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Beard Tax: इस देश में दाढ़ी रखने पर लगाया जाता था टैक्स, जानें क्या थी इसके पीछे की वजह?

Beard Tax: दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां पर दाढ़ी बढ़ाने पर लोगों से टैक्स लिया जाता था. आइए जानते हैं कौन सा है वह देश और आखिर क्यों बनाया गया था यह नियम?

Beard Tax: आज के समय में यह बात काफी अजीब लग सकती है लेकिन एक समय ऐसा था जब दाढ़ी बढ़ाने पर लोगों पैसे देने पड़ते थे. यह असामान्य टैक्स सिर्फ साफ सफाई या फैशन की वजह से नहीं था बल्कि यह पूरी सभ्यता को बदलने के लिए एक बड़े बदलाव वाली कोशिश का हिस्सा था. आइए जानते हैं कि यह टैक्स कौन से देश में लगाया जाता था.

रूस में दाढ़ी टैक्स 

दाढ़ी टैक्स का सबसे बड़ा उदाहरण पीटर द ग्रेट के शासनकाल के दौरान रूस से आता है. 1698 में शुरू किया गया यह टेक्स पीटर के सबसे बड़े सुधारों का एक हिस्सा था. इसका मकसद रूस को एक आधुनिक यूरोपीय शक्ति में बदलना था. उस समय दाढ़ी पारंपरिक रूसी पहचान और ऑर्थोडॉक्स ईसाई मान्यताओं से गहराई से जुड़ी हुई थी. लेकिन पीटर उन्हें पिछड़ेपन का प्रतीक मानते थे.

पीटर द ग्रेट पर पश्चिमी यूरोप का प्रभाव 

पश्चिम यूरोप के अपने ग्रैंड टूर के बाद पीटर द ग्रेट की सोच में जबरदस्त बदलाव आया. वह उन्होंने इंग्लैंड, नीदरलैंड और फ्रांस जैसे देशों का दौरा किया. उन्होंने देखा कि यूरोपीय पुरुष खास कर रईस और अधिकारी साफ दाढ़ी वाले थे, अलग तरह के कपड़े पहनते थे और आधुनिक प्रशासनिक तरीकों का पालन करते थे. उनके लिए दाढ़ी शेव करना रुसी समाज को पश्चिमी तौर तरीकों को अपनाने के लिए मजबूर करने का तारिक बन गया.

कैसे काम करता था यह टैक्स?

जो पुरुष धार्मिक या निजी वजह से अपनी दाढ़ी रखना चाहते थे उन्हें सालाना टैक्स देना पड़ता था. एक बार भुगतान करने के बाद उन्हें तांबे या फिर चांदी का बना एक मेटल का दाढ़ी टोकन दिया जाता था. इस टोकन पर दाढ़ी एक बेकार बोझ है लिखा होता था. दाढ़ी रखने वालों को हमेशा इसे अपने पास रखना होता था. टैक्स की दर सामाजिक वर्ग पर निर्भर करती थी. जो अमीर होते थे उन्हें 100 रूबल तक देने होते थे और किसानों को काफी कम रकम देनी पड़ती थी.

क्या होती थी सजा?

कानून को काफी सख्ती से लागू किया गया था. अगर कोई भी व्यक्ति बिना वैध दाढ़ी टोकन के मिलता था तो पुलिस अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से जबरदस्ती उसकी दाढ़ी शेव करने का अधिकार था. ऐसा कहा जाता है कि पीटर द ग्रेट ने खुद उदाहरण पेश करने के लिए दरबारियों की दाढ़ी शेव की थी. 

दाढ़ी टैक्स से इकट्ठा हुए पैसे से पीटर द ग्रेट के बड़े प्रोजेक्ट को फंड मिलता था. इसमें सेंट पीटर्सबर्ग का निर्माण और रूस की नौसेना का विस्तार शामिल था. यह टेक्स लगभग 75 सालों तक लागू रहा और आखिरकार 1772 में कैथरीन द ग्रेट ने इसे खत्म किया.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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