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दिल्ली जिमखाना क्लब खाली कराने को लेकर केन्द्र का शो काउज नोटिस, 7 जुलाई तक मांगा जवाब

केंद्र सरकार ने क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उसके खिलाफ पब्लिक प्रिमाइसेज (एविक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्यूपेंट्स) एक्ट, 1971 के तहत बेदखली की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए.

देश के सबसे प्रतिष्ठित क्लबों में शामिल दिल्ली जिमखाना क्लब पर अब बेदखली की तलवार लटक रही है. केंद्र सरकार ने क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उसके खिलाफ पब्लिक प्रिमाइसेज (एविक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्यूपेंट्स) एक्ट, 1971 के तहत बेदखली की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए. केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) की ओर से 29 जून को एस्टेट ऑफिसर बिपिन कुमार सिंह ने यह नोटिस जारी किया है. क्लब और उससे जुड़े सभी पक्षों को 7 जुलाई तक जवाब दाखिल करने और उसी दिन दोपहर 2:30 बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने को कहा गया है.

समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने अदालत में कहा है कि दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन की जरूरत रक्षा अवसंरचना (डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर), सार्वजनिक सुरक्षा (पब्लिक सिक्योरिटी) और अन्य जनहित से जुड़ी परियोजनाओं के लिए है. सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हित को देखते हुए इस भूमि का उपयोग आवश्यक है, इसलिए उसे अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है.

केन्द्र का शो काउज नोटिस

समाचार एजेंसी पीटीआई का मुताबिक, मई के महीने में दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई. दिल्ली जिमखाना क्लब ने केंद्र सरकार के कब्जा लेने के फैसले को चुनौती दी है. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकार कानून में तय प्रक्रिया का पालन किए बिना क्लब पर कब्जा नहीं करेगी.

उन्होंने कहा कि यदि क्लब स्वेच्छा से परिसर खाली नहीं करता है, तब भी बेदखली केवल वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही होगी. उन्होंने यह भी कहा कि कानून के तहत मुआवजे का प्रावधान है, जो धनराशि या वैकल्पिक जमीन के रूप में दिया जा सकता है. वहीं, क्लब की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि दिल्ली जिमखाना एक गैर-लाभकारी संस्था है और सरकार ने 5 जून तक क्लब खाली करने का आदेश ऐसे समय दिया, जब इससे जुड़ा मामला पहले से ही राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष लंबित है.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने क्लब की निर्वाचित प्रबंधन समिति को हटाकर अपने नामित सदस्यों की समिति बना दी है, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भी कई अहम टिप्पणियां कीं. अदालत ने पूछा कि क्या सरकार यह रिकॉर्ड पर कहने को तैयार है कि फिलहाल विवाद सिर्फ परिसर खाली कराने तक सीमित है. इस पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि पुलिस बल के जरिए कोई कार्रवाई नहीं होगी और कानून में निर्धारित प्रक्रिया का ही पालन किया जाएगा.

केन्द्र के कब्जे को चुनौती

अदालत ने यह भी कहा कि यदि जमीन का अधिग्रहण होता भी है तो इससे क्लब की सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होगी. सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि जरूरत पड़ने पर क्लब को वैकल्पिक भूमि देने का विकल्प भी मौजूद है. हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए आठ सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी याद दिलाया कि पहले भी लीज की शर्तों के उल्लंघन को लेकर विवाद हुआ था, जिसे बाद में सुलझा लिया गया था.

इसके बाद क्लब के प्रबंधन को लेकर विवाद एनसीएलटी तक पहुंचा और वहीं से नई प्रबंधन समिति के गठन का रास्ता निकला. दरअसल, केंद्र सरकार लुटियंस दिल्ली के सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ में फैले दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर को सार्वजनिक सुरक्षा के मद्देनजर अपने कब्जे में लेना चाहती है. यह परिसर प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के बेहद करीब स्थित है.

इसी आधार पर भूमि एवं विकास कार्यालय ने बेदखली की प्रक्रिया शुरू की है. 1913 में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थानों में गिना जाता है. 1930 के दशक में वास्तुकार रॉबर्ट टी. रसेल द्वारा तैयार किया गया इसका मौजूदा परिसर लंबे समय से वरिष्ठ नौकरशाहों, सैन्य अधिकारियों, राजनयिकों और अन्य विशिष्ट लोगों का प्रमुख केंद्र रहा है. क्लब के लगभग 5,600 स्थायी सदस्य हैं और इसकी सदस्यता पाने के लिए वर्षों लंबी प्रतीक्षा सूची रहती है. अब सबकी नजर 7 जुलाई की सुनवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि इस ऐतिहासिक क्लब का भविष्य किस दिशा में जाएगा.

ये भी पढ़ें: WhatsApp के Username फीचर पर सरकार की सख्ती के बाद Meta का पहला रिएक्शन, सुरक्षा को लेकर जानें क्या कहा

राजेश कुमार पत्रकारिता जगत में पिछले करीब 14 सालों से ज्यादा वक्त से अपना योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों से लेकर अपराध जगत तक, हर मुद्दे पर वह स्टोरी लिखते आए हैं. इसके साथ ही, किसी खबरों पर किस तरह अलग-अलग आइडियाज के साथ स्टोरी की जाए, इसके लिए वह अपने सहयोगियों का लगातार मार्गदर्शन करते रहे हैं. इनकी अंतर्राष्ट्रीय जगत की खबरों पर खास नज़र रहती है, जबकि भारत की राजनीति में ये गहरी रुचि रखते हैं. इन्हें क्रिकेट खेलना काफी पसंद और खाली वक्त में पसंद की फिल्में भी खूब देखते हैं. पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर ऑफ ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म किया है. राजनीति, चुनाव, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर राजेश कुमार लगातार लिखते आ रहे हैं.
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