यहां शादी में दहेज देते हैं लड़के, जानें आखिर किस कोने में बसता है दुनिया का सबसे अलग समाज?
देश-दुनिया में बसी जनजातियों का इतिहास शौर्य और कुछ ऐसी परंपराओं से भरा है, जिन्हें सुनकर रोंगटे खड़े हो सकते हैं. इनमें एक जनजाति ऐसी है, जहां पर लड़के शादी में दहेज देते हैं, न कि दहेज लेते हैं.

नागालैंड की पहाड़ियों में बसी जनजातियों का इतिहास जितना गौरवशाली है, उतना ही रहस्यमयी भी है. कभी अपनी 'हेडहंटिंग' यानी दुश्मन का सिर काटकर लाने की परंपरा के लिए दुनिया भर में मशहूर रहे ये समुदाय आज आधुनिकता की नई इबारत लिख रहे हैं. कोन्याक योद्धाओं के चेहरे पर बने टैटू से लेकर उनके हाथ से बुने रंगीन शॉलों तक, हर चीज के पीछे एक गहरी कहानी छिपी है. आइए जानते हैं, कैसे एक समय के खूंखार योद्धा आज शिक्षा और कानून के रास्ते पर चलकर अपनी संस्कृति को सहेज रहे हैं.
नागा जनजातियों का बदलता स्वरूप
नागालैंड की जनजातियां, विशेष रूप से कोन्याक समुदाय, अपने युद्ध कौशल और अनूठी परंपराओं के लिए जानी जाती रही हैं. पुराने समय में नागा समाज में हेडहंटिंग की एक प्रचलित प्रथा थी. इस प्रथा के तहत योद्धा युद्ध में अपने दुश्मन का सिर काटकर लाते थे. इसे केवल हिंसा नहीं, बल्कि बहादुरी, सम्मान और सामाजिक रुतबे का प्रतीक माना जाता था. मान्यता यह भी थी कि दुश्मन का सिर गांव में लाने से वहां की सुरक्षा पुख्ता होती है और फसलों की पैदावार अच्छी होती है.
कैसे खत्म हुई सिर काटने की प्रथा?
दशकों तक चली यह परंपरा 1960 के दशक के आसपास पूरी तरह से समाप्त हो गई. इसके पीछे कई बड़े कारण रहे हैं. ब्रिटिश शासन के आगमन, ईसाई धर्म के तेजी से फैलाव और आधुनिक सरकारी कानूनों के सख्त होने के बाद नागा समाज ने इस हिंसक प्रथा को पूरी तरह त्याग दिया. आज यह प्रथा केवल इतिहास के पन्नों, बुजुर्गों की कहानियों और कुछ वयोवृद्ध योद्धाओं के चेहरे पर बने टैटू के निशानों में ही जीवित बची है.
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कपड़ों और शॉलों में छिपा सामाजिक दर्जा
नागा समाज में पहनावे का महत्व केवल तन ढकने तक सीमित नहीं है. यहां हाथ से बुने गए शॉल और कपड़े किसी व्यक्ति की पूरी पहचान उजागर कर देते हैं. हर जनजाति के शॉल का रंग, डिजाइन और पैटर्न अलग होता है. पुराने समय में, एक खास तरह का शॉल पहनने का अधिकार केवल उन्हीं योद्धाओं को होता था जिन्होंने युद्ध में अपनी वीरता साबित की हो. आज भी नागा महिलाएं इन शॉलों को बड़े जतन से बुनती हैं, जो उनकी सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं.
शादी में लड़के देते हैं दहेज
शादी-ब्याह के मामले में नागा जनजातियों में उल्टा दहेज यानी ब्राइड प्राइस की प्रथा प्रचलित है. इसमें लड़के का परिवार लड़की के परिवार को नकद राशि या सामान देता है. शुरुआत में यह परंपरा लड़की के प्रति सम्मान व्यक्त करने और उसके पालन-पोषण के लिए माता-पिता को धन्यवाद देने के रूप में शुरू हुई थी. हालांकि, बदलते समय के साथ यह प्रथा कुछ गरीब परिवारों के लिए आर्थिक चुनौती भी बन जाती है.
आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम
आज का नागा समाज तेजी से बदल रहा है. शिक्षा के प्रसार, नई पीढ़ी की आधुनिक सोच और संवैधानिक कानूनों के प्रभाव ने पुरानी रूढ़ियों को पीछे छोड़ दिया है. अब नागा युवा डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश के विकास में योगदान दे रहे हैं. अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भी नागालैंड के लोग अब शांति और प्रगति के नए युग में प्रवेश कर चुके हैं.
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Source: IOCL



























