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लंगर से लेकर भंडारे तक में फ्री मिलता है खाना, जानें 500 लोगों को फ्री खाना खिलाना में कितना होता है खर्च?

Langar And Bhandara Cost: 500 लोगों को मुफ्त भोजन खिलाने का खर्च इस बात पर डिपेंड करता है कि आयोजन किस तरह का है और मेन्यू में क्या-क्या डिशेज शामिल हैं. चलिए इस बारे में विस्तार से समझें.

Langar And Bhandara Cost: भारत में लंगर, भंडारा या सामूहिक भोज का आयोजन धार्मिक और सामाजिक परंपरा का अहम हिस्सा है. गुरुद्वारों में रोजाना हजारों लोग मुफ्त भोजन का आनंद लेते हैं, वहीं कई मंदिरों और समाजसेवी संस्थाओं द्वारा समय-समय पर भंडारे भी आयोजित किए जाते हैं, लेकिन सवाल यह है कि अगर 500 लोगों को मुफ्त भोजन कराना हो तो इसकी लागत कितनी आती है?

साधारण भोजन की लागत

अगर भोजन साधारण हो जैसे दाल, चावल और एक सब्जी वाली थाली, तो खर्च बहुत कम आता है. अनुमान के मुताबिक एक थाली तैयार करने में लगभग 10-12 रुपये का खर्च आता है. इस हिसाब से 500 लोगों को भोजन कराने पर कुल खर्च करीब 5000-6000 के आसपास बैठता है. यह तरीका अक्सर गुरुद्वारों के लंगरों में देखा जाता है, जहां सरल लेकिन पौष्टिक भोजन परोसा जाता है.

विशेष व्यंजन और मिठाई की लागत

अगर आयोजन बड़ा हो और मेन्यू में पूड़ी, सब्जी, मिठाई या फिर पनीर जैसी डिशें शामिल हों, तो प्रति व्यक्ति लागत 20 रुपये या उससे ज्यादा भी पहुंच सकती है. इस तरह 500 लोगों के लिए खर्च लगभग 10,000 रुपये या उससे अधिक हो सकता है. कई धार्मिक आयोजनों और शादी-ब्याह जैसे अवसरों पर इसी तरह की थाली परोसी जाती है.

खर्च तय करने वाले कारक

भोजन की गुणवत्ता और मेन्यू सबसे अहम है. साधारण शाकाहारी भोजन कम खर्चीला होता है, जबकि खास डिशें और मिठाइयां लागत बढ़ा देती हैं. वहीं परोसने का तरीका भी फर्क डालता है. जैसे अगर बुफे स्टाइल में सामग्री की खपत कम होती है, जबकि प्लेटेड थाली में ज्यादा खर्चा होता है.

इसके अलावा स्थान और परिवहन भी खर्च को प्रभावित करते हैं. अगर सब्जियां और अनाज स्थानीय बाजार से मिल जाएं तो लागत कम रहती है, लेकिन बाहर से लाना पड़े तो खर्च बढ़ जाता है. इसके अलावा ईंधन और श्रम की लागत भी कुल बजट में जुड़ जाती है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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