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भारत तो 15 अगस्त को आजाद हुआ, लेकिन इसी दिन दुनिया में घटी थीं ये 5 घटनाएं

Independence Day 2025: 15 अगस्त 1947 को जहां भारत में तिरंगा फहराया जाता है और देशभक्ति का जश्न मनाया जाता है. वहीं विश्व के अन्य हिस्सों में यह दिन आजादी, शोक और ऐतिहासिक बदलावों का दिन रहा है.

15 अगस्त का दिन भारत के लिए बेहद ऐतिहासिक है क्योंकि 1947 में इसी दिन देश ने ब्रिटिश शासन से आजादी हासिल की थी. भारत का राष्ट्रीय ध्वज शान से लाल किले पर फहराया गया. लेकिन यह तारीख न केवल भारत, बल्कि विश्व इतिहास में भी कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए जानी जाती है. चलिए जानते हैं 15 अगस्त को विश्व में घटी ऐसी घटनाओं की जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं. 

15 अगस्त की महत्वपूर्ण घटनाएं

जापान का द्वितीय विश्व युद्ध में आत्मसमर्पण

15 अगस्त 1945 को जापान के सम्राट हिरोहितो ने रेडियो पर घोषणा की कि जापान मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण कर रहा है. यह द्वितीय विश्व युद्ध के समापन की दिशा में एक निर्णायक कदम था. इस घटना को 'विजय-जापान दिवस' के रूप में भी जाना जाता है. इस आत्मसमर्पण ने न केवल युद्ध को समाप्त किया, बल्कि वैश्विक शांति की दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया.

दक्षिण कोरिया की स्थापना 

15 अगस्त 1948 को दक्षिण कोरिया आधिकारिक तौर पर कोरिया गणराज्य के स्थापित हुआ. जापान के 35 साल के शासन से आजादी के बाद एक स्वतंत्र राष्ट्र बना हालांकि कोरिया 1945 में आजाद हुआ था, लेकिन 1948 में इसका दक्षिणी हिस्सा अमेरिकी समर्थन से एक अलग राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ. यह दिन दक्षिण कोरिया में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है.

कांगो की आजादी

15 अगस्त 1960 को कांगो ने फ्रांस के 80 साल के शासन से आजादी हासिल की. इस दिन को कांगो में राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है. यह आजादी अफ्रीकी महाद्वीप में स्वतंत्रता आंदोलनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी, जिसने अन्य देशों को भी प्रेरित किया.

बहरीन की आजादी

15 अगस्त 1971 को बहरीन ने यूनाइटेड किंगडम से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की. यह खाड़ी देशों में तेल की खोज और आर्थिक विकास के लिए भी जाना जाता है.

 बांग्लादेश में राष्ट्रीय शोक दिवस 

15 अगस्त 1975 को बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीब-उर-रहमान और उनके परिवार के आठ सदस्यों की हत्या कर दी गई थी. इस त्रासदी के कारण बांग्लादेश में इस दिन को राष्ट्रीय शोक दिवस के रूप में मनाया जाता है. यह घटना बांग्लादेश के इतिहास में एक दुखद अध्याय है.

इसे भी पढ़ें- 1947 में तिरंगा फहराने से पहले हुई थी 'बच्चों की बारिश', नजारा देख हैरान थी माउंटबेटन की बेटी

About the author नेहा सिंह

नेहा सिंह बीते 6 साल से डिजिटल मीडिया की दुनिया से जुड़ी हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद से ताल्लुक रखती हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद स्थित ईटीवी भारत से साल 2019 में अपने करियर की शुरुआत की. यहां पर दो साल तक बतौर कंटेट एडिटर के पद पर काम किया इस दौरान उन्हें एंकरिंग का भी मौका मिला जिसमें उन्होंने बेहतरीन काम किया.

फिर देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया, यहां प्रतिष्ठित चैनलों में काम कर कलम को धार दी. पहले इंडिया अहेड के साथ जुड़ीं और कंटेंट के साथ-साथ वीडियो सेक्शन में काम किया. 

इसके बाद नेहा ने मेनस्ट्रीम चैनल जी न्यूज में मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के पद पर अपनी सेवाएं दीं. जी न्यूज में रहते हुए नेशनल और इंटरनेशनल मुद्दों पर एक्सप्लेनर वीडियो क्रिएट किए.

इसी बीच प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कुलवृक्ष संस्थान से जुड़कर महाकुंभ भी कवर किया, साधु-संतों का इंटरव्यू किया. लोगों से बातचीत करके उनके कुंभ के अनुभव और समस्याओं को जाना.

वर्तमान में नेहा एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां पर नॉलेज सेक्शन में ऐसी खबरों को एक्सप्लेन करती हैं, जिनके बारे में आम पाठक को रुचि होती है.

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