ईरान के जिस चाबहार पोर्ट पर भारत ने लगाए 400 करोड़, उस पर मिसाइलें क्यों दाग रहा अमेरिका?
Iran Us conflict: हाल ही में अमेरिका ने चाबहार पोर्ट पर हमला किया. आइए जानते हैं कि क्या इसके बाद भारत को भी कुछ नुकसान पहुंचा है या नहीं.

- अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, अमेरिकी हमले में चाबहार बंदरगाह निशाना।
- अमेरिका ने ईरान की समुद्री गतिविधियों पर लगाम हेतु हमला किया।
- भारत का टर्मिनल सुरक्षित, पर बंदरगाह का संचालन बाधित।
Iran Us conflict: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा टकराव और भी ज्यादा बढ़ चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी हवाई हमले में ईरान की कई अहम जगहों को निशाना बनाया गया है. इनमें चाबहार पोर्ट भी शामिल है. यह न सिर्फ ईरान के लिए बल्कि भारत के लिए भी काफी ज्यादा जरूरी है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत ने इसके विकास में भारी निवेश किया है. इन हमलों की खबरों ने मिडल ईस्ट के साथ भारत की लंबी अवधि की कनेक्टिविटी योजनाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है. आइए जानते हैं कि चाबहार को निशाना आखिर क्यों बनाया गया और इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा.
अमेरिका चाबहार पोर्ट को निशाना क्यों बना रहा है?
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका का यह दावा है कि ईरान का इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स चाबहार पोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर रहा था. इसमें समुद्री निगरानी और कंट्रोल टावर भी शामिल थे जिनका इस्तेमाल कमर्शियल जहाज पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था और साथ ही होर्मुज में चलने वाले जहाजों पर हमले को कोऑर्डिनेटर करने के लिए किया जा रहा था .
इन हमलों का संबंध होर्मुज में चल रहे समुद्री टकराव से भी है. जहां अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है. वाशिंगटन का ऐसा मानना है कि चाबहार जैसी सुविधाओं को कमजोर करने से ईरान की नौसैनिक गतिविधि पर नजर रखने और क्षेत्र में ऑपरेशन को कोऑर्डिनेटर करने की क्षमता कम हो जाएगी.
यह भी पढ़ेंः होर्मुज पूरी तरह बंद हो जाए तो क्या होगा, फिर किन रास्तों से दुनिया को मिलेगी राहत?
भारत के लिए चाबहार क्यों जरूरी?
भारत के लिए चाबहार पोर्ट लंबे समय से एक रणनीतिक प्रोजेक्ट माना जाता रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान, मिडिल ईस्ट और रूस तक सीधी पहुंच देता है. भारत ने शहीद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास में लगभग 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया और 2024 में एक लंबी अवधि का ऑपरेशनल समझौता किया.
यह पोर्ट इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के लिए एक जरूरी गेटवे का काम करता है. यह एक ट्रेड नेटवर्क है जिसे ट्रांसपोर्टेशन की लागत कम करने और भारत, ईरान, मिडल ईस्ट और यूरोप के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए बनाया गया है. इस वजह से चाबहार में किसी भी तरह की रुकावट सिर्फ ईरान के लिए ही नहीं बल्कि भारत के लिए भी व्यापारिक और रणनीतिक लक्ष्यों को काफी ज्यादा प्रभावित कर देगी.
क्या भारत का निवेश प्रभावित हुआ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के विदेश मंत्रालय ने यह साफ किया है कि भारत द्वारा संचालित शाहिद बेहश्ती टर्मिनल को इन हमले में कोई भी सीधा भौतिक नुकसान नहीं पहुंचा है. हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक इन हमलों में चाबहार का मैरिटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर नष्ट हो गया और पास के शहीद कलंतरी टर्मिनल के कुछ हिस्सों को काफी नुकसान पहुंचा है. यही वजह है कि बंदरगाह पर शिपिंग ऑपरेशन और नेविगेशन सिस्टम बाधित हुए हैं.
यह भी पढ़ेंः अनशन से कब-कब हिली सरकार, जानें गांधी से लेकर वांगचुक तक का इतिहास
























