Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक के अलावा जंतर-मंतर पर अनशन पर कौन-कौन बैठा, जान लीजिए सभी के नाम
बीते दिन दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया है. लेकिन उनके बाद जंतर-मंतर पर कुछ और छात्र अनशन पर बैठे हुए हैं, चलिए उनके नाम जानें.

दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. शनिवार तड़के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस के द्वारा जबरन अस्पताल के जाए जाने के बाद भी आंदोलन थमा नहीं है. सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में होने के बाद भी उनका हौसला कम नहीं हुआ है. उन्होंने अस्पताल में भी किसी भी तरह से ड्रिप या मुंह के जरिए तरल पदार्थ लेने से मना कर दिया है. उनकी अनुपस्थिति में अब नए चेहरों ने कमान संभाल ली है, जिससे यह प्रदर्शन अब और व्यापक रूप ले चुका है. जंतर-मंतर पर अलग-अलग संगठनों के युवाओं ने सरकार के सामने अपनी मांगे रखी हैं. आइए जानें कि अब इसके बाद अनशन पर कौन-कौन है.
अभिजीत दिपके ने संभाला मोर्चा
सोनम वांगचुक के धरना स्थल से हटने के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए नए कुछ छात्र सामने आए हैं. कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर पर मोर्चा संभालते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी है. इसके साथ ही छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के तीन प्रमुख सदस्य भी 28 जून से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हैं. ये सभी प्रदर्शनकारी उन्हीं मांगों का पुरजोर समर्थन कर रहे हैं, जिनको लेकर सीजेपी और वांगचुक आवाज उठा रहे हैं.
जेएनयू की छात्रा नेहा
भूख हड़ताल पर बैठी 27 वर्षीय नेहा उत्तराखंड की मूल निवासी हैं. वह वर्तमान में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से थिएटर एंड परफॉर्मिद स्टडीज में पीएचडी कर रही हैं. नेहा साल 2018 से ही छात्र संगठन आइसा से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं और लगातार छात्रों के अधिकार की बात उठाती हैं.
यूपी के छात्र मनीष
इन अनशन में शामिल दूसरे छात्र मनीष हैं, जो उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के रहने वाले हैं. मनीष पिछले 10 सालों से आइसा संगठन के साथ मिलकर छात्रों की राजनीति और उनके हक की लड़ाई लड़ रहे हैं. वह वर्तमान में आइसा के उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. मनीष अभी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में पीएचडी कर रहे हैं.
आमीन
आंदोलन में डटे तीसरे छात्र का नाम आमीन है, जो आइसा के सदस्य के रूप में इस भूख हड़ताल का अहम हिस्सा हैं. आमीन ने आंदोलन के मुख्य उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे यहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बैठते हैं. उनका कहना है कि वे परीक्षा में हुई गड़बड़ी के खिलाफ सरकार की जवाबदेही तय करवाना चाहते हैं.
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