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प्याज रखने के लिए बनाइए गोदाम, सरकार देगी 4.50 लाख की सब्सिडी

सस्ते में प्याज बेचने की मजबूरी अब हमेशा के लिए खत्म हो सकती है. सरकार ने आधुनिक प्याज गोदाम बनाने के लिए बंपर सब्सिडी का ऐलान किया है. इस योजना का लाभ कैसे मिलेगा जान लें इसका पूरी तरीका.

प्याज की खेती करने वाले किसानों के साथ अक्सर यह होता है कि जब अच्छी पैदावार होती है. तो मंडियों में भाव एकदम से गिर जाते हैं. फिर मजबूरी में किसानों को अपनी मेहनत की फसल औने-पौने दामों में बेचनी पड़ती है. क्योंकि सही स्टोरेज न होने से प्याज जल्दी सड़ने लगती है. लेकिन अब इसी समस्या को खत्म करने के लिए और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार एक बहुत ही शानदार योजना लेकर आई है. 

अब आप अपने खेत के पास ही खुद का प्याज स्टोरेज गोदाम बना सकते है. जिसके लिए सरकार आपको अच्छी खासी सब्सिडी दे रही है. इस योजना के तहत किसानों को अधिकतम 4.50 लाख रुपये तक की मदद दी जा रही है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आपको फसल कटाई के तुरंत बाद सस्ते में अपनी फसल नहीं बेचनी पड़ेगी. आप अपनी प्याज को महीनों सुरक्षित रखकर तब बेच पाएंगे जब बाजार में रेट सबसे ज्यादा हों.

किसानों को इतनी मिलेगी सब्सिडी

बिहार सरकार की इस योजना के तहत बागवानी विभाग की ओर से अलग-अलग क्षमता वाले प्याज गोदाम बनाने पर भारी छूट दी जा रही है. आमतौर पर 25 से 50 मीट्रिक टन क्षमता वाले मॉडर्न गोदाम बनाने पर कुल लागत का एक बड़ा हिस्सा सरकार खुद उठा रही है. मसलन बात की जाए तो अगर 50 मीट्रिक टन का गोदाम बनाने में लगभग 6 लाख रुपये का खर्च आता है. तो सरकार इस पर 50 से लेकर 75 प्रतिशत तक की  भारी भरकम सब्सिडी दे रही है. 

जो अधिकतम 4.50 लाख रुपये तक बैठती है. यानी किसान को अपनी जेब से सिर्फ 1.50 लाख की रकम ही लगानी पड़ेगी. यह सब्सिडी अलग-अलग वर्ग के किसानों, जैसे सामान्य, लघु-सीमांत और महिला किसानों के लिए कैटेगरी के हिसाब से तय होती है. यह पूरा पैसा काम पूरा होने और अधिकारियों के फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद सीधे किसान के आधार से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है. 


प्याज रखने के लिए बनाइए गोदाम, सरकार देगी 4.50 लाख की सब्सिडी

वैज्ञानिक गोदाम से किसानों को क्या फायदे मिलेंगे?

पुराने तरीकों से प्याज रखने पर नमी और गर्मी की वजह से 30 से 40 फीसदी तक फसल सड़कर खराब हो जाती है. लेकिन सरकार की ओर से तय डिजाइन वाले इस नए गोदाम में हवा के आने-जाने यानी क्रॉस वेंटिलेशन का खास ध्यान रखा जाता है. इसमें बांस, लोहे के एंगल, जालीदार रैक और खास तरह की छत का इस्तेमाल होता है. जिससे टेंपरेचर कंट्रोल रहता है. 

इस वैज्ञानिक गोदाम में रखी प्याज 6 से 8 महीने तक एकदम ताजी और सूखी बनी रहती है उसका वजन नहीं घटता और न ही उसमें सड़ांध लगती है. किसान ऑफ-सीजन में यानी जब बाजार में प्याज की बहुत किल्लत होती है और कीमतें लगातार बढ़ रही होती हैं. तब अपनी फसल निकालकर सीधे थोक मंडियों में या फिर खुदरा बाजार में बेच सकते हैं. इससे प्रति क्विंटल पर दो से तीन गुना तक ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है और पहले जो फसल की बर्बादी होती थी वह भी नहीं होती.


प्याज रखने के लिए बनाइए गोदाम, सरकार देगी 4.50 लाख की सब्सिडी

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कैसे कर सकते हैं योजना में आवदेन?

बिहार के किसानों को इस योजना में आवेदन करने के लिए बिहार कृषि एप का इस्तेमाल करना होगा. इस ऐप के जरिए ऑनलाइन आवेदन किया जाएगा. आवेदन करते वक्त किसानों को प्याज भंडारण के लिए गोदाम बनाने का ऑप्शन सेलेक्ट करना होगा. आवेदन जमा होने के बाद विभाग की ओर से दस्तावेज वेरीफाई किए जाएंगे और गोदाम बनाने के काम का फिजीकल वेरीफिकेशन होगा. 

इसके बाद प्रक्रिया के तहत सब्सिडी की रकम किसान के खाते में भेज दी जाएगी योजना में लाभ लेने वाले किसान के पास उसकी जमीन से जुड़े कागजात और फॉर्म रजिस्ट्रेशन आईडी जैसे दस्तावेज होने चाहिए. किसी किसान को आवेदन करने के दौरान किसी तरह की दिक्कत आती है  तो कृषि विभाग से संपर्क किया जा सकता है. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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