एक्सप्लोरर

Ranchi Air Ambulance Crash: प्लेन को एयर एंबुलेंस बनाने में कितना आता है खर्च, इसके लिए किससे लेनी होती है इजाजत?

रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस चतना में क्रैश हो गई, जिसमें सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई. लेकिन क्या आपको पता है कि किसी विमान को एयर एंबुलेंस बनाने में कितना खर्चा आता है और इसके लिए कौन परमिशन देता है.

झारखंड के चतरा जिले में हुई दर्दनाक एयर एंबुलेंस दुर्घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. रांची से दिल्ली जा रहा छोटा विमान सिमरिया थाना क्षेत्र के करमाटांड़ के जंगलों में गिरकर हादसे का शिकार हो गया. इस दुर्घटना में मरीज, उनके दो परिजन, दो पायलट, एक डॉक्टर और एक नर्स- कुल सात लोगों की जान चली गई. इस त्रासदी के बाद लोगों के मन में यह जिज्ञासा भी उठी है कि आखिर किसी सामान्य विमान को एयर एंबुलेंस में बदलने में कितना खर्च आता है और इसके लिए किन-किन अनुमतियों की जरूरत होती है. 

विमान को एयर एंबुलेंस बनाने में कितना आता है खर्च?

किसी निजी विमान को एयर एंबुलेंस में बदलना साधारण बदलाव नहीं, बल्कि एक तकनीकी और महंगा प्रोजेक्ट होता है. यह काम विमान की बनावट, उसके आकार और उसमें उपलब्ध कराई जाने वाली चिकित्सा सुविधा के स्तर पर निर्भर करता है.

सबसे बड़ा खर्च मेडिकल उपकरणों पर आता है. यदि विमान को आईसीयू स्तर की सुविधा से लैस करना हो तो उसमें वेंटिलेटर, मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर, इन्फ्यूजन पंप, ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम और सक्शन मशीन जैसी अत्याधुनिक मशीनें लगानी पड़ती हैं. इस पूरी मेडिकल सेटअप की लागत आमतौर पर 1 से 3 लाख अमेरिकी डॉलर या उससे अधिक तक जा सकती है. अगर एडवांस लाइफ सपोर्ट या ईसीएमओ जैसी हाई-एंड सुविधा जोड़नी हो तो खर्च और बढ़ जाता है. 

इसके अलावा विमान में स्ट्रेचर फिटिंग, मेडिकल कैबिनेट, बिजली की अतिरिक्त वायरिंग, पावर बैकअप और विशेष लाइटिंग जैसी संरचनात्मक बदलाव करने पड़ते हैं. इन तकनीकी संशोधनों के लिए इंजीनियरिंग डिजाइन, परीक्षण और प्रमाणन पर भी बड़ी रकम खर्च होती है. कुल मिलाकर किसी छोटे टर्बोप्रॉप विमान को एयर एंबुलेंस में बदलने का पूंजीगत खर्च कई लाख डॉलर से शुरू होकर 10 लाख डॉलर या उससे अधिक तक पहुंच सकता है. 

ऑपरेशन का खर्च कितना?

अगर केवल एक यात्रा की बात करें तो भारत में एयर एंबुलेंस की लागत दूरी और सेवा के स्तर के अनुसार बदलती है. हेलीकॉप्टर एंबुलेंस का उपयोग आमतौर पर पहाड़ी या दुर्गम क्षेत्रों में किया जाता है, जिसकी कीमत लगभग डेढ़ लाख रुपये से 8 लाख रुपये तक हो सकती है. वहीं फिक्स्ड-विंग विमान से लंबी दूरी की उड़ान, जैसे एक शहर से दूसरे शहर या अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर, 2 लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये या उससे अधिक तक जा सकती है.

इसमें डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की फीस, 24 घंटे की उपलब्धता, ईंधन, एयरपोर्ट शुल्क और आपातकालीन बुकिंग जैसे कारक भी शामिल होते हैं. अंतिम समय में की गई बुकिंग आमतौर पर अधिक महंगी पड़ती है. 

इसके लिए किससे लेनी होती है अनुमति?

भारत में किसी विमान को एयर एंबुलेंस में बदलने और उसका संचालन करने के लिए सबसे अहम अनुमति Directorate General of Civil Aviation यानी डीजीसीए से लेनी होती है. डीजीसीए विमान की एयरवर्दीनेस, तकनीकी बदलाव और सुरक्षा मानकों की निगरानी करता है. 

विमान में संरचनात्मक बदलाव के लिए सप्लीमेंटल टाइप सर्टिफिकेट (STC) की मंजूरी जरूरी होती है. इसके अलावा ऑपरेशन के लिए नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर परमिट (NSOP) अनिवार्य है. यह अनुमति Ministry of Civil Aviation के अधीन नियामकीय ढांचे के तहत जारी की जाती है. 

कुछ मामलों में चिकित्सा सेवाओं के संचालन से जुड़ी स्वीकृतियों के लिए Ministry of Health and Family Welfare की गाइडलाइन का पालन करना पड़ता है, जबकि सुरक्षा और आंतरिक मंजूरी से जुड़े मामलों में Ministry of Home Affairs की भूमिका भी हो सकती है.

सुरक्षा क्यों है सबसे बड़ी चुनौती?

