साल भर में एक के बाद एक तीन हादसे, जानें भारतीय सेना का तुरुप का इक्का जगुआर जेट कैसे बना 'कबाड़'?
Jaguar Fighter Aircraft Crashed: राजस्थान के चुरू में भारतीय वायुसेना का फाइटर जेट जगुआर क्रैश हो गया है. चलिए जगुआर विमान का इतिहास जानें और कब-कब इसका दबदबा रहा, आज कितनी कीमत है.

Jaguar Fighter Aircraft Crashed: इंडियन एयरफोर्स के साथ-साथ देश को एक बार फिर से बड़ा झटका लगा है. वायुसेना का एक लड़ालू विमान जगुआर राजस्थान के चुरू में क्रैश हो गया है. इस हादसे में दोनों पायलटों की मौत हो गई है. जेट एयरक्राफ्ट क्रैश इतनी तेजी से हुआ कि उसका मलबा खेतों में दूर तक जाकर फैल गया. यह दुर्घटना आज (बुधवार) दोपहर की है. हालांकि दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है. घटनास्थल से प्राप्त तस्वीरों में मलबे से धुआं उठता हुआ नजर आया है. अधिकारी घटनास्थल पर हैं और बचाव रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. सेना और स्थानीय प्रशासन के द्वारा शवों की पहचान की जा रही है. बता दें यह इस साल का तीसरा जगुआर विमान हादसा है. चलिए जानें कि भारतीय सेना को संघर्ष में बढ़त देने वाला जगुआर अब कैसे कबाड़ बनता जा रहा है.
जगुआर फाइटर जेट का स्टेटस
एक रिपोर्ट की मानें तो भारतीय वायुसेना साल 2025 के अंत तक अपने मिग-21 स्क्वाड्रन के अंतिम स्क्वाड्रन को अब रिटायर करने के लिए सोच रही है. अगर ऐसा होता है तो एंग्लो-फ्रेंच SEPECAT जगुआर फाइटर जेट इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में सबसे पुराना लड़ाकू फाइटर जेट होगा. यह विमान पिछले 45 साल के अधिक वक्त से सर्विस में बना हुआ है. जब जब दुश्मनों ने इसकी धार को कम आंका है, तब-तब इसने उनको गहरे जख्म दिए हैं. इसका काम दुश्मन की जमीन पर बम गिराना , टारगेट पर सर्जिकल स्ट्राइक करना और युद्ध में सैनिकों को सपोर्ट करना होता है. इसको मूल रूप से फ्रांस और ब्रिटेन न मिलकर बनाया था. भारत ने साल 1979 में इसे अपने बेड़े में शामिल किया था.
कब से कब तक बना और अपडेट
जगुआर फाइटर जेट को सेपेकैट जगुआर के नाम से भी बुलाया जाता है. पहले तो फ्रांस और ब्रिटिश सेना इसका इस्तेमाल करती थीं. यह भारतीय वायुसेना में 40 साल से भी ज्यादा वक्त से सेवाएं दे रहा है. 1968 से 1981 तक दुनिया में कुल 573 जगुआर फाइटर जेट बनाए गए थे. इसको समय-समय पर अपडेट किया गया है. जैसे विमान में ‘DARIN-III’ जैसे लेटेस्ट नेविगेशन और अटैक सिस्टम लगे हुए हैं, नाइट विजन और एडवांस रडार तकनीक के साथ मिलकर आज भी यह दुश्मनों के लिए खतरनाक है. भले ही आज इसकी खूब एडवांस फाइटर जेट जैसी नहीं है, लेकिन फिर भी यह अपनी भूमिका निभा रहा है.
कहां-कहां रह इसका दबदबा
भारत-पाकिस्तान के बीच 1999 में हुए कारगिल युद्ध में जब भारतीय सेना पहाड़ियों पर घुसे आतंकियों और पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया था. उस वक्त वायुसेना का मिशन सफेद सागर अहम भूमिका में सामने आया था. इसी मिशन में कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर दुश्मनों के बंकर को जगुआर ने ही निशाना बनाया था. लेजर गाइडेड बमों की बदौलत इस विमान ने दुश्मन को तहस नहस कर दिया था. जगुआर का इस्तेमाल 1987 और 1990 के बीच श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के समर्थन में टोही मिशनों को अंजाम देने के लिए भी किया गया था.
भारत के पास कितने जेट, काम और कीमत
भारतीय वायुसेना के पास 160 जगुआर विमान हैं, जिसमें से 30 ट्रेनिंग के लिए हैं. इनका मेन काम अटैक करना होता है. भारत में इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड कंपनी बनाती है. इस विमान के कई सारे वैरिएंट्स हैं. इनमें से किसी को एक पायलट उड़ाता है तो किसी को दो पायलट उड़ाते हैं. यह अधिकतम 46 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इसकी खासियत यह है कि ये 600 मीटर के छोटे रनवे पर भी टेकऑफ या लैंडिंग कर सकता है. इसकी कीमत 150 से 190 करोड़ के आसपास हो सकती है.
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Source: IOCL























