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कोविड से मौत पर देश के किस राज्य ने बोला सबसे ज्यादा झूठ, जानें हकीकत में कितने लोगों ने गंवाई जान?

2021 में कोरोना के दौरान देशभर में 3,32,468 मौत का आंकड़ा पेश किया गया था, लेकिन सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि देशभर में 19,73,947 मौतें हुई थीं.  

Covid-19 Death Toll in India: भारत में कोरोना महामारी के दौरान मौतों के आंकड़ों को लेकर बड़ा खेल किया गया था. सामने आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश के सभी राज्यों में कोरोना महामारी से जुड़े आंकड़े छिपाए गए थे और इस दौरान होने वाली मौतों की संख्या को कम करके पेश किया गया था. कोरोना की दूसरी लहर यानी 2021 में पूरे देश में 3,32,468 मौत के आंकड़े पेश किए गए थे, लेकिन सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) की ओर से जारी रिपोर्ट चौंकाने वाली है. आंकड़ों के अनुसार, 2021 में करीब 6 गुना अधिक मौतें हुई थीं, इस दौरान देशभर में 19,73,947 मौतें हुई थीं.  

इस रिपोर्ट से पता चलता है कि देश के हर राज्य में कोरोना के दौरान होने वाली मौतों की संख्या को कम करके पेश किया गया था. मौत के आंकड़े छिपाने में  गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य शामिल हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं कि कोरोना से हुई मौतों पर देश के किस राज्य में सबसे झूठे और गलत आंकड़े पेश किए गए थे. 

मौत के आंकड़े छिपाने में गुजरात सबसे आगे

सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) की ओर से पेश आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़े छिपाने में गुजरात सबसे आगे था. गुजरात ने इस साल गुजरात में करीब 6 हजार मौतों का आंकड़ा पेश किया था, लेकिन असल में 33.6 गुना ज्यादा मौतें दर्ज की गई थीं. गुजरात सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में 5809 मौतें दर्ज की गई थीं, लेकिन अब जो रिपोर्ट सामने आई है, उसमें कहा गया है कि 2021 में गुजरात में 1,95,406 मौतें हुई थीं. 

इन राज्यों में भी छिपाए गए आंकड़े

कोविड के दौरान मौत के आंकड़े छिपाने में सिर्फ गुजरात ही नहीं बल्कि कई राज्य आगे रहे. गुजरात के बाद इस मामले में मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर रहा. मध्य प्रदेश में 6927 मौतों का आंकड़ा पेश किया गया था, जबकि असल में यहां पर 1,26,774 मौतें हुई थीं. इसी तरह पश्चिम बंगाल में 10,052 मौतों का आंकड़ा सामने आया था, जबकि यहां 1,52,094 मौतें दर्ज की गईं. बिहार में भी 10,699 मौत होने का दावा किया गया था, लेकिन यहां 1,35,391 मौतें हुई थीं. उत्तर प्रदेश में 14,563 मौत होने का दावा किया गया था, लेकिन यहां 1,03,108 मौतें हुई थीं. 

यह भी पढ़ें: 2021 में 20 लाख मौतें छिपा गया सिस्टम? सरकार के आंकड़ों से खुली सच्चाई, डरा देगी ये रिपोर्ट

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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