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कितने साल पुराना है परफ्यूम का इतिहास, जानें किस देश में पहली बार बनाया गया था यह?

असल में, परफ्यूम सिर्फ खुशबू नहीं है. यह मानव सभ्यता की यात्रा का हिस्सा है. इसमें धर्म, विज्ञान, व्यापार, संस्कृति, औपनिवेशिक इतिहास और प्रकृति सब कुछ शामिल है.

जब भी हम परफ्यूम शब्द सुनते हैं, तो हमारी आंखों के सामने खूबसूरत बोतलों में बंद एक महकदार तरल की तस्वीर उभर आती है. आज परफ्यूम फैशन, स्टाइल और पहचान का हिस्सा बन चुका है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खुशबू लगाने की यह आदत कितनी पुरानी है, क्या यह किसी फैक्ट्री में बना आधुनिक आविष्कार है, या फिर इसकी जड़ें हजारों साल पुराने इतिहास में छुपी हैं.

असल में, परफ्यूम सिर्फ खुशबू नहीं है. यह मानव सभ्यता की यात्रा का हिस्सा है. इसमें धर्म, विज्ञान, व्यापार, संस्कृति, औपनिवेशिक इतिहास और प्रकृति सब कुछ शामिल है. परफ्यूम का इतिहास हमें यह बताता है कि इंसान ने कब, क्यों और कैसे खुशबू को अपने जीवन का अहम हिस्सा बनाया. तो आइए जानते हैं कि परफ्यूम का इतिहास कितने साल पुराना है और किस देश में यह पहली बार बनाया गया था. 

परफ्यूम का इतिहास कितने साल पुराना?

इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के अनुसार, परफ्यूम का इतिहास करीब 4,000 से 5,000 साल पुराना है. शुरुआत में यह तरल रूप में नहीं था, बल्कि धूप, अगरबत्ती और जली हुई खुशबूदार लकड़ियों के रूप में यूज होता था. 

किस देश में पहली बार बनाया गया परफ्यूम?

दुनिया का पहला परफ्यूम मेसोपोटामिया (आज का इराक क्षेत्र) में बनाया गया माना जाता है. यह करीब 1200 ईसा पूर्व, यहां तप्पुती (Tapputi) नाम की एक महिला ने पहली बार फूलों और तेलों को मिलाकर खुशबू तैयार की, तप्पुती कोई आम महिला नहीं थीं. वह एक रसायनशास्त्री थीं और शाही दरबार में काम करती थीं. उन्होंने खुशबू निकालने के लिए उबालने, छानने और आसवन जैसी तकनीकों का यूज किया. इन्हें दुनिया की पहली परफ्यूमर (Nose) माना जाता है. 

परफ्यूम शब्द कहां से आए?

परफ्यूम शब्द फ्रेंच भाषा से आया है, लेकिन इसकी जड़ें लैटिन भाषा में हैं. लैटिन शब्द Per Fumus का मतलब धुएं के जरिए होता है. इसका सीधा संबंध उस समय से है जब लोग लकड़ियों, जड़ी-बूटियों और रेजिन को जलाकर खुशबू पैदा करते थे. माना जाता था कि उठता हुआ धुआं भगवान तक पहुंचता है. मिस्र में परफ्यूम का यूज धार्मिक अनुष्ठानों, देवी-देवताओं की पूजा और ममी बनाने में होता था. 

यूरोप में आधुनिक परफ्यूम की शुरुआत

1190 में पेरिस में पहली बार परफ्यूम को एक व्यापार के रूप में शुरू किया गया. फ्रांस धीरे-धीरे दुनिया का परफ्यूम कैपिटल बन गया. यूरोप ने अरब तकनीकों को अपनाकर अल्कोहल बेस परफ्यूम बनाए. हल्की लेकिन लंबे समय तक टिकने वाली खुशबू विकसित की, यूरोपीय देशों ने एशिया और अफ्रीका से कच्चा माल लिया, लेकिन ब्रांडिंग अपने नाम से की. इससे यह धारणा बनी कि अच्छा परफ्यूम सिर्फ यूरोपीय होता है, जबकि असली जड़ें एशिया और मध्य पूर्व में थीं. 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. फिलहाल वह एबीपी नेटवर्क के टेक सेक्शन में काम कर रही हैं, जहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने के साथ-साथ उनके लिए रिसर्च और कंटेंट तैयार करने की जिम्मेदारी संभालती हैं.

पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से इंटर्न के रूप में की. इसके बाद से वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. फीचर, टेक और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ उनकी रुचि स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में है.

मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की. वर्तमान में वह राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं.मानसी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं.

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