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जंग के दौरान कैसे काम करते हैं स्लीपर सेल, दुश्मन देश को कैसे पहुंचाते हैं नुकसान?

हो सकता है कि स्लीपर सेल आपके आसपास ही हों, जैसे- कोई स्टूडेंट, जॉब वर्कर, मजदूर या रेहड़ी-पटरी वाले के रूप में. ये दुश्मन देश में आम नागरिक बनकर छिपे रहते हैं और हैंडलर के आदेश का इंतजार करते हैं.

भारत और पाकिस्तान के बीच जंग के आसार साफ नजर आ रहे हैं. दोनों देशों की सीमाओं पर सैन्य संघर्ष बढ़ता जा रहा है, ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कोई भी देश कभी भी जंग का ऐलान कर सकता है. अगर ऐसा होता है तो सरकार के साथ-साथ सेना के जवानों और यहां तक कि आम नागरिकों के लिए काफी मुश्किल खड़ी हो जाएगी. दरअसल, जब भी कोई देश सीमा पर युद्ध लड़ रहा होता है तो उसकी सबसे बड़ी चुनौती देश के अंदरूनी हालातों को सामान्य बनाए रखना होता है. 

युद्ध जैसी स्थिति में कई आतंकी संगठन भी हमले की फिराक में होते हैं और अपने स्पीलर सेल को एक्टिव कर देते हैं. पाकिस्तान के केस में इसकी संभावना इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि पाकिस्तान कई आतंकी संगठनों को सपोर्ट करता रहा है. ऐसे में भारत को दो मोर्चों पर जंग लड़नी होगी, एक बॉर्डर पर, दूसरी देश के अंदर आतंकियों के स्लीपर सेल से. ऐसे में चलिए जानते हैं कि ये स्लीपर सेल क्या होते हैं? ये कैसे काम करते हैं? जंग के दौरान ये दुश्मन देश को कैसे नुकसान पहुंचा सकते हैं? 

क्या होते हैं स्लीपर सेल?

आपने कई फिल्मों या समाचारों में देखा होगा कि देश के अंदर कई आतंकी घटनाओं में स्लीपर सेल्स का बड़ा हाथ होता है. ये स्लीपर सेल किसी भी देश के अंदर बम ब्लास्ट, हाईजैक, गोलीबारी करने के लिए ट्रेंड होते हैं. जैश-ए-मुहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, टीआरएफ, सिमी जैसे आतंकी संगठन इन स्लीपर सेल की भर्ती करते हैं और इन्हें आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए दुश्मन देश में डिपोर्ट कर देते हैं. किसी भी देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए आतंकियों से ज्यादा घातक देश में ही छिपे स्लीपर सेल होते हैं, जो गुपचुप तरीके से अपने काम को अंजाम दे रहे होते हैं. 

कैसे काम करते हैं स्लीपर सेल

दुनियाभर के कई आतंकी संगठन अपने दुश्मन देश में बड़ी संख्या में स्लीपर सेल को डिपोर्ट करते हैं. ये स्लीपर सेल एक आम इंसान बनकर नागरिकों के बीच रहते हैं. हो सकता है कि ये आपके आसपास ही रह रहे हों, जैसे- कोई स्टूडेंट, जॉब वर्कर, मजदूर या फिर रेहड़ी-पटरी वाले के रूप में. इनका काम दुश्मन देश में आम नागरिक बनकर छिपे रहना होता है. कई बार स्लीपर सेल छह महीने, एक साल या इससे भी ज्यादा समय तक दुश्मन देश में रहते हैं और अपने आका(हैंडलर) के आदेश का इंतजार कर रहे होते हैं. हैंडलर से आदेश मिलते ही स्लीपर सेल एक्टिव हो जाते हैं और देश के अंदर आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं. इनका काम दुश्मन देश की सूचनाओं को इकट्ठा करना और उन्हें अपने हैंडलर तक पहुंचाना होता है. कई बार तो स्लीपर सेल को खुद नहीं पता होता कि वे किसके लिए काम कर रहे हैं. ये इतने जज्बाती होते हैं कि अपने हैंडलर का आदेश मिलने पर जान देने से भी नहीं चूकते. 

जंग के दौरान कैसे पहुंचा सकते हैं नुकसान

स्लीपर सेल गुपचुप तरीके से किसी देश में रहना और उसके खिलाफ आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए संसाधन इकट्ठा करना होता है. जंग के दौरान आतंकी संगठन बढ़त हासिल करने के लिए इन्हें एक्टिव कर देते हैं, जिसके बाद ये एक के बाद एक घटनाओं को अंजाम देते हैं. कई बार स्लीपर सेल दुश्मन देश में घुसपैठ करने वाले आतंकियों को छिपाने के लिए घर से लेकर अन्य संसाधन भी मुहैया कराते हैं. ऐसे में जंग के हालात में ये काफी घातक हो सकते हैं.

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प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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