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Richest Temple: देश के किस मंदिर में आता है सबसे ज्यादा चढ़ावा, राम मंदिर विवाद के बीच जानिए कमाई?

Richest Temple: इन दिनों राम मंदिर के चढ़ावे में हुई घपलेबाजी को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है. चलिए इसी क्रम में आज हम आपको उन मंदिरों के बारे में बताते हैं, जहां हर साल अरबों का चढ़ावा आता है.

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  • अयोध्या चोरी ने बड़े मंदिरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए.
  • देश के पद्मनाभस्वामी, तिरुपति मंदिरों के पास अकूत संपत्ति है.
  • शिरडी, वैष्णो देवी, स्वर्ण मंदिर भी अरबों का चढ़ावा पाते हैं.

रामलला की पावन नगरी अयोध्या में दान पात्र से हुई चोरी की हालिया खबर ने एक तरफ जहां प्रशासनिक चौकसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ इसने करोड़ों सनातनियों की चिंता को भी काफी बढ़ा दिया है. लोग अब गहराई से यह सोच रहे हैं कि जब नए नवेले और बेहद सुरक्षित माने जाने वाले भव्य राम मंदिर परिसर में ऐसी सुरक्षा चूक की घटना हो सकती है, तो देश के उन अत्यंत प्राचीन और विशालकाय देवस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था कैसी होगी जो अपनी अकूत संपत्ति और भारी-भरकम चढ़ावे के लिए पूरी दुनिया भर में मशहूर हैं.

सबसे अमीर श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया के सबसे अमीर धार्मिक स्थलों में शीर्ष स्थान पर गिना जाता है. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जब इसके बेहद सुरक्षित और गुप्त तहखानों को खोला गया था, तब वहां से निकले बेशुमार सोने, असली हीरे और प्राचीन कीमती सिक्कों ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था. इसके केवल 'ए' तहखाने से ही 1,25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की विशाल संपत्ति का खुलासा हुआ था, जबकि इसका 'बी' तहखाना आज भी एक रहस्यमयी लोककथा की तरह पूरी तरह बंद है.

अदालत की सख्त निगरानी

इस मंदिर के वित्तीय प्रशासन और भारी-भरकम ऑडिट की पूरी जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद पूरी तरह से अदालत द्वारा गठित विशेष समितियों के पास है. ये समितियां समय-समय पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय को अपनी विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट सौंपती हैं. इस मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी है ताकि इसके भीतर मौजूद अरबों रुपये के इस ऐतिहासिक और पौराणिक खजाने को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके.

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तिरुपति बालाजी मंदिर

यदि बात हर दिन और हर साल मिलने वाले नकद चढ़ावे की हो, तो आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर यानी तिरुमला तिरुपति देवस्थानम का पूरी दुनिया में कोई सानी नहीं है. साल 2026 के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों में इस मंदिर की फिक्स डिपॉजिट ही 18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की हो चुकी है. मंदिर को केवल श्रद्धालुओं द्वारा हुंडी में डाले गए नकद पैसे और ऑनलाइन माध्यम से ही हर साल 1,200 करोड़ रुपये से लेकर 1,400 करोड़ रुपये का भारी शुद्ध दान प्राप्त होता है.

प्रसाद से होती बड़ी आय

इसके अलावा तिरुपति मंदिर के पास कुल 3.3 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक की विशाल संपत्ति होने का अनुमान है. यहां आने वाले भक्तों के बीच प्रसिद्ध लड्डू प्रसादम की विशाल बिक्री भी हर साल करोड़ों रुपये का भारी राजस्व पैदा करती है. तिरुमला तिरुपति देवस्थानम एक सरकारी ट्रस्ट है और इसके सभी आधिकारिक प्रशासनिक फैसलों, बोर्ड के प्रस्तावों और कुल संपत्ति की घोषणाओं को सीधे इसकी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से देखा जा सकता है.

शिरडी साईं बाबा मंदिर

सबका मालिक एक का पावन संदेश देने वाले साईं बाबा के दरबार यानी शिरडी साईं बाबा मंदिर में अमीर से लेकर गरीब तक अपनी झोली फैलाकर आते हैं. महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित इस मंदिर की कुल नेटवर्थ करीब 2,000 करोड़ रुपये से अधिक है. इस मंदिर के बैंक खातों में मौजूद अरबों रुपये की नकदी के अलावा लगभग 380 किलो शुद्ध सोना और 4,400 किलो से अधिक कीमती चांदी जमा है.

जनकल्याण में खर्च होता धन

खास बात यह है कि शिरडी साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट में आने वाले इस विशाल दान का एक बहुत बड़ा हिस्सा मुफ्त अस्पतालों, अनाथालयों और देश के सबसे बड़े कम्युनिटी किचन को चलाने में सीधे खर्च किया जाता है. यह ट्रस्ट पूरी तरह से महाराष्ट्र सरकार द्वारा विनियमित है, जो इसके प्रबंधन बोर्ड की नियुक्ति करती है और इसके वित्तीय विवरण को राज्य विधानमंडल के सामने पेश करना अनिवार्य होता है.

माता वैष्णो देवी के दरबार

जम्मू-कश्मीर के कटरा में त्रिकुटा पहाड़ियों की गुफा में विराजमान माता वैष्णो देवी के दरबार में हर साल करीब 1 करोड़ श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं. श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के तहत संचालित इस प्रसिद्ध मंदिर का सालाना राजस्व 500 करोड़ रुपये से अधिक का है. इसके साथ ही माता के इस पावन मंदिर के पास वर्तमान में 1.2 टन से अधिक सोने का एक विशाल भंडार मौजूद है.

यात्रियों की सुरक्षा पर खर्च

चढ़ावे से होने वाली इस भारी-भरकम कमाई को श्राइन बोर्ड द्वारा यात्रियों की सुरक्षा, चमचमाती पहाड़ी सड़कों, आधुनिक रोप-वे और मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं को विकसित करने पर खर्च किया जाता है. यह बोर्ड जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल की अध्यक्षता में एक विशेष राज्य अधिनियम के तहत काम करता है, जिसके आधिकारिक पोर्टल पर श्रद्धालुओं की संख्या और वित्तीय सुविधाओं के सारे आंकड़े उपलब्ध रहते हैं.

स्वर्ण मंदिर की अनूठी सेवा

सिख धर्म का सबसे पवित्र केंद्र माना जाने वाला अमृतसर का स्वर्ण मंदिर अपनी अद्वितीय भव्यता और निस्वार्थ मानवीय सेवा के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. इस ऐतिहासिक मंदिर के मुख्य गुंबद और इसकी दीवारों पर 750 किलो से लेकर 1500 किलो तक शुद्ध सोना मढ़ा हुआ है. स्वर्ण मंदिर की वार्षिक आय लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक है और इसका सालाना बजट 1,000 करोड़ रुपये के पार रहता है.

लाखों लोगों को मुफ्त भोजन

इस पवित्र स्थान की सबसे बड़ी खूबी यहां का विशाल 'लंगर' है, जहां बिना किसी भी धार्मिक या सामाजिक भेदभाव के रोजाना 1 लाख से अधिक लोगों को पूरी तरह मुफ्त और शुद्ध भोजन कराया जाता है. राम मंदिर में हुई सुरक्षा चूक के बाद देश के इन सभी अमीर और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके वित्तीय प्रशासन पर लोगों का ध्यान एक बार फिर बहुत तेजी से गया है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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