ईरान जंग में कितने अमेरिकी विमान हुए तबाह, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में US को अब तक कितना हो चुका नुकसान?
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के दौरान अमेरिकी वायुसेना को हुए भारी नुकसान का आधिकारिक डेटा सामने आ गया है. आइए जानें कि आखिर इस जंग में अमेरिका के कितने विमान तबाह हुए और उसे कितना नुकसान हुआ.

- इस सैन्य नुकसान से अमेरिकी खजाने को अरबों डॉलर की चपत लगी.
ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ा ऑपरेशन एपिक फ्यूरी अमेरिकी वायुसेना के लिए किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हो रहा है. पेंटागन की हालिया रिपोर्ट ने उन दावों की पोल खोल दी है, जिनमें अमेरिकी सैन्य शक्ति को अभेद्य बताया जा रहा था. इस जंग में न केवल अरबों डॉलर के आधुनिक विमान खाक हुए हैं, बल्कि ईरान की रक्षा प्रणाली ने अमेरिका के सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमानों का गुरूर भी तोड़ दिया है. युद्ध के मैदान से आई यह आधिकारिक सूची बताती है कि आधुनिक तकनीक भी ईरानी मिसाइलों के सामने बेबस नजर आ रही है.
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में अमेरिका का कितना नुकसान?
28 फरवरी से शुरू हुए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' ने अमेरिकी खजाने और वायुसेना को गहरा जख्म दिया है. पेंटागन के आंकड़ों के मुताबिक, महज एक महीने से थोड़े ज्यादा समय में अमेरिका ने अपने दर्जनों अत्याधुनिक विमान गंवा दिए हैं. इस युद्ध में ईरान की 'सैम' (SAM) मिसाइल प्रणाली काल बनकर उभरी है, जिसने अमेरिका के उन विमानों को भी निशाना बनाया जिन्हें अदृश्य माना जाता था. यह नुकसान इतना बड़ा है कि इसकी भरपाई करने में अमेरिका को सालों लग सकते हैं.
सबसे महंगे F-35 फाइटर जेट पर हमला
अमेरिका का सबसे आधुनिक और दुनिया का सबसे महंगा लड़ाकू विमान F-35 लाइटनिंग II भी इस जंग की आग से बच नहीं पाया है. एक यूनिट जिसकी कीमत लगभग 110 मिलियन डॉलर है, उसे ईरानी मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने न केवल ट्रैक किया बल्कि उसे भारी नुकसान भी पहुंचाया. हालांकि यह विमान पूरी तरह तबाह होने से बच गया, लेकिन इसके क्षतिग्रस्त होने ने अमेरिका की रातों की नींद उड़ा दी है. यह हमला साबित करता है कि ईरान के पास अब स्टील्थ तकनीक को भेदने की क्षमता आ चुकी है.
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आसमान से गिरे चार F-15E स्ट्राइक ईगल
अमेरिकी हवाई हमलों की रीढ़ माने जाने वाले F-15E स्ट्राइक ईगल विमानों को इस जंग में सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ी है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल चार F-15E विमान तबाह हुए हैं. इनमें से तीन विमान कुवैत के ऊपर उड़ान भरते समय मार गिराए गए, जबकि एक विमान को ईरान की सीमा के भीतर ढेर कर दिया गया. एक विमान की कीमत 90 मिलियन डॉलर होने के नाते, सिर्फ इस बेड़े के नुकसान से ही अमेरिका को करीब 360 मिलियन डॉलर की चपत लगी है.
ऐतिहासिक E-3 संतरी अवाक्स की तबाही
इस युद्ध की सबसे बड़ी क्षति E-3 संतरी अवाक्स (AWACS) विमान का विनाश है. यह विमान हवा में उड़ता हुआ एक रडार स्टेशन और कमांड सेंटर होता है. 1998 में इसकी कीमत 270 मिलियन डॉलर थी, जो आज की तारीख में लगभग 700 मिलियन डॉलर (करीब 5800 करोड़ रुपये) आंकी गई है. इसे PSAB (प्रिंस सुल्तान एयर बेस) पर नष्ट कर दिया गया. एक ही झटके में इतने महंगे और महत्वपूर्ण विमान का जाना अमेरिकी सेना की रणनीतिक योजना के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है.
ईरान की मिसाइलों का शिकार बना थंडरबोल्ट
कम ऊंचाई पर उड़कर टैंकों को तबाह करने वाला A-10 थंडरबोल्ट II भी ईरानी मिसाइलों का शिकार बना है. लगभग 18.8 मिलियन डॉलर की कीमत वाला एक थंडरबोल्ट विमान ईरानी 'सैम' मिसाइल द्वारा मार गिराया गया. यह विमान अपनी मजबूती के लिए मशहूर है, लेकिन आधुनिक ईरानी रक्षा प्रणाली के सामने इसका कवच भी काम नहीं आया. जमीनी हमलों में अमेरिका की यह क्षति उसकी भविष्य की रणनीति को कमजोर कर सकती है.
टैंकर विमानों और हेलीकॉप्टरों की भी हुई दुर्गति
जंग में सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि रसद पहुंचाने वाले विमान भी निशाने पर रहे. अमेरिका के दो KC-135 टैंकर विमान पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि पांच अन्य विमानों को भारी नुकसान पहुंचा है. एक टैंकर की कीमत 40 मिलियन डॉलर है. इसके अलावा, इराक में एक HH-60M हेलीकॉप्टर नष्ट हो गया और दो अन्य हेलीकॉप्टर ईरान के ऊपर क्षतिग्रस्त हुए. हेलीकॉप्टर बेड़े में हुई यह क्षति रेस्क्यू ऑपरेशनों को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है.
रीपर ड्रोन्स का सामूहिक कब्रिस्तान बना ईरान
तकनीकी रूप से सबसे चौकाने वाला आंकड़ा ड्रोन्स का है. अमेरिका के 17 'MQ-9 रीपर' यूसीएवी (UCAV) यानी शिकारी ड्रोन इस दौरान तबाह कर दिए गए हैं. एक रीपर ड्रोन की कीमत करीब 30 मिलियन डॉलर है. 17 ड्रोन्स का मतलब है कि अमेरिका ने करीब 510 मिलियन डॉलर सिर्फ ड्रोन के मलबे में गंवा दिए हैं. ईरान ने इन ड्रोन्स को इतनी बड़ी संख्या में गिराकर यह संदेश दिया है कि ड्रोन तकनीक अब उसके लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं रह गई है.
अमेरिका को हुआ कितना नुकसान?
अगर इस पूरे नुकसान को जोड़ दिया जाए, तो यह राशि अरबों डॉलर यानी खरबों रुपये में पहुंचती है. ट्रंप प्रशासन की आक्रामक ईरान नीति का नतीजा यह हुआ है कि अमेरिकी सैन्य इतिहास में विमानों के नुकसान का यह सबसे महंगा आंकड़ा बन गया है. बिना किसी ठोस जमीन जीत के इतने बड़े पैमाने पर विमानों और तकनीक का नुकसान होना अमेरिका के भीतर भी विरोध का कारण बन सकता है. 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अब जीत से ज्यादा नुकसान की कहानी बयां कर रहा है.
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