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ईरान की न्यूक्लियर साइट को तबाह करना क्यों नहीं है आसान, जानें कितनी गहराई में बनाया है इसका बेस

ईरान और इजरायल के बीच चल रहा जंग दुनिया के लिए सरदर्द बनता जा रहा है. चलिए, आपको बताते हैं कि इतनी कोशिश के बावजूद ईरान के न्यूक्लियर प्लांट को इजरायल क्यों खत्म नहीं कर पा रहा है.

इजरायल इस समय पूरी ताकत के साथ जुटा हुआ है कि, किसी भी तरह से ईरान के न्यूक्लियर साइट्स को तबाह कर दिया जाए. इसके लिए बीते 13 जून से उसने ईरान के साथ एक तरह से जंग छेड़ रखा है. दोनों देश एक दूसरे के शहरों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला कर रहे हैं.अभी तक इस जंग में इजरायल का पलड़ा भारी नजर आ रहा है, क्योंकि उसने ईरान के अंदर जाकर उनके न्यूक्लियर साइट्स, बम बनाने वाले साइंटिस्ट और सैन्य ठिकानों को हिट किया है.

इतना सब करने के बावजूद, इजरायल के लिए ईरान के परमाणु साइट्स को खत्म करना इतना भी आसान नहीं है, क्योंकि जिस पहाड़ों की श्रृंखला के बीच ईरान का न्यूक्लियर साइट्स फोर्डो फ्यूल एनरिचमेंट प्लांट स्थित है, वहां तक पहुंच कर भी इजरायल उसको नुकसान नहीं पहुंचा पा रहा है. चलिए, आपको बताते हैं कि आखिर इन पहाड़ों में ऐसा क्या है कि इजरायल के बम और मिसाइल इनके बीच बने न्यूक्लियर साइट्स को हिट नहीं कर पा रहे हैं.  

क्या खास है इन पहाडों में

खूबसूरत वादियों, हरे-भरे पेड़ों और बड़े-बड़े चट्टानों के बीच बना ईरान का फोर्डो फ्यूल एनरिचमेंट न्यूक्लियर प्लांट उसके सबसे सीक्रेट और सुरक्षित परमाणु प्लांट में से एक है. यह इतना सीक्रेट है कि,  यहां तक पहुंचना दुश्मनों के लिए लगभग असंभव है. इसको चट्टानों के भीतर 300 फीट मोटी सतह के नीचे बनाया गया है, जहां इजरायल के मिसाइल भी इसको हिट नहीं कर पा रहे हैं. इजरायल ने ऑपरेशन राइजिंग लॉयन के तहत ईरान के नतांज और  फोर्डो फ्यूल एनरिचमेंट न्यूक्लियर प्लांट पर मिसाइलों से हमला किया था. एक तरफ जहां नतांज साइट्स को तगड़ा नुकसान हुआ है, वहां 15000 सेंट्रीफ्यूज नष्ट हो गए तो दूसरी तरफ फोर्डो फ्यूल एनरिचमेंट प्लांट को बहुत मामूली सा नुकसान हुआ है. 

कितना अभेद्य है यह साइट 

बिना इस न्यूक्लियर साइट को खत्म किए इजरायल का ईरान को परमाणु शक्ति विहीन बनाने का सपना पूरा नहीं होने वाला है. ईरान के धार्मिक शहर कोम के पास स्थित यह सीक्रेट न्यूक्लियर साइट पहली बार साल 2009 में सार्वजनिक तौर पर लोगों के सामने आया था, जब पश्चिमी खुफिया एजेंसियों ने इसके बारे में खुलासा किया. इसकी भौगोलिक स्थिति इस साइट को प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों तरीकों से सुरक्षा प्रदान करती है. इसको हवा में मिसाइल मारकर खत्म करना लगभग असंभव है. 

क्या इसको नहीं खत्म किया जा सकता

बिना इसको खत्म किए इजरायल पूरी तरह शांत नहीं होने वाला है, अगर प्लांट बचा रहा तो उसके ऊपर खतरा बना रहेगा. लेकिन इजरायल के पास अभी इतनी ताकत नहीं है कि इस प्लांट को खत्म कर सके. इसको खत्म करने की ताकत सिर्फ अमेरिका के पास ही है. अमेरिका अभी तक युद्ध के मैदान में उतरा नहीं है. अगर अमेरिका की एंट्री होती है तो उसका पहला निशाना यही न्यूक्लियर प्लांट होगा. उसके पास गहरे बंकरों को भी तोड़ने वाले बम हैं, जिसे मैसिव ऑर्डनेंस पेन्नट्रेटर के नाम से जानते हैं. अमेरिका इसे GBU-57 कहता है. इसकी मदद से अमेरिका इस सुरक्षित और सीक्रेट न्यूक्लियर प्लांट को उड़ा सकता है. 

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