राज्यपाल की तरह राष्ट्रपति किसी बिल को रोक ले तो क्या होता है? जान लीजिए महामहिम की ताकत
Power Of President: राष्ट्रपति के पास कई अधिकार होते हैं, जो कि उनको औरों से अलग बनाते हैं. अगर राष्ट्रपति किसी बिल को रोक ले तो क्या होगा. चलिए जानते हैं.

हमारा देश भारतीय संविधान के अनुसार चलता है और इस देश के मुखिया राष्ट्रपति होते हैं. इस वक्त देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हैं. वैसे तो भारत में ज्यादातर प्रधानमंत्री ही लाइमलाइट में रहते हैं, जबकि राष्ट्रपति को कम ही मौकों पर सार्वजनिक रूप से देखा जाता है. हमारे देश में राष्ट्रपति का पद बहुत ही प्रतिष्ठित और अहम होता है. राष्ट्रपति क पास बहुत सी शक्तियां होती हैं, जो कि उनको औरों से अलग बनाती हैं. चलिए जान लेते हैं कि अगर राष्ट्रपति किसी बिल को रोक ले तो क्या होता है.
राष्ट्रपति किसी बिल को रोक ले तो?
कुछ बिल ऐसे होते हैं, जिनको कानून बनाने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होती है. जब कोई बिल संसद के दोनों लोकसभा और राज्यलभा में पेश किया जाता है तो वहां से उसका पास होना जरूरी होता है. वहां से पास होने के बाद उसको राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाता है. इसके बिना तो कोई विधेयक कानून नहीं बन सकता है. धन विधेयक, किसी नए राज्य का निर्माण, कोई नया कानून लागू कराना या किसी कानून में संशोधन, सीमांकन या फिर भूमि अधिग्रहण के मामले में कोई विधेयक, राष्टपति की सिफारिश के बिना यह कानून नहीं बन सकता है.
राष्ट्रपति की शक्तियों की बात करें तो लोकतंत्र के तीन मजबूत स्तंभ कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका होते हैं. संघ की कार्यपालिका की शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है. वो केंद्रीय मंत्रिमंडल के जरिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. राष्ट्रपति थल सेना, नौसेना और वायुसेना का सर्वोच्च सेनापति होता है.
राष्ट्रपति के पास किनकी नियुक्ति का है अधिकार
- भारत के प्रधानमंत्री और उनके सलाहकार
- राज्यों के राज्यपाल की नियुक्ति
- विदेशों में भारतीय राजदूतों की नियुक्ति
- सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति
- सभी चुनाव आयुक्त
- भारत के नियंत्रण और महालेखा परीक्षण
कौन सी शक्तियां राष्ट्रपति को बनाती हैं अलग
- राष्ट्रपति के पास राजनीतिक शक्ति होती है, जिसके जरिए वे एंग्लो इंडियन समुदाय के दो व्यक्तियों को लोकसभा में मनोनीत कर सकते हैं. राज्यसभा में पत्रकारिता, साहित्य, विज्ञान और कला के क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव रखने वाले 12 लोगों को मनोनीत कर सकते हैं. दूसरे देशों के साथ होने वाले किसी भी संधि या समझौते पर राष्ट्रपति का हस्ताक्षर जरूरी है.
- दूसरी और खास शक्ति होती है अध्यादेश जारी करने का अधिकार. जब संसद के दोनों सदनों में सत्र न चल रहा हो, उस वक्त राष्ट्रपि को यह अधिकार होता है कि वे नया अध्यादेश जारी कर सकते हैं. इसका प्रभाव संसद सत्र शुरू होने के 6 हफ्ते तक रहता है.
- राष्ट्रपति के पास क्षमादान की भी शक्ति होती है. संविधान के अनुच्छेद 72 के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी शख्स को क्षमादान करके पूर्णं दंड से बचा सकते हैं. हालांकि एक बार क्षमा याचिका रद्द कर दी तो फिर दोबारा याचिका दायर नहीं की जा सकती है.
- राष्ट्रपति के पास आपातकाल लगाने की भी शक्ति है. इसमें तीन तरह की इमरजेंसी शामिल होती है. पहली युद्ध या सशस्त्र विद्रोह के दौरान, दूसरी राज्यों के संवैधानिक तंत्र फेल होने पर और तीसरी होती है वित्तीय आपातकाल.
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Source: IOCL






















