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कैश कांड में जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, क्या अब उन्हें गिरफ्तार कर सकती है पुलिस?

Justice Yashwant Verma Case: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है. आइए जानते हैं क्या पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है या नहीं.

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  • जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंपा, महाभियोग प्रक्रिया के बीच कदम.
  • इस्तीफे के बाद जज की संवैधानिक सुरक्षा समाप्त, आम नागरिक की तरह कार्रवाई.
  • FIR दर्ज हो सकती है, अगर जांच में भ्रष्टाचार या बेहिसाब नकदी मिले.
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, इस्तीफे के बाद गिरफ्तारी संभव है.

Justice Yashwant Verma Case: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा ने 10 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना इस्तीफा द्रोपती मुर्मू को सौंप दिया है. यह कदम एक हाई प्रोफाइल कैश घोटाले और उनके खिलाफ चल रही महाभियोग की कार्यवाही के बाद उठाया गया है. उनके इस्तीफे के साथ ही एक हम कानूनी सवाल सामने आया है. क्या अब पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

इस्तीफे के बाद उनकी इम्यूनिटी का क्या होगा? 

जज के तौर पर काम करते हुए जस्टिस वर्मा को कुछ संवैधानिक सुरक्षाएं मिली हुई थीं. हालांकि एक बार जब उनका इस्तीफा मंजूर हो जाता है तो उन्हें वह छूट नहीं मिलेगी. कानूनी तौर पर उनके साथ किसी भी आम नागरिक जैसा ही बर्ताव किया जाएगा. इसका मतलब है कि जांच एजेंसियां सामान्य आपराधिक कानून के तहत उनके खिलाफ  कार्रवाई कर सकती हैं.

महाभियोग की प्रक्रिया 

तकनीकी तौर पर इस्तीफे से महाभियोग की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी. क्योंकि महाभियोग का मकसद किसी मौजूदा जज को पद से हटाना होता है इस वजह से प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही पद छोड़ देने से यह प्रक्रिया बेमानी हो जाती है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि उन पर लगे आरोप खत्म हो जाते हैं. 

क्या उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है? 

इस्तीफे के बाद पुलिस या फिर एजेंसी एफआईआर दर्ज कर सकती है. लेकिन यह तभी हो सकता है जब उनके पास कोई ठोस सबूत हो. अगर आंतरिक जांच या फिर जांच रिपोर्ट से यह पहली नजर में साबित होता है कि उन्होंने भ्रष्टाचार किया है या उनके पास बेहिसाब नकदी है तो एफआईआर दर्ज की जा सकती है और अगर जरूरी हुआ तो उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक वीरास्वामी फैसले के मुताबिक किसी सिटिंग हाई कोर्ट जज के खिलाफ तब तक एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती जब तक भारत के चीफ जस्टिस से सलाह ना ले ली जाए. हालांकि इस्तीफा देने के बाद यह सुरक्षा कवच उस तरह से लागू नहीं होता. दरअसल यह मामला  मार्च 2025 का है. दिल्ली में उनके सरकारी आवास पर आग लग गयी थी. इस घटना के दौरान कथित तौर पर जले हुए नोट और भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी. सुप्रीम कोर्ट की एक आंतरिक समिति ने उन्हें पहली नजर में दोषी पाया था. इसके बाद 146 सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर दी थी.

यह भी पढ़ें: इंडक्शन चूल्हे के इस्तेमाल से देश में बढ़ी बिजली की डिमांड, जानें 1 घंटे में फूंक देता है कितने यूनिट?

स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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