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Property Documents: मुनाफे पर जमीन देते वक्त इन कागजों पर जरूर कराएं साइन, वरना हाथ चली जाएगी बाप दादा की मेहनत

Important Property Documents : कई बार लोग अच्छी कीमत मिलने की खुशी में जरूरी कागजों की जांच या सही डॉक्यूमेंट्स पर साइन कराने में लापरवाही कर देते हैं.

Important Property Documents : जमीन, मकान या पुश्तैनी संपत्ति बेचना सिर्फ खरीदार मिलने और कीमत तय होने तक सीमित नहीं होता है. इसके लिए सबसे जरूरी काम  सही कानूनी कागजों के साथ पूरी प्रक्रिया को पूरा करना होता है. कई बार लोग अच्छी कीमत मिलने की खुशी में जरूरी कागजों की जांच या सही डॉक्यूमेंट्स पर साइन कराने में लापरवाही कर देते हैं.

ऐसी गलती आगे चलकर कानूनी विवाद, आर्थिक नुकसान और यहां तक कि संपत्ति पर अधिकार खोने की वजह भी बन सकती है.  भारत में किसी भी संपत्ति की खरीद-बिक्री कानूनी रूप से तभी सुरक्षित मानी जाती है, जब उससे जुड़े सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स सही हों और उनका रिकॉर्ड पूरी तरह साफ हो. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि मुनाफे पर जमीन देते वक्त किन कागजों पर जरूर साइन कराएं. 

जरूरी डॉक्यूमेंट नहीं होने पर क्या हो सकता है?

अगर खरीद-बिक्री के दौरान जरूरी कागज पूरे नहीं हैं या उनमें कोई कमी है, तो आगे जाकर कई गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं. कई बार मालिकाना हक को लेकर विवाद हो जाते हैं. सेल डीड या अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट नहीं होने पर सौदा कानूनी रूप से अमान्य माना जा सकता है. साथ ही एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट नहीं होने पर संपत्ति पर पहले से मौजूद लोन या बंधक की जानकारी छिप सकती है. वहीं अधूरे डॉक्यूमेंटों के कारण रजिस्ट्रेशन में देरी हो सकती है और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट या RERA से जुड़े जरूरी डॉक्यूमेंट नहीं होने पर कानूनी परेशानी आ सकती है. इसके अलावा बैंक होम लोन देने से इनकार कर सकते हैं. 

मुनाफे पर जमीन देते वक्त किन कागजों पर जरूर साइन कराएं

1. सेल डीड - यह संपत्ति का मालिकाना हक विक्रेता से खरीदार के नाम ट्रांसफर करने वाला सबसे जरूरी कानूनी डॉक्यूमेंट है. जमीन देते वक्त इस पर जरूर साइन कराएं. 

2. टाइटल डीड  - यह कागज साबित करता है कि संपत्ति का असली मालिक कौन है और उसे संपत्ति बेचने का कानूनी अधिकार है. 

3. एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट - इससे पता चलता है कि संपत्ति पर कोई लोन, बंधक या कानूनी विवाद तो नहीं है. जमीन देते वक्त इस पर जरूर साइन कराएं. 

4.एग्रीमेंट टू सेल - खरीदार और विक्रेता के बीच कीमत, भुगतान, कब्जा और अन्य शर्तों का शुरुआती कानूनी समझौता होता है. 

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5. प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट - प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट मालिकाना हक को कानूनी मान्यता देते हैं और मालिकाना हक को सुरक्षित बनाते हैं. 

6. म्यूटेशन - म्यूटेशन एक्सट्रैक्ट स्थानीय भूमि रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज होने का प्रमाण होता है. 

7. पावर ऑफ अटॉर्नी  - अगर संपत्ति का मालिक किसी कारण से खुद मौजूद नहीं हो सकता, तो वह किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी ओर से कानूनी अधिकार देने के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी जारी कर सकता है. 

8. RERA से जुड़े डॉक्यूमेंट - RERA रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट की कानूनी मंजूरी, रजिस्ट्रेशन और बिल्डर की जानकारी की पुष्टि करते हैं. 

9. सोसायटी शेयर सर्टिफिकेट -  अगर संपत्ति किसी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में है, तो सोसायटी शेयर सर्टिफिकेट बेहद जरूरी डॉक्यूमेंट होता है. यह बताता है कि संबंधित व्यक्ति सोसायटी का सदस्य और उस फ्लैट का वैध मालिक है

10. प्रॉपर्टी टैक्स रसीद और पजेशन सर्टिफिकेट - टैक्स रसीद से सभी बकाया टैक्स जमा होने का पता चलता है, जबकि पजेशन सर्टिफिकेट संपत्ति का कब्जा मिलने का प्रमाण होता है. 

घर खरीदने वालों के लिए ये भी है जरूरी डॉक्यूमेंट

प्रॉपर्टी खरीदने से पहले जमीन के रिकॉर्ड, सर्वे रिकॉर्ड, पुराने मालिकों का रिकॉर्ड, म्यूटेशन रिकॉर्ड और एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट की जांच जरूर करनी चाहिए. अगर होम लोन लेना है, तो पहचान पत्र, आय प्रमाण, बैंक स्टेटमेंट, सेल एग्रीमेंट और प्रॉपर्टी के कानूनी डॉक्यूमेंट जमा करने होते हैं.

इसके अलावा, हाउसिंग सोसायटी, बिल्डर या संबंधित विभाग से एनओसी लेना भी जरूरी होता है, जिससे पता चलता है कि संपत्ति पर कोई बकाया या विवाद नहीं है. संपत्ति का मालिकाना हक ट्रांसफर करने के लिए रजिस्टर्ड सेल डीड, स्टांप ड्यूटी का भुगतान और म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है. वहीं, विक्रेता को अपनी पहचान और पते के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे वैध डॉक्यूमेंट भी देने होते हैं. 
 
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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. फिलहाल वह एबीपी नेटवर्क के टेक सेक्शन में काम कर रही हैं, जहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने के साथ-साथ उनके लिए रिसर्च और कंटेंट तैयार करने की जिम्मेदारी संभालती हैं.

पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से इंटर्न के रूप में की. इसके बाद से वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. फीचर, टेक और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ उनकी रुचि स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में है.

मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की. वर्तमान में वह राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं.मानसी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं.

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