चीनी के दाम बढ़े, कितनी महंगी हो सकती है मिठाई-कोल्ड ड्रिंक और चाय?
चीनी की कीमतों में तेज उछाल आया है. त्योहारों का सीजन करीब है, ऐसे में चीनी महंगी होने से मिठाई, चाय और चीनी से बनने वाले दूसरे सामानों के दाम भी बढ़ने की चिंता बढ़ गई है.

चीनी के बढ़ते दाम इन दिनों आम आदमी की रसोई से लेकर चाय की दुकान और मिठाई की दुकानों तक असर दिखा रहे हैं. कुछ ही दिनों में चीनी की कीमतों में तेज उछाल आया है. जहां करीब डेढ़ महीने पहले चीनी का थोक भाव 42 रुपए से 45 रुपए प्रति किलो के आसपास था, वहीं अब यह करीब 62 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है. कुछ जगहों पर खुदरा कीमत 65 रुपए प्रति किलो तक भी पहुंच गई है.
ऐसे में त्योहारों का सीजन नजदीक होने के बीच मिठाई-कोल्ड ड्रिंक, चाय और चीनी से जुड़े दूसरे उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है. तो आइए जानते हैं कि चीनी के दाम बढ़ने से मिठाई-कोल्ड ड्रिंक और चाय कितनी महंगी हो सकती है.
20 दिन में कितना बढ़ गया चीनी का दाम?
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 20 जुलाई को 48.18 रुपए प्रति किलो थी, जो 21 अगस्त को बढ़कर 58.20 रुपए प्रति किलो हो गई. वहीं, कुछ बाजारों में कीमत इससे काफी ज्यादा है. हरियाणा में चीनी के दाम करीब 62 से 65 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं. सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कम घरेलू उत्पादन, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, फसल को हुए नुकसान और जमाखोरी जैसे कारण बताए हैं. सरकार ने यह भी कहा है कि कीमतों में बढ़ोतरी को एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्ट किए जाने से जोड़ना सही नहीं है.
मिठाई-कोल्ड ड्रिंक और चाय कितनी महंगी हो सकती है?
चीनी की कीमत बढ़ने का असर अब चाय और मिठाई के साथ-साथ दूसरे उत्पादों पर भी पड़ रहा है. सोनीपत में एक चाय विक्रेता ने बताया कि पहले 10 रुपए में मिलने वाली चाय अब बढ़ती लागत के कारण15 की हो गई है. वहीं मिठाई कारोबारियों के मुताबिक, चीनी के साथ आटा, वनस्पति घी और देसी घी महंगे होने से मिठाई की कीमत 20 रुपए से 30 रुपए प्रति किलो तक बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है. चीनी का इस्तेमाल कोल्ड ड्रिंक, बिस्किट और फार्मास्यूटिकल समेत कई उत्पादों में होता है, ऐसे में इसकी कीमत में लगातार बढ़ोतरी से इनकी लागत पर भी दबाव बढ़ सकता है.
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चीनी उत्पादन अनुमान से कम रहा
इस सीजन में देश में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख मीट्रिक टन था. गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ ज्यादा बारिश से जलभराव का भी असर पड़ा है. हरियाणा के सोनीपत में भी चीनी मिल की स्थिति उत्पादन में गिरावट दिखाती है. 2022-23 में मिल ने 30.75 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी, जो 2025-26 में घटकर 20.39 लाख क्विंटल रह गई. इसी दौरान चीनी उत्पादन 3.08 लाख क्विंटल से घटकर 1.90 लाख क्विंटल हो गया.
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