कमरा आग के गोले में बदल जाता है. पुरानी बिल्डिंग में फ्लैट ओवर की कंडीशन बनने में करीब 15 से 17 मिनट लगते थे, लेकिन आज की बिल्डिंग में यह केवल 3 से 5 मिनट के अंदर फैल सकता है. वहीं एक बार फ्लैश ओवर हो जाने के बाद कमरे के अंदर मौजूद व्यक्ति के बचने की संभावना बहुत कम हो जाती है. 

बिल्डिंग में आग काबू करना क्यों होता है मुश्किल 

खुली जगह में आग लगने पर धुंआ और गर्मी चारों तरफ फैल जाते हैं, लेकिन इमारत के अंदर यह सीमित जगह में जमा होते रहते हैं. इससे तापमान तेजी से बढ़ता है और रेस्क्यू ऑपरेशन भी मुश्किल हो जाता है. दमकल कर्मियों को भी इमारत में लगी मंजिल पर पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है. इसके अलावा घर के अंदर मौजूद लकड़ी का फर्नीचर आग को और बढ़ा देता है, जिससे निकलने वाला धुंआ स्थिति और खराब कर देता है. 

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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