अपनी एयरलाइन कंपनी खोलने पर कितना होगा खर्चा, लाइसेंस से लेकर प्लेन तक... जानें पूरी डिटेल
एविएशन सेक्टर दुनिया के सबसे महंगे बिजनेस में से एक माना जाता है. इसमें विमान खरीदने या लीज पर लेने से लेकर स्टाफ की नियुक्ति और डीजीसीए के नियम हर स्तर पर बड़े खर्च की जरूरत पड़ती है.

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो लगातार ऑपरेशनल संकट से जूझ रही है. कल यानी 5 दिसंबर को इंडिगो की लगभग 1000 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल होने से देश के ज्यादातर एयरपोर्ट पर हड़कंप मच गया था. वहीं पिछले चार दिनों में 1700 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल हो चुकी हैं. माना जा रहा है कि आने वाले कुछ समय तक भी यह परेशानी बनी रह सकती है. वहीं कंपनी के अनुसार, आज यानी 6 दिसंबर को भी इंडिगो की लगभग 1000 फ्लाइट्स कैंसिल हो सकती है. इंडिगो में स्टाफ की कमी और तकनीकी मैनेजमेंट के चलते दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, इंदौर, कोच्चि और तिरुवनंतपुरम जैसे बड़े शहरों में सैकड़ों यात्री फंसे हुए हैं.
इंडिगो के इस संकट के बीच कई लोगों का यह भी सवाल उठ रहा है कि अगर कोई अपनी एयरलाइन कंपनी खोलता है तो इस पर कितना खर्च आएगा और इसके लाइसेंस को लेकर क्या प्रक्रियाएं होती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अपनी एयरलाइन कंपनी खोलने से लेकर प्लेन के लाइसेंस तक कितना खर्च आता है और इसकी क्या प्रक्रिया होती है.
भारत में एयरलाइन शुरू करने में कितना आता है खर्च?
एविएशन सेक्टर दुनिया के सबसे महंगे बिजनेस में से एक माना जाता है. इसमें विमान खरीदने या लीज पर लेने से लेकर स्टाफ की नियुक्ति, टेक्निकल टीम, ग्राउंड सेटअप, एयरपोर्ट स्लॉट, मेंटेनेंस, फ्यूल कॉस्ट और डीजीसीए के नियम हर स्तर पर बड़े खर्च की जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि एयरलाइन शुरू करने के लिए शुरुआती निवेश काफी बड़ा होता है और यह कम केवल वित्तीय रूप से सक्षम कंपनियां ही कर पाती है. भारत का एविएशन सेक्टर भी दुनिया का 9वां सबसे बड़ा बिजनेस है और सालाना जीडीपी में 18.32 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा योगदान देता है. वहीं एविएशन कंपनी शुरू करने के लिए करोड़ों रुपये के निवेश की जरूरत पड़ती है.
एविएशन सेक्टर में क्या होती है लाइसेंस की प्रक्रिया?
भारत में एयरलाइन शुरू करने के लिए डीजीसीए से कई जरूरी परमिशन लेनी पड़ती है. इसमें एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट, सिक्योरिटी क्लीयरेंस, पायलट और तकनीकी स्टाफ की योग्यता जांच और सेफ्टी ऑडिट जैसी प्रक्रिया शामिल होती है. यह पूरा प्रोसेस कई चरणों में चलता है और नियमों के अनुसार, सभी तकनीकी मांगों को पूरा करना पड़ता है. इस पूरे प्रोसेस में लगभग 18 महीनाें से 3 साल तक का समय लग सकता है. वहीं लाइसेंस मिलने के बाद भी एयरलाइन को लगातार सुरक्षा और सेवा को बनाए रखना होता है.
विमान लेने में कितना आता है खर्च?
किसी भी एयरलाइन कंपनी को शुरू करने के लिए एयरलाइन का सबसे बड़ा खर्चा उसके विमान ही होते हैं. दुनिया की ज्यादातर कंपनियां शुरुआत में विमान खरीदने के बजाय उन्हें लीज पर लेती है. क्योंकि एक प्लेन की कीमत कई सौ करोड़ रुपये तक जा सकती है. वहीं लीज पर प्लेन लेने पर भी हर महीने भारी रकम चुकानी पड़ती है. साथ ही मेंटेनेंस, इंश्योरेंस और टेक्निकल सपोर्ट जैसे खर्चे भी अलग होते हैं. वहीं भारत में एक एयरलाइन शुरू करने के लिए कम से कम 500 से 1500 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि यह आंकड़ा एयरलाइन के आकार, रूट, फ्लीट और बिजनेस मॉडल के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.
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Source: IOCL




























