कोई खिलाड़ी अपनी मर्जी से IPL में खेलने से कर दे इंकार, क्या तब भी देनी होती है नीलामी की रकम?
IPL नीलामी में बिकना जितना फायदेमंद दिखता है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आता है. बिना वजह खेलने से इनकार किया, तो रकम भी जा सकती है और करियर पर ब्रेक भी लग सकता है.

IPL की नीलामी में करोड़ों की बोली लगती है और खिलाड़ी रातों-रात स्टार बन जाते हैं, लेकिन क्या हो अगर कोई खिलाड़ी नीलामी में बिकने के बाद अचानक खेलने से मना कर दे? क्या उसे फिर भी पूरी रकम मिलती है या टीम को नुकसान उठाना पड़ता है? यही सवाल हर सीजन चर्चा में रहता है, खासकर तब जब कोई बड़ा नाम आखिरी वक्त पर टूर्नामेंट से हट जाता है। IPL के नियम इस मामले में बेहद सख्त हैं और इनके पीछे मजबूत वजह भी है, आइए जानें.
IPL नीलामी और खिलाड़ी की जिम्मेदारी
इंडियन प्रीमियर लीग पूरी तरह से BCCI द्वारा संचालित टूर्नामेंट है. जब कोई खिलाड़ी IPL नीलामी के लिए अपना नाम देता है, तो वह पहले से तय नियमों और शर्तों को स्वीकार करता है. नीलामी में बिकने के बाद खिलाड़ी और फ्रेंचाइजी के बीच एक तरह से पेशेवर अनुबंध बन जाता है. ऐसे में खिलाड़ी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह उपलब्ध रहे और टीम के लिए खेले.
अगर खिलाड़ी अपनी मर्जी से खेलने से इनकार करे
अगर कोई खिलाड़ी बिना किसी ठोस और वैध कारण के IPL खेलने से इनकार करता है, तो उसे नीलामी में मिली पूरी रकम नहीं दी जाती है. IPL में ‘नो प्ले, नो पे’ यानी खेलोगे तभी भुगतान मिलेगा, का नियम लागू होता है. इसका मतलब साफ है कि अगर खिलाड़ी मैदान पर उतरता ही नहीं है, तो उसे पूरे पैसे का हक नहीं मिलता है.
दो साल का प्रतिबंध क्यों लगता है
BCCI के नियमों के अनुसार, नीलामी में बिकने के बाद नाम वापस लेना गंभीर उल्लंघन माना जाता है. ऐसे मामलों में खिलाड़ी पर अगले दो IPL सीजन और नीलामी से प्रतिबंध लगाया जा सकता है. यह बैन सिर्फ सजा नहीं, बल्कि एक संदेश भी है कि खिलाड़ी नीलामी में शामिल होने से पहले पूरी गंभीरता से फैसला करें.
कब मिल सकती है छूट
हर स्थिति में खिलाड़ी को सजा ही मिले, ऐसा जरूरी नहीं है. अगर खिलाड़ी किसी गंभीर चोट से जूझ रहा हो, या फिर उसे अपने देश की राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना जरूरी हो, तो उसे छूट मिल सकती है. हालांकि इसके लिए मेडिकल रिपोर्ट या होम बोर्ड की आधिकारिक पुष्टि जरूरी होती है. बिना पुख्ता सबूत के कारण को मान्य नहीं किया जाता है.
फ्रेंचाइजी के हित क्यों हैं सबसे अहम
IPL की हर टीम नीलामी के दौरान अपनी रणनीति बनाती है. खिलाड़ी पर बड़ी रकम खर्च करने के बाद अगर वह आखिरी वक्त पर खेलने से मना कर दे, तो टीम को खेल और संतुलन दोनों में नुकसान होता है. BCCI के सख्त नियम फ्रेंचाइजी को इसी नुकसान से बचाने के लिए बनाए गए हैं, ताकि टीमों की योजना बीच में न बिगड़े.
विदेशी खिलाड़ियों के लिए नियम और भी जरूरी
IPL में बड़ी संख्या में विदेशी खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं. कई बार अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल या निजी कारणों से विदेशी खिलाड़ी टूर्नामेंट से हटना चाहते हैं. इसी वजह से BCCI ने साफ नियम बनाए हैं, ताकि खिलाड़ी बिना ठोस कारण के IPL को हल्के में न लें और लीग की विश्वसनीयता बनी रहे.
क्या खिलाड़ी को बिल्कुल भी पैसा नहीं मिलता
अगर खिलाड़ी टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं बनता, तो आमतौर पर उसे पूरी रकम नहीं मिलती है. हालांकि कुछ मामलों में फ्रेंचाइजी और खिलाड़ी के बीच आपसी सहमति से आंशिक भुगतान या अलग व्यवस्था हो सकती है, लेकिन यह पूरी तरह नियमों और अनुबंध पर निर्भर करता है.
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Source: IOCL