एयर एंबुलेंस को हवा में उड़ते-उड़ते एक छोटे आईसीयू की तरह काम करना होता है. विमान के भीतर दबाव, कंपन और सीमित जगह जैसी परिस्थितियों में मेडिकल उपकरणों का सुरक्षित और सुचारु संचालन सुनिश्चित करना बड़ी तकनीकी चुनौती है. इसलिए हर उपकरण को विशेष फ्लाइट-सेफ्टी प्रमाणन की आवश्यकता होती है.

यह भी पढ़ें: Autobahn Germany: जर्मनी में हाईवे पर नहीं होती स्पीड लिमिट, जानें क्या है इसके पीछे की वजह?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Balochistan Independence: चीन और पाकिस्तान के लिए क्यों जरूरी है बलूचिस्तान, जानें क्या है यहां फैले विद्रोह के पीछे की वजह?
चीन और पाकिस्तान के लिए क्यों जरूरी है बलूचिस्तान, जानें क्या है यहां फैले विद्रोह के पीछे की वजह?
Highway Hypnosis: कभी भी सीधी दिशा में क्यों नहीं बनते हाई-वे, जानें घुमावदार क्यों बनाया जाता है रास्ता?
कभी भी सीधी दिशा में क्यों नहीं बनते हाई-वे, जानें घुमावदार क्यों बनाया जाता है रास्ता?
Daylight Saving Time: क्या है डेलाइट सेविंग, आखिर अमेरिका क्यों बदलने जा रहा घड़ी की सुईयां और इसका क्या होगा असर?
क्या है डेलाइट सेविंग, आखिर अमेरिका क्यों बदलने जा रहा घड़ी की सुईयां और इसका क्या होगा असर?
क्या चांद पर भी चल सकता है इंटरनेट, वहां से कैसे होगी वीडियो कॉल
क्या चांद पर भी चल सकता है इंटरनेट, वहां से कैसे होगी वीडियो कॉल

वीडियोज

Hyundai Alcazar Long Term Review & E20 Petrol Mileage Test | #hyundai #alcazar #review #autolive
Nitin Gadkari Exclusive: E20 Petrol पर क्या बोले? Part 2 | #nitingadkari #e20fuel #autolive
Man Atisundar:🙈radhya से 'I love you' सुनने के लिए तड़पा Pratham, लाख कोशिशों बाद नखरे बरकरार #sbs
Bollywood News: शानदार VFX और रावण बने यश के लुक के खुलासे से 'रामायण' के ट्रेलर ने सोशल मीडिया पर मचाई 'तबाही'। (19.07.26)
BMW R1300 GSA: One of the Best Adventure bike of BMW! #bmw #bmwr1300gsa #bmwbike #autolive

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'सब कुछ रिकॉर्ड करें...', 'चलो संसद' मार्च से पहले CJP ने जारी की गाइडलाइन, प्रदर्शनकारियों से खास अपील
'सब कुछ रिकॉर्ड ...', संसद मार्च से पहले CJP ने जारी की गाइडलाइन, प्रदर्शनकारियों से खास अपील
Dehradun Weather News: मूसलाधार बारिश से देहरादून बेहाल, सड़क बनी तालाब; कई वाहन फंसे, कल स्कूलों में छुट्टी, आंगनबाड़ी केंद्र बंद
मूसलाधार बारिश से देहरादून बेहाल, सड़क बनी तालाब; कई वाहन फंसे, कल स्कूलों में छुट्टी, आंगनबाड़ी केंद्र बंद
काकोली घोष NCPI की चीफ व्हिप और संदीप बंद्योपाध्याय होंगे फ्लोर लीडर, मानसून सत्र से पहले ओम बिरला ने दी मंजूरी
काकोली घोष चीफ व्हिप, संदीप बंद्योपाध्याय होंगे NCPI के फ्लोर लीडर, स्पीकर ओम बिरला ने दी मंजूरी
Lock Upp 2: 'मैंने अपना हाथ काट लिया था', हर्षद चोपड़ा ने प्यार में धोखा मिलने के बाद की थी सुसाइड करने की कोशिश
लॉक अप 2: 'मैंने अपना हाथ काट लिया था', हर्षद चोपड़ा ने प्यार में धोखा मिलने के बाद की थी सुसाइड करने की कोशिश
बेन डकेट लॉर्ड्स पर शतक जड़ने वाले दुनिया के छठे बल्लेबाज बने, ODI के इतिहास का बनाया सबसे बड़ा स्कोर
बेन डकेट लॉर्ड्स पर शतक जड़ने वाले दुनिया के छठे बल्लेबाज बने, ODI के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर
Spain Vs Argentina FIFA Final 2026: स्पेन और अर्जेंटीना के मैच के वक्त नहीं पहुंच पाए घर तो दिल्ली में इन जगहों पर देख सकते हैं लाइव
स्पेन और अर्जेंटीना के मैच के वक्त नहीं पहुंच पाए घर तो दिल्ली में यहां देख सकते हैं लाइव
TMC के बागी सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की मंजूरी पर भड़के कल्याण बनर्जी, बोले- 'ये उम्मीद के ...'
TMC के बागी सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की मंजूरी पर भड़के कल्याण बनर्जी, बोले- 'ये उम्मीद के ...'
इस बार इन किसानों के खाते में सबसे पहले आएगा किसान निधि का पैसा, देखें लिस्ट में अपना नाम
इस बार इन किसानों के खाते में सबसे पहले आएगा किसान निधि का पैसा, देखें लिस्ट में अपना नाम
Embed widget