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युद्ध में अब तक कितना पैसा फूंक चुका अमेरिका, जानिए अब कैसे करेगा इसकी भरपाई?

ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका ने अब तक अरबों डॉलर फूंक दिए हैं. प्रतिदिन बढ़ते इस भारी खर्च को कवर करने के लिए अमेरिका अब रिकॉर्ड रक्षा बजट और अतिरिक्त फंड्स की ओर देख रहा है. इसकी भरपाई कैसे होगी.

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  • ईरान संघर्ष ने अमेरिका को 2 से 4 लाख करोड़ रुपये तक का महंगा पड़ा.
  • रोज़ाना 1 अरब डॉलर के करीब खर्च, हथियारों पर भारी व्यय हो रहा.
  • व्हाइट हाउस ने युद्ध खर्च के लिए कांग्रेस से 200 अरब डॉलर मांगे.
  • जनता की जेब पर असर, कर वृद्धि और सामाजिक कार्यक्रमों में कटौती संभव.

वैश्विक पटल पर छिड़ी जंग की आग केवल सीमाओं को ही नहीं जला रही, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के खजाने को भी तेजी से खाली कर रही है. ईरान के साथ जारी इस भीषण संघर्ष ने वाशिंगटन की आर्थिक चिंताओं को कई गुना बढ़ा दिया है. हर बीतता दिन अमेरिका के लिए अरबों डॉलर का आर्थिक बोझ लेकर आ रहा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर अमेरिका इस युद्ध में अब तक कितनी बड़ी रकम खर्च कर चुका है और इस भारी-भरकम आर्थिक नुकसान की भरपाई वह किस तरह करने की योजना बना रहा है? चलिए जानें.

अमेरिका ने कितने अरब डॉलर का किया खर्चा?

अप्रैल 2026 तक ईरान के साथ चल रहे इस संघर्ष ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चुनौती पेश कर दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अब तक 25 बिलियन डॉलर से लेकर 51 बिलियन डॉलर (करीब 2 से 4 लाख करोड़ रुपये) से अधिक की राशि इस युद्ध में झोंक चुका है. यह आंकड़े इस बात पर आधारित हैं कि पेंटागन अपने रक्षा उपकरणों, तैनाती और लॉजिस्टिक्स के खर्च को किस प्रकार दर्ज करता है. यह युद्ध इतना महंगा साबित हो रहा है कि प्रतिदिन का औसत खर्च लगभग 1 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है.

कहां-कहां खर्च हो रहा है अमेरिकी खजाना?

इस युद्ध के खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा आधुनिक हथियारों और सैन्य अभियानों में जा रहा है. आंकड़ों के अनुसार, टॉमहॉक जैसी घातक मिसाइलों और गोला-बारूद की खरीद में रोजाना करीब 320 मिलियन डॉलर खर्च हो रहे हैं. इसके अलावा, आसमान में गश्त लगाने वाले विमानों और हवाई अभियानों पर हर दिन लगभग 245 मिलियन डॉलर का खर्च आ रहा है. नौसैनिक अभियानों और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा पर भी भारी मात्रा में संसाधन लगाए जा रहे हैं, जो इस युद्ध को और भी अधिक खर्चीला बना रहे हैं.

यह भी पढ़ें: War Economy: 100 साल से लगातार जंग जैसे हालात से जूझ रहे ये देश, जानें युद्ध के लिए कहां से जुटाते हैं पैसा?

कांग्रेस से अतिरिक्त फंड की गुहार

ट्रंप प्रशासन ने 1.5 ट्रिलियन डॉलर का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट प्रस्तावित किया है. केवल प्रस्तावित रक्षा बजट ही काफी नहीं है, इसलिए पेंटागन ने कांग्रेस के सामने हाथ फैलाए हैं. वाइट हाउस ने कांग्रेस से 200 बिलियन डॉलर से अधिक का अतिरिक्त फंड मांगा है, ताकि तत्काल युद्ध के खर्चों को कवर किया जा सके. इस फंड की मंजूरी को लेकर अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस छिड़ी हुई है. एक तरफ युद्ध की अनिवार्यता है, तो दूसरी तरफ देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता कर्ज का बोझ, जिससे निपटने के लिए कांग्रेस को एक बहुत ही कड़ा फैसला लेना होगा.

कैसे होगी इस खर्चे की भरपाई?

अमेरिका अपने इस युद्ध के खर्च को पूरा करने के लिए केवल टैक्स या बजट पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह कूटनीतिक हथकंडे भी अपना रहा है. एक विकल्प यह है कि ईरान की उन संपत्तियों का उपयोग किया जाए जो अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के तहत जब्त कर रखी हैं. इन जमी हुई संपत्तियों को युद्ध के हर्जाने के रूप में इस्तेमाल करना एक बड़ा कूटनीतिक कदम होगा. यदि यह होता है, तो इससे ईरान पर दबाव और बढ़ेगा, लेकिन साथ ही वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी हलचल तेज हो जाएगी.

जनता की जेब पर पड़ सकता है असर

युद्ध का सीधा असर अंततः आम अमेरिकी नागरिक पर पड़ने की संभावना है. सरकारी खर्चों के प्रबंधन के लिए वाइट हाउस घरेलू सामाजिक कार्यक्रमों में कटौती कर सकता है, जिससे जनता में नाराजगी बढ़ सकती है. इसके अलावा, संभावित कर वृद्धि के माध्यम से भी धन जुटाने पर चर्चा चल रही है. युद्ध का यह आर्थिक चक्र अब इतना गहरा हो चुका है कि इससे निकलने के लिए अमेरिका को अपने घरेलू विकास और सैन्य महत्वाकांक्षाओं के बीच एक कठिन संतुलन बनाना पड़ेगा, जिसके परिणाम आने वाले कई वर्षों तक दिखाई देंगे.

यह भी पढ़ें: इस्लामाबाद आ रहे यूएस-ईरान के डेलिगेशन को खाने में क्या परोसा जाएगा, कैसे तय होता है मेन्यू?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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